27 साल की उम्र में गोलियों से भून दिए गए थे पंजाब के रॉकस्टार Amar Singh Chamkila, श्रीदेवी का भी ठुकराया था ऑफर
पंजाब के मशहूर सिंगर अमर सिंह चमकीला ने अपने बोल्ड और ग्रामीण जीवन से जुड़े गानों से कम उम्र में ही जबरदस्त लोकप्रियता हासिल कर ली थी. लेकिन 1988 में 27 साल की उम्र में उनकी दिनदहाड़े हत्या कर दी गई, जिसका राज आज तक नहीं खुल पाया.
पंजाब के असली रॉकस्टार कहे जाने वाले अमर सिंह चमकीला (Amar Singh Chamkila) की कहानी बड़े पर्दे पर नजर आई. इम्तियाज अली के निर्देशन में बनी दिलजीत दोसांझ और परिणीति चोपड़ा स्टारर फिल्म 'अमर सिंह चमकीला' साल 2024 में नेटफ्लिक्स पर आई. जिसे न सिर्फ ओटीटी फैंस ने पसंद किया बल्कि क्रिटिक्स ने भी खूब सराहा. इसमें दिखाया गया है कि कैसे चमकीला ने कम उम्र में संगीत की दुनिया में धमाल मचाया और महज 27 साल की उम्र में उनकी हत्या कर दी गई. आइए जानते हैं असल जिंदगी में अमर सिंह चमकीला कौन थे?.
पंजाब की मिट्टी से निकले चमकीला
अमर सिंह चमकीला का जन्म 21 जुलाई 1960 को पंजाब के लुधियाना के पास गांव डुगरी में एक गरीब दलित सिख परिवार में हुआ था. उनका असली नाम धनी राम था. बचपन से ही उन्हें संगीत और कविता का शौक था, लेकिन आर्थिक तंगी के कारण उन्होंने इलेक्ट्रीशियन बनने का सपना छोड़ दिया और एक कपड़ा मिल में मजदूरी शुरू कर दी. नौकरी के साथ-साथ वह गाने लिखते रहते थे.
20 साल की उम्र में मिली शोहरत
18 साल की उम्र में उन्होंने दिवंगत सिंगर सुरिंदर शिंदा के लिए गाने लिखने शुरू किए. फिर खुद गाना शुरू किया. कुछ ही समय में उनके बोल्ड और गांव की जिंदगी से जुड़े गानों ने पूरे पंजाब में तहलका मचा दिया. महज 20 साल की उम्र में वह पंजाब के सबसे बड़े स्टार बन गए और उन्हें 'पंजाब का एल्विस प्रेस्ली' कहा जाने लगा. वह उस दौर के सबसे ज्यादा रिकॉर्ड बेचने वाले आर्टिस्ट थे.
गानों पर आपत्ति और विवाद
चमकीला की सफलता के शिखर पर पहुंचते ही उनके कुछ गानों पर विरोध शुरू हो गया. पंजाब के गांवों में लोग कहते थे कि उनके गाने महिलाओं के बारे में भद्दी बातें करते हैं, शराब और घरेलू हिंसा जैसे मुद्दों पर खुलकर बोलते हैं. कई जगहों पर उनका विरोध हुआ, लेकिन उनकी लोकप्रियता कम नहीं हुई. जो कुछ इस तरह रहे:
1.'सिखर दुपेहर नहुंडी सी'- इसे उनके सबसे अश्लील और विवादित गानों में गिना जाता है. इसमें कामुकता और ग्रामीण जीवन के बोल्ड एंगल्स हैं, जो सुनने वालों को चौंकाते थे.
2. 'तेरा देओर सिरे दा वेली'- यह गाना देवर और भाभी के बीच अवैध संबंध पर आधारित है. लिरिक्स जैसे 'तेरा देओर सिरे दा वेली' काफी डायरेक्ट और उकसाने वाला माने जाते थे.
3. 'बापू साडा गुम हो गया'- इसमें एक आदमी अपनी प्रेमिका की मां के साथ अफेयर चलाने वाले बाप की तलाश की बात है. लाइनें जैसे 'बापू साडा खो गया, तेरी मां दी तलाशी लेनी' बेहद कंट्रोवर्शियल थीं.
4. 'मार ला होर त्राई वे इक वारी जीजा'- साली-जीजा के रिश्ते पर आधारित, जिसमें सेक्सुअल इनुएंडो भरपूर हैं. यह गाना भी काफी बोल्ड था और विरोध का कारण बना.
5. 'अट्टे वांगु गुं दिति बेगानी पुत ने'- इसमें भी दोहरे अर्थ और कामुकता की बातें हैं, जो समाज में छिपे डिजायर्स को उजागर करती हैं.
6. 'छड्डे जेठ'- शादीशुदा औरत और उसके जेठ के अफेयर की कहानी. लिरिक्स जैसे 'तेरे छड्डे जेठ दे भाग खुले'
7. 'मित्रां मैं खंड बन गई'- दोस्तों के बीच जेलेसीऔर अफेयर की थीम, जो उस समय के समाज में टैबू थी.
एक अनसुना किस्सा: श्रीदेवी का ऑफर ठुकराया
चमकीला की शोहरत इतनी बढ़ गई थी कि बॉलीवुड की मशहूर एक्ट्रेस श्रीदेवी ने उनसे फिल्म में साथ काम करने का ऑफर दिया था. लेकिन चमकीला ने इसे दो बार ठुकरा दिया. वजह? वह कहते थे कि उन्हें हिंदी अच्छे से नहीं आती, इसलिए वह फिल्म में काम नहीं कर पाएंगे. यह किस्सा उनकी सादगी और अपनी जड़ों से जुड़े रहने का सबूत है, क्योंकि वह कभी भी अपनी पंजाबी पहचान से समझौता नहीं करना चाहते थे.
वो मनहूस दिन
8 मार्च 1988 का वह काला दिन था, जब दिनदहाड़े हमलावरों ने चमकीला की हत्या कर दी. वह अपनी दूसरी पत्नी अमरजोत जो उनकी ड्यूएट पार्टनर भी थी और बैंड मेंबर्स के साथ पंजाब के मेहसामपुर में परफॉर्मेंस के लिए अपनी सफेद एम्बेसडर कार से निकले थे. जैसे ही वे कार से उतरे, बाइक सवार हमलावरों ने उन पर कई राउंड फायरिंग कर दी. चमकीला, अमरजोत और उनके दो बैंड मेंबर्स की मौके पर ही मौत हो गई. उनकी मौत को आज 38 साल हो गए है, लेकिन आज तक हत्यारों का पता नहीं चल पाया है. कई थ्योरी है कुछ कहते हैं खालिस्तानी मिलिटेंट्स ने उनके विवादित गानों के कारण मारा, तो कुछ का मानना है कि जलन या अन्य वजहें थी लेकिन मामला आज भी अनसुलझा है.




