Rakhee Gulzar की सबसे बोल्ड फिल्म Paroma, 40 की उम्र में दिए इंटीमेंट सीन्स; 80s के दशक में बन गई थी सेंसेशन
राखी गुलजार की फिल्म ‘परोमा’ ने उस दौर में तहलका मचा दिया था, जब महिलाओं की इच्छाओं पर खुलकर बात करना भी समाज को मंजूर नहीं था. अपर्णा सेन की इस फिल्म ने शादीशुदा महिला की पहचान, अकेलेपन और भावनात्मक संघर्ष को बेहद साहसी अंदाज में दिखाया।
जब बात दिग्गज एक्ट्रेस राखी गुलज़ार (Rakee Gulzar) की आती है तो हम सबके दिमाग में 'शर्मीली' की कंचन, 'ब्लैकमेल' की आशा, 'कभी कभी' की पूजा और 'करण अर्जुन', 'डकैत' और 'दिल का रिश्ता' जैसी फिल्मों में नजर आई उनकी साफ सुथरी इमेज का ध्यान आता है. हिंदी फिल्मों में शायद ही किसी ने राखी को बोल्ड सीन करते हुए देखा होगा. राखी मजूमदार जो मशहूर स्क्रिप्टराइटर और शायर गुलज़ार से शादी करने के बाद राखी गुलज़ार कहलाई, ने हमेशा से सीधी-साधी मासूम अदायगी से अपना दिल जीता है. लेकिन राखी गुलज़ार की एक ऐसी फिल्म है जिसे शायद ही फैंस और दर्शकों ने देखा हो.
हम बात कर रहे है राखी की बंगाली फिल्म 'परोमा' की. अपर्णा सेन के डायरेक्शन में बनी यह फिल्म समय से आगे की ऐसी कहानी को दिखाती है, जब शादीशुदा महिलाओं का एक्सट्ररा मैरिटल रिलेशन होना सिर्फ बड़ी बात नहीं बल्कि सामाजिक तौर पर सबसे बड़े गुनाह और पाप की नजर से देखा जाता था, हां वो बात अलग है कि पति बाहर रहते हुए कई रिश्ते रख सकते थे इससे समाज या उनकी पत्नियों को कोई फर्क नहीं पड़ना चाहिए. लेकिन 'परोमा' महिलाओं के दायरों की वो बेड़िया तोड़ती है जो उस दौर में कोई सोच भी नहीं सकता था.
समाज को झकझोर देने वाली फिल्म
80 के दशक का भारतीय सिनेमा ज्यादातर पारिवारिक कहानियों, प्रेम कहानियों और हीरो-हीरोइन के पारंपरिक किरदारों के इर्द-गिर्द घूमता था. उस दौर में महिलाओं को फिल्मों में अक्सर त्यागमयी पत्नी, मां या फिर प्रेमिका के रूप में दिखाया जाता था. लेकिन इसी समय एक ऐसी फिल्म आई जिसने समाज की सोच को झकझोर दिया. यह फिल्म साल 1984 में रिलीज हुई, इस फिल्म में राखी गुलजार ने मुख्य भूमिका निभाई थी. यह फिल्म उस समय की सबसे बोल्ड और संवेदनशील फिल्मों में गिनी जाती है. हालांकि इसमें बोल्डनेस केवल शारीरिक नहीं थी, बल्कि इसके विचार बेहद साहसी थे. फिल्म ने पहली बार एक शादीशुदा महिला की भावनाओं, उसकी इच्छाओं और उसकी पहचान के संकट को इतने खुले तरीके से दिखाया था. इस फिल्म में सबसे ज्यादा अचंभित करता है राखी का सेंसेशन सीन. जो इतने ज्यादा कामुक है कि कोई यह मानने को भी तैयार नहीं होगा यह सीन राखी ने किए है.
क्या थी 'परोमा' की कहानी?
फिल्म की कहानी एक बंगाली हाउसवाइफ 'परोमा' के आसपास घूमती है. परोमा एक संपन्न परिवार की बहू है. वह अपने परिवार की देखभाल करती है, सबकी जरूरतें पूरी करती है और एक आदर्श पत्नी-मां की भूमिका निभाती है. बाहर से देखने पर उसकी जिंदगी बिल्कुल परफेक्ट लगती है, लेकिन अंदर ही अंदर वह अपनी पहचान खो चुकी होती है. घर में हर कोई उसे किसी रिश्ते के नाम से बुलाता है. किसी के लिए वह पत्नी है, किसी के लिए मां, किसी के लिए बहू. लेकिन परोमा के रूप में उसकी अपनी कोई पहचान नहीं बचती. इसी दौरान उसकी जिंदगी में एक युवा फोटोग्राफर आता है, जो उसके व्यक्तित्व को समझने की कोशिश करता है. वह परोमा की तस्वीरें खींचता है और धीरे-धीरे दोनों के बीच इमोशनली नजदीकियां बढ़ने लगती हैं. यह नजदीकियां कब फिजिकल रिलेशन तक आ जाती है यह खुद परोमा को भी पता नहीं चलता. 40 साल की परोमा अपने से आधी उम्र के युवा फोटोग्राफर के लिए अपनी बेकाबू भावनाओं में इतना बह जाती है कि कुछ दिनों के लिए वह एक जिम्मेदार बहु, पत्नी और मां के रूप में खुद को भूल जाती है. यहीं से फिल्म एक नए मोड़ पर पहुंचती है. परोमा पहली बार महसूस करती है कि उसकी भी अपनी इच्छाएं, सपने और भावनाएं हैं. लेकिन जब यह रिश्ता समाज और परिवार के सामने आता है, तब उसकी जिंदगी पूरी तरह बदल जाती है.
उस दौर में क्यों मानी गई थी बोल्ड फिल्म?
आज के समय में रिश्तों और महिलाओं की आजादी पर खुलकर बात होती है, लेकिन 80 के दशक में ऐसा विषय बेहद संवेदनशील माना जाता था. उस समय शादीशुदा महिला के एक्स्ट्रा मैरिटल रिलेशन को स्क्रीन पर दिखाना ही बड़ी बात थी. फिल्म में यह दिखाया गया कि एक महिला केवल परिवार के लिए जीने वाली मशीन नहीं है. उसकी भी अपनी भावनात्मक जरूरतें होती हैं. यही बात उस दौर के समाज को चुभ गई थी. कई लोगों ने इस फिल्म की आलोचना की क्योंकि उन्हें लगा कि यह भारतीय पारिवारिक मूल्यों के खिलाफ है. वहीं दूसरी तरफ बुद्धिजीवियों और फिल्म क्रिटिक्स ने इसकी खूब तारीफ की. उनका मानना था कि फिल्म ने महिलाओं की मानसिक स्थिति को बेहद ईमानदारी से दिखाया है.
राखी गुलजार का दमदार एक्टिंग
राखी गुलजार ने ‘परोमा’ में ऐसी एक्टिंग किया जिसे उनके करियर की सबसे बेहतरीन परफॉर्मेंस में गिना जाता है. फिल्म में उन्होंने एक ऐसी महिला का किरदार निभाया जो बाहर से शांत और जिम्मेदार दिखती है, लेकिन अंदर से अकेली और घुटन महसूस करती है. राखी ने इस किरदार की भावनाओं को इतनी सच्चाई से निभाया कि दर्शक खुद को उससे जुड़ा हुआ महसूस करने लगे. खास बात यह थी कि फिल्म में ज्यादा ड्रामा या ऊंची आवाज वाले डायलॉग नहीं थे. राखी ने अपनी आंखों, चेहरे के हावभाव और शांत एक्टिंग से पूरी कहानी को जीवंत बना दिया.




