‘रास्ते बंद हों तो सत्याग्रह करो’... 12 साल पुराना अरुण जेटली का बयान, क्या राहुल गांधी पर आज हो रहा है फिट?
अरुण जेटली ने 2014 में चुनाव आयोग को लेकर सत्याग्रह की बात कही थी. अब SIR के विरोध में राहुल गांधी के आंदोलन के बीच उनका 12 साल पुराना बयान फिर चर्चा में है.
देश में विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर चुनाव आयोग और विपक्ष के बीच टकराव लगातार बढ़ता जा रहा है. कांग्रेस समेत 19 विपक्षी दल इस प्रक्रिया का विरोध कर रहे हैं. राहुल गांधी पिछले तीन दिनों से इस मुद्दे पर लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं और अब मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग तक पहुंच गए हैं. इसी बीच 2014 का अरुण जेटली का बयान फिर चर्चा में आ गया है. तब नरेंद्र मोदी के वाराणसी चुनाव अभियान को लेकर चुनाव आयोग के फैसले पर जेटली ने सवाल उठाए थे और कहा था कि जब संवैधानिक रास्ते बंद हो जाते हैं तो 'सत्याग्रह' का रास्ता अपनाना पड़ता है.
अरुण जेटली ने चुनाव आयोग पर क्या सवाल उठाए थे?
मई 2014 में नरेंद्र मोदी वाराणसी से लोकसभा चुनाव लड़ रहे थे. चुनाव आयोग ने उनकी एक रैली को अनुमति नहीं दी थी. बीजेपी ने इसका विरोध किया था. उस समय अरुण जेटली ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा था कि 1952 से लेकर 2014 तक ऐसा कोई दूसरा उदाहरण नहीं मिलता, जब किसी उम्मीदवार को उसके अपने चुनाव क्षेत्र में रैली करने से रोका गया हो. उन्होंने कहा था कि अगर संवैधानिक रास्ते बंद किए जाते हैं तो सत्याग्रह करना जरूरी हो जाता है.
SIR को लेकर विपक्ष आखिर इतना आक्रामक क्यों है?
अब 2026 में मामला SIR का है. विपक्ष का आरोप है कि विशेष गहन पुनरीक्षण के जरिए मतदाता सूची में ऐसे बदलाव हो सकते हैं, जिनका असर वास्तविक मतदाताओं के अधिकार पर पड़ेगा. राहुल गांधी लगातार चुनाव आयोग से इस प्रक्रिया को लेकर जवाब मांग रहे हैं. वहीं चुनाव आयोग का कहना है कि मतदाता सूची को सही और अपडेट रखना उसकी संवैधानिक जिम्मेदारी है और SIR का उद्देश्य अयोग्य, फर्जी या दोहरे नामों की पहचान करना है.
पिछले तीन दिनों में राहुल गांधी ने क्या-क्या किया?
5 अक्टूबर को राहुल गांधी ने फॉर्म-6 से जुड़े बदलाव को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर सवाल उठाए. राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि प्रक्रिया में बदलाव से बीजेपी को फायदा पहुंच सकता है. चुनाव आयोग ने इन आरोपों को खारिज करते हुए राहुल गांधी के दावे को भ्रामक बताया.
6 अक्टूबर को राहुल गांधी INDIA ब्लॉक के सांसदों के साथ चुनाव आयोग के कार्यालय की ओर मार्च करने पहुंचे. प्रदर्शनकारियों ने SIR वापस लेने और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की. पुलिस ने राहुल गांधी समेत कई विपक्षी नेताओं को हिरासत में लिया. इसके अगले दिन 7 अक्टूबर को भी विपक्षी सांसदों ने प्रदर्शन किया और राहुल गांधी समेत कई नेताओं को दोबारा हिरासत में लिया गया. राहुल गांधी ने कहा कि उनका आंदोलन मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे तक जारी रहेगा.
क्या SIR का विरोध अब देशव्यापी आंदोलन बनने जा रहा है?
अब कांग्रेस ने 8 अक्टूबर को देशभर में विरोध प्रदर्शन का फैसला किया है. पार्टी ने 7 अक्टूबर को ‘काला दिवस’ बताया. ऐसे में SIR का मुद्दा अब सिर्फ मतदाता सूची की प्रक्रिया तक सीमित नहीं रह गया है. विपक्ष इसे लोकतंत्र और मतदाता के अधिकार से जोड़ रहा है, जबकि चुनाव आयोग प्रक्रिया को संवैधानिक जिम्मेदारी के तौर पर देख रहा है.
क्या अरुण जेटली की पुरानी बात राहुल गांधी के लिए राजनीतिक हथियार बन गई है?
अरुण जेटली का 12 साल पुराना बयान अब राहुल गांधी के आंदोलन के संदर्भ में राजनीतिक बहस का हिस्सा बन गया है. 2014 में बीजेपी चुनाव आयोग के एक फैसले के खिलाफ सड़क पर उतरी थी और आज कांग्रेस उसी संस्था की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए आंदोलन कर रही है. दोनों घटनाओं के मुद्दे अलग हैं, लेकिन बहस का केंद्र चुनाव आयोग की भूमिका और उसके फैसलों पर राजनीतिक दलों के विरोध के अधिकार को लेकर है.




