बंगाल CM चुनने से पहले कोलकाता के दक्षिणेश्वर काली मंदिर गए अमित शाह, क्या दिया मैसेज?
BJP के पहले बंगाल CM के ऐलान से पहले अमित शाह दक्षिणेश्वर काली मंदिर पहुंचे. जानिए इस दौरे के धार्मिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक मायने.
बंगाल में सियासी घटनाक्रम तेजी से बदल रहा है. आठ मई की सुबह बीजेपी के विधायक दल का नेता चुनने के लिए सुबह 10 बजे के करीब केंद्रीय गृह मंत्री कोलकाता पहुंच गए थे. उसके बाद वह विधायक दल के नेताओं को लेकर अहम नेताओं से चर्चा की. लेकिन विधायक दल के नेता का एलान होने से पहले वह कोलकाता के दक्षिणेश्वर काली मंदिर पहुंच गए. शाह का काली मंदिर पहुंचने को सिर्फ धार्मिक यात्रा के रूप में नहीं देखा जा रहा, बल्कि इसे बंगाल की राजनीति और सांस्कृतिक संदेश से जोड़कर भी समझा जा रहा है.
अमित शाह के इस रुख को पश्चिम बंगाल में BJP की ऐतिहासिक जीत और राज्य के पहले BJP मुख्यमंत्री के नाम के ऐलान से पहले वहां जाना अब राजनीतिक रूप से बेहद अहम हो गया है. लोग यह जानना चाह रहे हैं कि शाह वहां क्यों गए, क्या उनका दक्षिणेश्वर काली मंदिर से कोई कनेक्शन है? क्या हैं इसके सियासी मायने.
दक्षिणेश्वर काली: बंगाल की आस्था का बड़ा केंद्र
दक्षिणेश्वर काली मंदिर Kolkata के सबसे प्रसिद्ध धार्मिक स्थलों में गिना जाता है. यह मंदिर 1855 में रानी रश्मोनी द्वारा बनवाया गया था. मां भद्रकाली को समर्पित यह मंदिर हुगली नदी के किनारे स्थित है और बंगाल की धार्मिक-सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है.
मंदिर की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसका संबंध सीधे रामकृष्ण परमहंस से जुड़ा है. रामकृष्ण परमहंस ने यहीं पुजारी के रूप में साधना की थी. बाद में उनके विचारों ने पूरे भारत में आध्यात्मिक आंदोलन का रूप लिया. इसी परंपरा से Swami Vivekananda भी जुड़े रहे. इसलिए यह मंदिर सिर्फ धार्मिक नहीं, बल्कि आध्यात्मिक और सांस्कृतिक प्रतीक भी माना जाता है.
BJP के लिए क्यों अहम है दक्षिणेश्वर काली मंदिर?
पश्चिम बंगाल की राजनीति में लंबे समय तक वामपंथ और क्षेत्रीय अस्मिता की राजनीति हावी रही, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में BJP ने हिंदुत्व और सांस्कृतिक पहचान को बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनाया. ऐसे में दक्षिणेश्वर काली मंदिर BJP के लिए बंगाल की धार्मिक भावनाओं से जुड़ने का बड़ा जरिया है.
बीजेपी विधायक दल नेता का ऐलान से ठीक पहले अमित शाह का यहां पहुंचना यह संदेश देने की कोशिश माना जा रहा है कि BJP बंगाल की संस्कृति और आध्यात्मिक परंपराओं के साथ खुद को जोड़कर पेश करना चाहती है. खास बात यह भी है कि चुनाव प्रचार के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत BJP के कई बड़े नेताओं ने बंगाल की धार्मिक विरासत का लगातार जिक्र कर चुके हैं.
राजनीतिक टाइमिंग भी अहम
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, BJP यह दिखाना चाहती है कि उसकी सरकार सत्ता परिवर्तन के साथ-साथ सांस्कृतिक बदलाव का भी प्रतीक होगी. बंगाल में काली पूजा और शक्ति उपासना की गहरी परंपरा रही है. ऐसे में दक्षिणेश्वर मंदिर में पूजा कर BJP राज्य की बहुसंख्यक धार्मिक भावनाओं के साथ सीधा जुड़ाव बनाने की कोशिश करती दिख रही है.
सिर्फ मंदिर नहीं, राजनीतिक संदेश भी
दक्षिणेश्वर काली मंदिर बंगाल की पहचान, आध्यात्मिक विरासत और जनभावनाओं का केंद्र माना जाता है. इसलिए अमित शाह का वहां जाना केवल धार्मिक आस्था का मामला नहीं, बल्कि एक बड़ा राजनीतिक संकेत भी माना जा रहा है. BJP बंगाल में अपनी नई सत्ता की शुरुआत को सांस्कृतिक प्रतीकों के साथ जोड़कर जनता के बीच मजबूत संदेश देने की रणनीति पर काम करती दिख रही है.
क्या है यहां की अहम परंपरा?
Dakshineswar Kali Temple की सबसे अहम परंपरा “शक्ति उपासना” और भक्ति साधना मानी जाती है. इस मंदिर में मां भद्रकाली की पूजा “भवतरिणी” रूप में होती है, यानी ऐसी देवी जो भक्तों को दुख और संकट से पार लगाती हैं. यहां रोजाना विशेष आरती, तांत्रिक परंपरा से जुड़ी पूजा और काली भक्ति का विशेष महत्व है.
मंदिर की सबसे बड़ी आध्यात्मिक परंपरा Ramakrishna Paramahamsa से जुड़ी है. उन्होंने यहीं मां काली की साधना की थी और माना जाता है कि उन्हें यहीं आध्यात्मिक अनुभूतियां प्राप्त हुई थीं. इसी वजह से यह मंदिर सिर्फ धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि भक्ति, ध्यान और आध्यात्मिक चेतना का बड़ा केंद्र माना जाता है.
एक और खास परंपरा हुगली नदी में स्नान के बाद मां काली के दर्शन की है. बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहले नदी में आस्था की डुबकी लगाते हैं, फिर मंदिर में पूजा करते हैं. काली पूजा और दुर्गा पूजा के दौरान यहां लाखों भक्त पहुंचते हैं.




