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Ajeet Bharti ने Chandrashekhar Azad को ऐसा क्या कह दिया, जो SC-ST Act में दर्ज हो गई FIR? जानें अब क्या बोले इन्फ्लुएंसर

अजीत भारती के एक YouTube कार्यक्रम में चंद्रशेखर आजाद और उनकी जाति को लेकर कथित आपत्तिजनक टिप्पणियों के बाद दिल्ली पुलिस ने SC/ST Act समेत कई धाराओं में FIR दर्ज की है. वहीं, भारती ने जातिसूचक शब्द इस्तेमाल करने से इनकार करते हुए FIR को दबाव में दर्ज बताया और कहा कि मामला अदालत में नहीं टिकेगा.

Ajeet Bharti  Chandrashekhar Azad
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Chandrashekhar Azad और Ajeet Bharti

( Image Source:  X.com/Politicx2029 )

दिल्ली पुलिस ने इन्फ्लुएंसर और आरक्षण सुधार की मांग से जुड़े कार्यकर्ता अजीत भारती के खिलाफ SC/ST (Prevention of Atrocities) Act समेत कई धाराओं में FIR दर्ज की है. यह मामला आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के प्रमुख और नगीना सांसद चंद्रशेखर आजाद से जुड़ी कथित आपत्तिजनक और जातिसूचक टिप्पणियों को लेकर सामने आया है. FIR दिल्ली के नॉर्थ एवेन्यू थाने में आजाद समाज पार्टी की दिल्ली इकाई के अध्यक्ष की शिकायत पर दर्ज की गई.

विवाद की शुरुआत 22 अगस्त के अजीत भारती के YouTube कार्यक्रम से बताई जा रही है. कार्यक्रम का नाम 'SB79: Reservation Hatao Andolan Nautanki & More | Saptahik Bakaiti' था. शिकायत के मुताबिक, कार्यक्रम के दौरान लाइव चैट में एक कमेंट आया, जिसमें अजीत भारती की बहन की शादी चंद्रशेखर आजाद से कराने की बात कही गई थी.

इस कमेंट के जवाब में भारती ने कहा कि वह अपनी बहन की शादी 'Chandrashekhar जैसे मूर्ख' से नहीं करेंगे. इसके बाद उन्होंने 'चमार' शब्द का इस्तेमाल किया और चंद्रशेखर आजाद के रूप-रंग को लेकर भी कथित तौर पर आपत्तिजनक टिप्पणी की. उन्होंने कहा कि चंद्रशेखर 'थूकने लायक भी नहीं था.”

इसके बाद भारती ने कमेंट करने वाले व्यक्ति की बहन और मां को लेकर कई यौन रूप से आपत्तिजनक और गाली-गलौज वाली टिप्पणियां कीं. उन्होंने डॉ. बीआर आंबेडकर की शादी का भी जिक्र किया और कहा कि आंबेडकर ने बिना आरक्षण के अपनी डिग्रियां हासिल की थीं. शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि इस दौरान जातिसूचक और अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल किया गया, महिलाओं के खिलाफ आपत्तिजनक बातें कहीं गईं और धमकी भी दी गई.

किन धाराओं में दर्ज हुआ मामला?

अजीत भारती के खिलाफ SC/ST (Prevention of Atrocities) Act, भारतीय न्याय संहिता (BNS) और IT Act की धारा 67 के तहत मामला दर्ज किया गया है. SC/ST Act अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लोगों के खिलाफ जाति आधारित अपमान, उत्पीड़न, हिंसा और भेदभाव जैसे मामलों से निपटने के लिए बनाया गया एक कड़ा कानून है. इस कानून की कई धाराओं में जमानत से जुड़े प्रावधान सामान्य मामलों की तुलना में अधिक सख्त हो सकते हैं. हालांकि, FIR दर्ज होना किसी व्यक्ति को दोषी साबित नहीं करता. आरोपों की जांच पुलिस करेगी और अंततः अदालत ही तय करेगी कि कथित टिप्पणियां संबंधित कानूनों के तहत अपराध बनती हैं या नहीं.

अजीत भारती ने आरोपों से किया इनकार

FIR के बाद अजीत भारती ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपना पक्ष रखा. उन्होंने कहा कि उनकी टिप्पणी एक ऐसे कमेंट के जवाब में आई थी, जिसमें उनकी मां और बहन को लेकर आपत्तिजनक बात कही गई थी. भारती ने दावा किया कि उन्होंने चंद्रशेखर आजाद के खिलाफ कोई जातिसूचक शब्द इस्तेमाल नहीं किया और कहा कि संबंधित वीडियो में यह स्पष्ट है. उन्होंने FIR को 'pressure-driven' बताया और दावा किया कि आजाद समाज पार्टी के सदस्यों ने पुलिस पर दबाव डालकर आधी रात में FIR दर्ज कराई.

भारती ने यह भी कहा कि वह पुलिस की जांच में सहयोग करेंगे, लेकिन उनका दावा है कि यह मामला अदालत में 'दो मिनट भी नहीं टिकेगा' और कोई भी धारा कायम नहीं रहेगी. उनके इन आरोपों पर दिल्ली पुलिस या आजाद समाज पार्टी की ओर से तत्काल कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई.

अजीत भारती क्यों सुर्खियों में हैं?

  • अजीत भारती पिछले कुछ समय से जाति आधारित आरक्षण व्यवस्था में बदलाव की मांग करने वाले ऑनलाइन अभियानों में सक्रिय रहे हैं.
  • वह Reservation Reform Andolan से जुड़े कार्यक्रमों में भी शामिल हुए हैं.
  • 21 अगस्त को नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन में उन्होंने भी भाषण दिया था.
  • इस आंदोलन में प्रदर्शनकारी आरक्षण व्यवस्था के प्रभाव का मूल्यांकन करने के लिए सरकार से श्वेत पत्र, आरक्षण में सब-कैटेगरी और क्रीमी लेयर जैसे मुद्दों पर चर्चा की मांग कर रहे हैं.
  • आंदोलन से जुड़े लोगों का तर्क है कि आरक्षण का लाभ आर्थिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए भी तय किया जाना चाहिए.
  • इसी मुद्दे को लेकर देश के अलग-अलग हिस्सों में राजनीतिक और सामाजिक बहस तेज हुई है.
  • नगीना सांसद चंद्रशेखर आजाद की आजाद समाज पार्टी आरक्षण सुधार आंदोलन की मांगों की आलोचना करने वाली राजनीतिक आवाजों में शामिल रही है. वहीं NDA के सहयोगी और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने भी आरक्षण के समर्थन में कहा था कि “आरक्षण कोई खैरात नहीं है.”

FIR के बाद तेज हुई राजनीतिक बहस

अजीत भारती के खिलाफ FIR के बाद एक्टिविस्ट तहसीन पूनावाला ने भी उनका समर्थन किया. X पर उन्होंने कहा कि अजीत भारती से कोई सहमत हो या असहमत, उनके साथ खड़ा होना जरूरी है. पूनावाला ने आरोप लगाया कि कुछ प्रदर्शनकारियों पर पुलिसकर्मियों के खिलाफ हिंसा के बावजूद कार्रवाई नहीं हुई, जबकि भारती के खिलाफ FIR दर्ज कर दी गई. हालांकि, ये आरोप भी संबंधित पक्षों के दावों का हिस्सा हैं और इनके संबंध में आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है.

अब आगे क्या होगा?

अजीत भारती के खिलाफ दर्ज FIR ने आरक्षण सुधार आंदोलन, सोशल मीडिया पर राजनीतिक बयानबाजी और SC/ST Act के इस्तेमाल को लेकर नई बहस छेड़ दी है. फिलहाल मामला पुलिस जांच के चरण में है. भारती का कहना है कि उनकी टिप्पणियां कथित उकसावे के जवाब में थीं और उन्होंने जातिसूचक टिप्पणी नहीं की. दूसरी तरफ शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि उनके बयान जातिगत रूप से अपमानजनक और कानून के तहत दंडनीय हैं.

अब जांच में यह तय होना महत्वपूर्ण होगा कि वीडियो में कही गई पूरी बात किस संदर्भ में कही गई, संबंधित शब्दों और टिप्पणियों का कानूनी अर्थ क्या बनता है और क्या वे SC/ST Act तथा अन्य धाराओं के तहत अपराध की कानूनी कसौटी पर खरी उतरती हैं.

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