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यूक्रेन के खिलाफ रूस के लिए लड़ते हुए मारे गए कितने भारतीय, सरकार ने बताए नंबर, क्या मर्जी से लड़ी जंग?

रूस-यूक्रेन युद्ध में भारतीय नागरिकों की मौत का मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है. केंद्र सरकार ने अदालत को बताया कि रूस के लिए लड़ते हुए 10 भारतीयों की जान जा चुकी है.

यूक्रेन के खिलाफ रूस के लिए लड़ते हुए मारे गए कितने भारतीय, सरकार ने बताए नंबर, क्या मर्जी से लड़ी जंग?
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( Image Source:  ANI )
हेमा पंत
Edited By: हेमा पंत4 Mins Read

Published on: 25 April 2026 12:27 PM

रूस और यूक्रेन के बीच चल रही जंग में भारतीय नागरिकों के शामिल होने का मामला अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है. केंद्र सरकार ने अदालत को बताया है कि रूस जाकर युद्ध में शामिल हुए 10 भारतीयों की मौत हो चुकी है. सरकार के मुताबिक, ज्यादातर लोगों ने रूसी सेना के साथ कॉन्ट्रैक्ट के आधार पर अपनी मर्जी से काम किया था, हालांकि कुछ मामलों में लोगों को नौकरी का झांसा देकर फंसाए जाने की आशंका भी जताई गई है.

इस मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट की एक बेंच कर रही है, जिसमें परिवारों ने आरोप लगाया है कि उनके रिश्तेदारों को रूस में नौकरी दिलाने के नाम पर भेजा गया और बाद में उन्हें युद्ध में शामिल होने के लिए मजबूर किया गया.

सुप्रीम कोर्ट में क्या बोली केंद्र सरकार?

सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने अदालत को बताया कि याचिका में जिन 26 भारतीयों का जिक्र है, उनमें से 10 की मौत हो चुकी है. उन्होंने कहा कि विदेश मंत्रालय लगातार इन परिवारों के संपर्क में है और मामले को सुलझाने के लिए कई लेवल पर काम किया जा रहा है. सरकार ने यह भी कहा कि कई भारतीय रूस की सेना में अपनी मर्जी से शामिल हुए थे. हालांकि, कुछ एजेंटों ने लोगों को गुमराह किया हो, ऐसी संभावना से भी इनकार नहीं किया गया.

नौकरी की तलाश में गए थे कई भारतीय

याचिका दायर करने वाले परिवारों का कहना है कि उनके रिश्तेदार नौकरी की तलाश में रूस गए थे. वहां उन्हें अलग-अलग तरह के काम का वादा किया गया, लेकिन बाद में उन्हें युद्ध क्षेत्र में भेज दिया गया. परिवारों ने आरोप लगाया कि उनके लोगों को युद्ध में लड़ने के लिए मजबूर किया गया और सरकार की तरफ से समय पर मदद नहीं मिली.

विदेश मंत्रालय और परिवारों के बीच आरोप-प्रत्यारोप

सुनवाई के दौरान परिवारों के वकील ने कहा कि विदेश मंत्रालय ने उनसे ठीक से कॉन्टैक्ट नहीं किया और पिछले कई महीनों में भेजे गए करीब 120 पत्रों का संतोषजनक जवाब नहीं मिला. वहीं सरकार की ओर से कहा गया कि मंत्रालय लगातार परिवारों से बातचीत कर रहा है. सरकार ने यह भी दावा किया कि मृतकों के शव भारत लाने की कोशिश की गई, लेकिन कुछ मामलों में परिवारों की ओर से सहयोग नहीं मिला.

युद्ध क्षेत्र से शव लाना बेहद मुश्किल

सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि युद्ध क्षेत्र से किसी का शव वापस लाना बेहद मुश्किल काम होता है. अदालत ने माना कि ऐसे मामलों को बहुत सावधानी और संवेदनशीलता से संभालने की जरूरत है. सरकार ने अदालत को बताया कि करीब 215 भारतीय रूस गए थे, जिनमें से 26 परिवारों ने अदालत का दरवाजा खटखटाया है.

अब विदेश मंत्रालय देगा रिपोर्ट

मामले की गंभीरता को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने विदेश मंत्रालय को निर्देश दिया है कि वह इस पूरे मामले पर विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करे. अदालत जानना चाहती है कि सरकार ने भारतीय नागरिकों की मदद और उन्हें वापस लाने के लिए अब तक क्या कदम उठाए हैं.

क्यों बढ़ रही है चिंता?

रूस-यूक्रेन युद्ध लंबे समय से जारी है और इसमें विदेशी नागरिकों के शामिल होने की खबरें लगातार सामने आती रही हैं. भारत में भी इस मामले ने चिंता बढ़ा दी है, क्योंकि कई युवा बेहतर नौकरी और कमाई के सपने लेकर विदेश जाते हैं, लेकिन गलत एजेंटों के जाल में फंस जाते हैं. अब सबकी नजर सुप्रीम कोर्ट और केंद्र सरकार की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई है.

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