वो दिग्गज स्टार जो हर एक्टर को बुलाते था अपने कुत्ते के नाम से 'जानी', को-एक्टर का चेहरा पसंद न आने पर छोड़ देता था फिल्म
दिग्गज अभिनेता राज कुमार अपनी दमदार एक्टिंग के साथ-साथ ‘जानी’ कहकर लोगों को बुलाने की आदत के लिए भी मशहूर थे. फिल्ममेकर केसी बोकाडिया ने इंटरव्यू में बताया कि राज कुमार को संभालना अमिताभ बच्चन से भी ज्यादा मुश्किल था.
भारतीय सिनेमा के दिग्गज स्टार राज कुमार (Raaj Kumar) को फिल्म इंडस्ट्री के लोग बेहद सम्मान की नजर से देखते थे. उनकी एक्टिंग का कोई जवाब ही नहीं था. लेकिन उनके व्यक्तित्व में कुछ ऐसी खासियतें भी थीं जो उन्हें बाकी एक्टर्स या स्टार्स से अलग बनाती थी. उनमें से एक सबसे अजीबोगरीब आदत थी. वे लगभग हर किसी को प्यार से अपने कुत्ते के नाम से पुकारते थे. राज कुमार का कुत्ता नाम था 'जानी'. इसलिए वे हर व्यक्ति को प्यार भरे स्वर में 'जानी' कहकर बुलाते थे.
हालांकि यह उनकी अजीब आदत थी, लेकिन लोग इसे उनके व्यक्तित्व का एक अनोखा हिस्सा मानते थे. हाल ही में प्रसिद्ध फिल्म निर्माता केसी बोकाडिया ने एक इंटरव्यू में राज कुमार के बारे में कई दिलचस्प बातें बताईं. उन्होंने कहा कि इस महान एक्टर को फिल्म के सेट पर संभालना अमिताभ बच्चन को संभालने से भी ज्यादा चैलेंजिंग काम था. बोकाडिया ने इंडिया टीवी को दिए इंटरव्यू में खुलकर कई मजेदार किस्से सुनाए.
राज कुमार को मनाना कितना मुश्किल था
बोकाडिया ने बताया कि राज कुमार उन्हें हमेशा सम्मान के साथ 'बोकाडिया साहब' कहकर पुकारते थे. वे उन्हें 'जानी' कहकर कभी नहीं बुलाते थे. 1992 में बोकाडिया द्वारा निर्देशित फिल्म 'पुलिस और मुजरिम' की कहानी काफी रोचक है. फिल्म का मुहूर्त शॉट अगले दिन तय था, लेकिन बोकाडिया ने राज कुमार को सिर्फ एक शाम पहले फोन करके काम के लिए राजी किया. बोकाडिया ने फोन पर राज साहब से कहा, 'राज साहब, मुझे आपके साथ एक लाइन बोलने दीजिए.' राज कुमार सहमत हो गए.
चेहरा पसंद न आए तो...
बोकाडिया कहते हैं कि राज कुमार के लिए चेहरा बहुत जरुरी था. अगर उन्हें किसी व्यक्ति का चेहरा पसंद नहीं होता तो वे फिल्म नहीं करते थे. कहानी उनके लिए बाद में आती थी. बोकाडिया ने आगे बताया, 'अमिताभ बच्चन को संभालना भी आसान नहीं है, लेकिन राज साहब का मिजाज और भी बदलता रहता था. बच्चन साहब हिसाब-किताब रखने वाले इंसान हैं, उनको समझाना थोड़ा आसान होता है. लेकिन राज साहब मूडी स्वभाव के थे. उनका मन जब होता था तभी काम अच्छा होता था. ठीक वैसे जैसे गाय दूध देती है जब उसका मन करता है.'
पैसे की बात और राजी होना
जब बात पैसे की आई तो बोकाडिया ने बहुत समझदारी दिखाई. उन्होंने राज कुमार से पूछा कि उन्हें कितनी फीस चाहिए. राज कुमार ने पिछली फिल्म का हवाला देते हुए पूछा कि पिछले बार कितना मिला था. बोकाडिया ने बताया कि 21 लाख रुपये मिले थे. राज कुमार ने और ज्यादा रकम मांगी. बोकाडिया ने 23 लाख रुपये की पेशकश की. राज कुमार ने 24 लाख रुपये मांगे. अंत में बोकाडिया ने तुरंत 25 लाख रुपये देने का फैसला कर लिया. साथ ही उन्होंने राज साहब से अगले ही दिन सुबह आने का अनुरोध किया क्योंकि मुहूर्त शॉट तय था. राज कुमार को इतने कम समय में काम करने की बात सुनकर थोड़ा झटका लगा. उन्होंने पूछा कि इतनी जल्दी ऑउटफिट कैसे तैयार होंगी. बोकाडिया ने बहुत ही चतुराई से जवाब दिया, 'राज साहब, आप पिछले 25-30 सालों से लगभग एक जैसे ही दिखते आ रहे हैं. हमें नई ऑउटफिट की कोई जरूरत नहीं है. बस मुझे इतना चाहिए कि मुहूर्त का पहला शॉट आपका ही हो.'
मुहूर्त शॉट और यादगार पल
राज कुमार मान गए. मुहूर्त के दिन उन्होंने वही पुराना पीला कोट पहना जो उन्होंने साल 1967 में बीआर चोपड़ा की फिल्म हमराज़ के प्रसिद्ध गाने 'नीले गगन के तले' में पहना था. यह देखकर सबको बहुत अच्छा लगा. फिल्म 'पुलिस और मुजरिम' में राज कुमार के साथ विनोद खन्ना, मीनाक्षी शेषाद्री और नगमा जैसे कलाकारों ने भी लीड रोल निभाया.




