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क्या है बीने मनेशे समुदाय, जो भारत छोड़ जा रहा है इजराइल, वहां जाकर क्यों करना होगा धर्म परिवर्तन?

पूर्वोत्तर भारत के बीने मनेशे समुदाय के 250 लोग इजरायल पहुंचे. “ऑपरेशन विंग्स ऑफ डॉन” के तहत हजारों लोगों के पुनर्वास की योजना, जानें कौन है यह समुदाय और पूरा मामला.

क्या है बीने मनेशे समुदाय, जो भारत छोड़ जा रहा है इजराइल, वहां जाकर क्यों करना होगा धर्म परिवर्तन?
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( Image Source:  AI GENERATED IMAGE- GEMINI )

Monash Community: इजरायल ने भारत के पूर्वोत्तर राज्यों से जुड़े बीने मनेशे समुदाय के पुनर्वास अभियान की शुरुआत कर दी है. इसी कड़ी में करीब 250 लोग इजरायल पहुंच चुके हैं. यह कदम उस योजना का हिस्सा है, जिसके तहत इजरायल सरकार ने पिछले साल भारत में रह रहे यहूदियों को अपने देश लाने की घोषणा की थी.

नवंबर में सरकार ने अगले पांच सालों में हजारों लोगों के आव्रजन के लिए आर्थिक मदद देने का वादा भी किया था. मनेशे समुदाय के लोग कौन होते हैं और वह इजराइल क्यों जा रहे हैं, आइये जानते हैं पूरी डिटेल.

कौन होते हैं मनेशे समुदाय के लोग?

मणिपुर और मिजोरम के कुछ इलाकों में रहने वाला बीने मनेशे समुदाय खुद को बाइबिल में वर्णित मनेशे कबीले का वंशज मानता है. 1990 के दशक से इस समुदाय के लोग धीरे-धीरे इजरायल की ओर जा रहे हैं. अब तक करीब 4,000 सदस्य वहां बस चुके हैं, जबकि लगभग 6,000 लोग अब भी इजरायल जाने का इंतजार कर रहे हैं.

इतिहास के मुताबिक, यह समुदाय समय के साथ फारस, अफगानिस्तान, तिब्बत और चीन जैसे इलाकों तक पहुंचा और उन्होंने कुछ यहूदी परंपराओं को बनाए रखा, जिनमें खतना भी शामिल है. एक यहूदी एजेंसी के अनुसार, भारत में मिशनरियों के प्रभाव से इनमें से कई लोग ईसाई धर्म अपना चुके थे, और इजरायल की नागरिकता पाने के लिए उन्हें धर्मांतरण की प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है.

क्या इजराइल सरकार उठा रही है कोई कदम?

इजरायल सरकार ने 'ऑपरेशन विंग्स ऑफ डॉन' नाम से एक विशेष अभियान चलाया है, जिसके तहत 2026 के दौरान 1,200 और लोगों को इजरायल लाने की योजना है. अलिया और इंटीग्रेशन मंत्रालय के मुताबिक, अगले दो हफ्तों में इस प्रक्रिया के तहत दो और फ्लाइट्स तय की गई हैं. इस पूरे कार्यक्रम के लिए लगभग नौ करोड़ शेकेल, यानी करीब तीन करोड़ अमेरिकी डॉलर का बजट रखा गया है.

बीने मनेशे समुदाय की पहचान को लेकर पहले भी काफी चर्चा और विवाद रहा है. साल 2005 में सेफारदी समुदाय के मुख्य रब्बी श्लोमो अमर ने इन्हें 'इजराइल के वंशज' के रूप में मान्यता दी थी, जिससे इनके इजरायल में बसने का रास्ता साफ हुआ था. समुदाय का कहना है कि वे उन दस कबीलों में शामिल मनेशे कबीले से जुड़े हैं, जिन्हें करीब 2,700 साल पहले निर्वासित किया गया था.

क्या था इजराइल के गठन का मकसद?

इजरायल का गठन ही दुनिया भर के यहूदियों को एक स्थान पर बसाने के उद्देश्य से हुआ था. यही वजह है कि सरकार अलग-अलग देशों में रहने वाले यहूदियों को वापस बुलाने के लिए लगातार योजनाएं चला रही है. द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान हिटलर के खौफ से बड़ी संख्या में यहूदियों ने विभिन्न देशों में पलायन किया था, जिसके बाद उन्हें इजरायल में बसाने के प्रयास लगातार जारी हैं.

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