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पैसे और नेटवर्किंग की ताकत बोलती है! 13वें Grammy नॉमिनेशन के बाद भी ट्रॉफी नहीं जीत पाईं Anoushka Shankar

ग्रैमी अवॉर्ड्स 2026 में भारत के कई प्रतिभाशाली कलाकारों को नॉमिनेशन तो मिला, लेकिन कोई भी ट्रॉफी नहीं जीत सका. मशहूर सितार वादक अनुष्का शंकर को उनके एल्बम Chapter III: We Return to Light और गाने Daybreak के लिए दो कैटेगरी में नॉमिनेशन मिला था. यह उनके 12वें और 13वें ग्रैमी नॉमिनेशन थे. हालांकि अनुष्का ने इस बार अवॉर्ड सेरेमनी में शामिल न होकर भारत में टूर करना चुना.

पैसे और नेटवर्किंग की ताकत बोलती है! 13वें Grammy नॉमिनेशन के बाद भी ट्रॉफी नहीं जीत पाईं Anoushka Shankar
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( Image Source:  Instagram: anoushkashankarofficial )
रूपाली राय
Edited By: रूपाली राय

Published on: 2 Feb 2026 12:01 PM

ग्रैमी अवॉर्ड्स 2026 के अवार्ड फक्शन में भारत के कई टैलेंटेड कलाकारों को नॉमिनेशन तो मिले, लेकिन अफसोस कि कोई भी जीत नहीं मिल पाई. विभिन्न स्टाइल और अलग-अलग पीढ़ियों के कलाकारों ने कोशिश की, फिर भी शाम को भारत खाली हाथ रहा. इसमें अनुष्का शंकर भी शामिल थी वे मशहूर सितार वादक हैं और पंडित रवि शंकर की बेटी हैं. अनुष्का को इस बार दो कैटेगरी में नॉमिनेशन मिले थे उनके हालिया एल्बम 'Chapter III: We Return to Light' के लिए, जिसमें उन्होंने आलम खान और सारथी कोरवार के साथ मिलकर काम किया था. यह Best Global Music Album कैटेगरी में था. एल्बम के मुख्य गाने 'Daybreak' के लिए, जो Best Global Music Performance कैटेगरी में नॉमिनेटेड था.

ये उनके कुल 12वें और 13वें ग्रैमी नॉमिनेशन थे, जो बहुत बड़ी अचीवमेंट है. लेकिन जीत किसी और को मिल गई (जैसे 'Daybreak' के लिए Bad Bunny जीते. इसके अलावा अन्य भारतीय कलाकार भी नॉमिनेट थे, जैसे मदुरै की पियानोवादक चारू सूरी, इंडो-जैज़ ग्रुप शक्ति, और 'Sounds of Kumbh' के लिए सिद्धांत भाटिया का पहला नाम शामिल था. लेकिन सबके नॉमिनेशन बेकार चले गए, कोई ट्रॉफी नहीं मिली.

क्यों शामिल नहीं हुईं अनुष्का शंकर

अनुष्का शंकर ने इस बारे में अपने इंस्टाग्राम पर खुलकर बात की. वे इस साल ग्रैमी अवार्ड में नहीं गईं. वे अभी भारत में अपने टूर पर हैं और मुंबई जैसे शहरों में परफॉर्म कर रही हैं. उन्होंने लिखा कि कभी-कभी ग्रैमी में जाने, वहां हिस्सा लेने, ऑउटफिट चुनने, रेड कार्पेट पर जाने, मार्केटिंग करने और जीतने की उम्मीद जगाने में बहुत पैसा और मेहनत लगती है. लेकिन कई बार बड़े मेनस्ट्रीम के कलाकार आ जाते हैं, जिनके पास ज्यादा पैसे और नेटवर्किंग की ताकत होती है. वे महीनों से लोगों से मिलते-जुलते हैं, इवेंट्स में जाते हैं, ताकि उनके गाने वोटर्स तक पहुंचे.

ये कड़वाहट नहीं है

अनुष्का ने पोस्ट में आगे कहा कि वे यह बात कड़वाहट से नहीं कह रही हैं, बल्कि असली हकीकत बता रही हैं. अगर वे पहली बार जीत जातीं तो अच्छा लगता, लेकिन गहराई से देखें तो इसका बहुत ज्यादा महत्व नहीं है. उन्होंने अपनी मेंटल हेल्थ का भी ख्याल रखा और भारत में रहकर संगीत बजाने को ज्यादा बेहतर समझा, बजाय उस पूरे तनाव और दबाव के.'

कौन हैं अनुष्का शंकर

अनुष्का शंकर एक बहुत बड़ी और सम्मानित कलाकार हैं. वे 9 जून 1981 को लंदन में पैदा हुईं. बचपन से ही अपने पिता रवि शंकर से सितार सीखा और 13 साल की उम्र में प्रोफेशनल डेब्यू किया. वे भारतीय शास्त्रीय संगीत की जड़ों में गहरी हैं, लेकिन जैज़, इलेक्ट्रॉनिक, फ्लेमेंको और वेस्टर्न म्यूजिक के साथ भी प्रयोग करती हैं. अब तक उन्हें 13-14 ग्रैमी नॉमिनेशन मिल चुके हैं बता दें कि, भारतीय मूल की पहली महिला जिन्हें इतने मिले और वे दुनिया भर में टूर करती हैं. वे एक्टिविस्ट भी हैं और कई पुरस्कार जीत चुकी हैं. उनकी म्यूजिक में भारतीय संस्कृति की गहराई और आधुनिक टच दोनों दिखते हैं.

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