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कांग्रेसियों की टॉपलेस हरकत के पीछे खुराफाती दिमाग कौन? फंडिंग करने वालों को भी दबोचेगी दिल्‍ली पुलिस

नई दिल्ली में AI समिट के दौरान शर्टलेस प्रोटेस्ट करने वाले 4 यूथ कांग्रेस नेताओं को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया. पुलिस ने इस घटना को नेपाल के Gen Z जैसे प्रोटेस्ट से प्रेरित और साजिश की आशंका जताई हैं. फंडिंग और प्लानिंग की भी जांच जारी है.

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देश की सियासत एक बार फिर उस मोड़ पर खड़ी है, जहां मुद्दा सिर्फ विरोध का नहीं, बल्कि विरोध के तरीके बन गए हैं. कांग्रेस की 'टॉपलेस प्रोटेस्ट' को लेकर उठे विवाद ने राजनीतिक गलियारों से लेकर सोशल मीडिया तक हलचल है. सवाल यह है कि क्या यह महज एक स्वतःस्फूर्त प्रदर्शन था, या इसके पीछे किसी सुनियोजित रणनीति और फंडिंग का नेटवर्क काम कर रहा है? पुलिस का दावा है कि यह विरोध नेपाल में हुए Gen Z आंदोलनों से प्रेरित है. साथ ही अदालत से कहा कि इसके पीछे “गहरी साजिश” हो सकती है. दिल्ली पुलिस ने इस मामले में जिन यूथ कांग्रेस के पदाधिकारियों को गिरफ्तार किया उनमें ये चार को अदालत ने शनिवार को पुलिस की कस्टडी में भेज दिया.

कोर्ट में क्या हुआ?

पटियाला हाउस कोर्ट में पेशी के दौरान पुलिस ने आरोपियों की 5 दिन की कस्टडी मांगी. कोर्ट ने फिलहाल 5 दिन की पुलिस कस्टडी दी. जबकि बेल और कस्टडी पर अंतिम आदेश सुरक्षित रख लिया. पुलिस ने अदालत से कहा कि यह मामला “साधारण विरोध नहीं, साजिश” है.

कौन हैं गिरफ्तार 4 नेता?

सभी गिरफ्तार लोग यूथ कांग्रेस के जुड़े हैं और जिम्मेदारी वाले पदों पर हैं. पुलिस ने लोगों की पहचान नरसिम्हा यादव - नेशनल कोऑर्डिनेटर यूथ कांग्रेस, कृष्णा हरि - राष्ट्रीय सचिव यूथ कांग्रेस, कुंदन यादव - बिहार स्टेट सचिव यूथ कांग्रेस और अजय कुमार - यूपी वाइस प्रेसिडेंट यूथ कांग्रेस के रूप में की है. खास बात यह है कि ये सभी सामान्य कार्यकर्ता नहीं, बल्कि संगठन के पदाधिकारी बताए जा रहे हैं.

पुलिस के आरोप क्या हैं?

दिल्ली पुलिस के मुताबिक नेपाल जैसे प्रोटेस्ट से प्रेरित होकर प्रदर्शन, देश की अंतरराष्ट्रीय छवि खराब करने की साजिश और सरकारी कर्मचारियों पर हमला है. इसके अलावा, प्रदर्शनकारियों ने बिना अनुमति इकट्ठा हुए और आदेशों का उल्लंघन की. जहां तक मोबाइल फोन और फंडिंग की बात है तो उसकी जांच जारी है. लिस ने अदालत को बताया कि प्रोटेस्ट के दौरान 3 पुलिसकर्मी घायल हुए हैं. इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की कई धाराओं में FIR दर्ज की गई है.

बचाव पक्ष की दलील क्या?

आरोपियों के वकील ने कोर्ट में कहा कि यह राजनीतिक बदले की कार्रवाई है. प्रदर्शन लोकतांत्रिक अधिकार का हिस्सा है. विपक्ष से जुड़े होने के कारण टारगेट किया जा रहा है.

‘नेपाल कनेक्शन’ क्या है?

पुलिस ने दावा किया कि यह प्रदर्शन नेपाल में हुए हालिया Gen-Z स्टाइल प्रोटेस्ट से प्रेरित था, जहां प्रतीकात्मक और आक्रामक तरीके से विरोध दर्ज कराया गया था. हालांकि, इस कनेक्शन की स्वतंत्र पुष्टि अभी जांच के बाद ही संभव होगी.

अहम सवाल: किसके इशारे पर हुआ प्रोटेस्ट?

यह मामला कई बड़े सवाल खड़े करता है कि क्या प्रदर्शन पहले से प्लान किया गया था? क्या किसी बड़े नेता या संगठन का निर्देश था? फंडिंग कहां से आई?

क्या अंतरराष्ट्रीय मंच को जानबूझकर चुना गया?

फिलहाल कांग्रेस का कहना है कि यह “युवाओं की स्वतः प्रतिक्रिया” थी, जबकि बीजेपी इसे साजिश बता रही है.

जांच में आगे क्या?

पुलिस अब मोबाइल डेटा और कॉल रिकॉर्ड, संभावित फंडिंग स्रोत, अन्य शामिल लोगों की पहचान और वीडियो और घटनाक्रम की टाइमलाइन की जांच कर रही है. दरअसल, AI समिट का यह विवाद अब केवल प्रदर्शन नहीं, बल्कि कानूनी जांच और राजनीतिक टकराव का बड़ा मामला बन चुका है. आने वाले दिनों में जांच के निष्कर्ष तय करेंगे कि यह स्वतःस्फूर्त विरोध था या सुनियोजित रणनीति.

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