Begin typing your search...

बॉलीवुड दोगलेपन से भरी पड़ी है! Shekhar Suman का बड़ा हमला, बोले- फिल्मों से लेकर गाने सब चोरी का

वेब सीरीज 'पिरामिड' को लेकर चर्चा में चल रहे शेखर सुमन ने बॉलीवुड के बदलते माहौल पर अपनी बेबाक राय रखी. उन्होंने कहा कि पहले कलाकार और निर्माता भरोसे के रिश्ते में काम करते थे, जबकि आज नकल और कॉन्ट्रैक्ट संस्कृति हावी होती जा रही है.

बॉलीवुड दोगलेपन से भरी पड़ी है! Shekhar Suman का बड़ा हमला, बोले- फिल्मों से लेकर गाने सब चोरी का
X
( Image Source:  ANI )

एक्टर और टीवी होस्ट शेखर सुमन (Shekhar Suman) इन दिनों अपनी वेब सीरीज पिरामिड को लेकर चर्चा में हैं. हाल ही में उन्होंने एक इंटरव्यू में बॉलीवुड के बदलते दौर पर खुलकर अपनी राय रखी. उन्होंने पुराने समय के फिल्मी सितारों और आज के कलाकारों की वर्कस्टाइल की तुलना करते हुए कहा कि पहले इंडस्ट्री में रिश्तों, भरोसे और ईमानदारी की ज्यादा अहमियत थी, जबकि आज हालात काफी बदल चुके हैं. एक बातचीत के दौरान जब शेखर सुमन से पूछा गया कि क्या 70, 80 और 90 के दशक के कलाकार निर्माताओं के प्रति ज्यादा सहयोगी और काइंड हुआ करते थे, तो उन्होंने कई दिलचस्प बातें शेयर की.

पुराने दौर के सितारे निर्माताओं का रखते थे ख्याल

उन्होंने बताया कि उस दौर में भी बड़े सितारे अच्छी-खासी फीस लेते थे, लेकिन उनके और निर्माताओं के बीच एक अलग तरह का भरोसा और सम्मान हुआ करता था. शेखर के मुताबिक, दिग्गज स्टार दिलीप कुमार एक फिल्म के लिए लगभग 18 लाख रुपये फीस लेते थे, जो उस समय बहुत बड़ी रकम मानी जाती थी. वहीं धर्मेंद्र की फीस करीब 8 से 10 लाख रुपये के बीच होती थी. उन्होंने कहा कि अगर उस समय की रकम को आज के हिसाब से देखा जाए तो यह लगभग 80 से 100 करोड़ रुपये के बराबर हो सकती है. इसके बावजूद कलाकारों और निर्माताओं के रिश्तों में अपनापन था और कई बार परिस्थितियों के अनुसार सहयोग भी किया जाता था.

मोहम्मद रफी का उदाहरण देकर समझाई पुरानी सोच

शेखर सुमन ने पुराने दौर के कलाकारों की संवेदनशीलता का जिक्र करते हुए महान गायक मोहम्मद रफी का उदाहरण दिया. उन्होंने कहा कि कई बार ऐसा होता था कि किसी निर्माता के पास पैसे कम होते थे, तब रफी साहब बिना भुगतान लिए भी गाना गाने को तैयार हो जाते थे. शेखर के अनुसार, उस समय लोगों के बीच विश्वास इतना मजबूत था कि काम अक्सर केवल जुबान पर तय हो जाता था. आज की तरह लंबी-चौड़ी कानूनी शर्तें और भारी-भरकम कॉन्ट्रैक्ट नहीं होते थे. उनका मानना है कि उस दौर में लोगों की नीयत साफ थी और यही वजह थी कि इंडस्ट्री में एक अलग तरह का माहौल देखने को मिलता था.

आज के बॉलीवुड पर साधा निशाना

इंटरव्यू के दौरान शेखर सुमन ने मौजूदा फिल्म इंडस्ट्री को लेकर भी अपनी नाराजगी जाहिर की. उन्होंने कहा, 'ज़्यादातार प्रोजेक्ट्स चलाने वाले लोग हमारे इंडस्ट्री में घूम रहे हैं. जिस इंडस्ट्री का नाम दोगलेपन से भरा हो, बॉलीवुड, उस इंडस्ट्री का कुछ नहीं कर सकते. पहले तो आप अपनी ज़मीन ढूंढिए. हर चीज़ चोरी चकारी, कॉपीराइट, गाना उठाना. अब तो नेट पर इतनी फिल्में हैं कि चुराना और आसान हो गया है.' उनका कहना था कि आज फिल्मों, कहानियों और गानों में मौलिकता की कमी दिखाई देती है. उन्होंने प्लेजरिज्म पर भी कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि अब इंटरनेट पर इतनी ज्यादा फिल्में और कंटेंट अवेलेबल हैं कि नकल करना पहले से कहीं ज्यादा आसान हो गया है. शेखर ने कहा कि किसी भी इंडस्ट्री की असली ताकत उसकी मौलिक सोच और क्रिएटिविटी होती है. अगर लगातार दूसरे लोगों के काम की नकल की जाएगी तो नई और यादगार कहानियां सामने नहीं आ पाएंगी.

बदलते दौर में बदल गया काम करने का तरीका

शेखर सुमन का मानना है कि समय के साथ फिल्म इंडस्ट्री में कई बदलाव आए हैं. पहले जहां रिश्तों और भरोसे पर काम होता था, वहीं अब पेशेवर व्यवस्था और कानूनी प्रक्रियाएं ज्यादा जरुरी हो गई हैं. हालांकि वह यह भी मानते हैं कि हर दौर में कुछ अच्छे और कुछ बुरे उदाहरण मौजूद रहते हैं, इसलिए सभी लोगों को एक ही नजरिए से नहीं देखा जा सकता.

'पिरामिड' में नजर आ रहे हैं कई दमदार कलाकार

वर्कफ्रंट की बात करें तो शेखर सुमन इन दिनों वेब सीरीज पिरामिड में दिखाई दे रहे हैं. इस सीरीज में उनके साथ रणवीर शौरी, परमवीर सिंह चीमा, अल्फिया जाफरी, अंजन श्रीवास्तव, अखिलेंद्र मिश्रा, स्मिता बंसल, सुशांत सिंह और सोनल झा जैसे कलाकार भी अहम भूमिकाओं में नजर आ रहे हैं.

bollywood
अगला लेख