Trump ने खोला White House का सीक्रेट, Iran पर हमले की उलटी गिनती शुरू थी, फिर अचानक बदला फैसला; बोले- अब बरसेगा कहर
Donald Trump ने दावा किया कि अमेरिका ईरान पर फिर हमला करने के बेहद करीब था. ट्रंप ने चेतावनी दी कि अगर बातचीत नाकाम रही तो सैन्य कार्रवाई हो सकती है.
Donald Trump on Iran War: अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने बुधवार को दावा किया कि ईरान के साथ चल रहे तनाव और युद्ध जैसे हालात को खत्म करने की दिशा में तेजी से काम हो रहा है. हालांकि उन्होंने यह भी साफ कर दिया कि अगर बातचीत नाकाम रही तो अमेरिका फिर से सैन्य कार्रवाई कर सकता है.
ट्रंप ने कहा कि ईरान अब समझौता करने के लिए काफी बेचैन दिखाई दे रहा है और अगर कोई डील हो जाती है तो दुनिया भर में कच्चे तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट देखने को मिलेगी. एक सार्वजनिक कार्यक्रम में ट्रंप ने कहा, “हम सब कुछ खत्म कर रहे हैं. हम हर चीज को खत्म कर रहे हैं. और हम इस युद्ध को बहुत जल्दी समाप्त कर देंगे.”
क्या बोले डोनाल्ड ट्रंप?
उन्होंने कहा कि यह विवाद कई दशक पहले ही सुलझ जाना चाहिए था. ट्रंप ने कहा, “यह काम 47 साल पहले हो जाना चाहिए था. किसी न किसी को कुछ करना चाहिए था. अब यह होगा और बहुत तेजी से होगा.” ट्रंप ने यह भी दावा किया कि दुनिया में तेल की कोई कमी नहीं है और आने वाले समय में तेल की कीमतें तेजी से नीचे आएंगी. उन्होंने कहा, “आप तेल की कीमतों को गिरते हुए देखेंगे. दुनिया में बहुत ज्यादा तेल है और कीमतें तेजी से नीचे जाएंगी.”
क्या बड़ा हमला करने वाला था अमेरिका?
रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, बाद में व्हाइट हाउस में ट्रंप ने खुलासा किया कि अमेरिका ईरान पर एक और हमला करने के बेहद करीब पहुंच गया था. उन्होंने कहा कि फैसला लेने से ठीक पहले कार्रवाई को रोक दिया गया. ट्रंप ने कहा, “मैं आज हमला करने का फैसला लेने से सिर्फ एक घंटे दूर था.”
उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब एक दिन पहले ही उन्होंने कहा था कि तेहरान की तरफ से आए नए प्रस्ताव के बाद अमेरिका ने सैन्य कार्रवाई दोबारा शुरू करने की योजना फिलहाल रोक दी है. यह प्रस्ताव अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जारी संघर्ष को खत्म करने के उद्देश्य से दिया गया था. ट्रंप ने दावा किया कि ईरानी नेता “समझौते की भीख मांग रहे हैं” और चेतावनी दी कि अगर बातचीत सफल नहीं हुई तो कुछ ही दिनों में अमेरिका फिर से हमला कर सकता है.
ट्रंप पर किस तरह का दबाव?
रॉयटर्स की रिपोर्ट में कहा गया है कि ट्रंप प्रशासन पर घरेलू स्तर पर दबाव लगातार बढ़ रहा है. खास तौर पर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को फिर से पूरी तरह खोलने को लेकर सरकार पर दबाव है. यह समुद्री रास्ता दुनिया में तेल सप्लाई के लिए बेहद अहम माना जाता है. रिपोर्ट के मुताबिक, पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतें और कांग्रेस चुनावों से पहले गिरती लोकप्रियता ने ट्रंप प्रशासन की मुश्किलें बढ़ा दी हैं.
क्यों आसान नहीं है ईरान से बातचीत?
अमेरिकी उपराष्ट्रपति JD Vance ने भी कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत में “काफी प्रगति” हुई है और दोनों पक्ष दोबारा बड़े सैन्य अभियान से बचना चाहते हैं. वेंस ने कहा, “हम अभी काफी अच्छी स्थिति में हैं.” व्हाइट हाउस में मीडिया से बातचीत के दौरान वेंस ने माना कि ईरान की सत्ता व्यवस्था कई हिस्सों में बंटी हुई है, जिसकी वजह से बातचीत आसान नहीं है.
उन्होंने कहा, “कई बार यह साफ नहीं होता कि बातचीत करने वाली टीम की वास्तविक स्थिति क्या है.” हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका अपनी “रेड लाइन्स” यानी सीमाएं साफ तौर पर सामने रख रहा है. रॉयटर्स के मुताबिक, वेंस ने कहा कि ट्रंप की रणनीति का एक बड़ा उद्देश्य मध्य पूर्व में परमाणु हथियारों की नई होड़ को रोकना भी है.
अमेरिका ने क्यों टाला हमला?
उधर तेहरान में ईरानी संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा समिति के प्रमुख Ebrahim Azizi ने दावा किया कि ट्रंप ने हमला इसलिए टाल दिया क्योंकि उन्हें समझ आ गया था कि ईरान किसी भी कार्रवाई का “निर्णायक सैन्य जवाब” देगा. ईरानी सरकारी मीडिया के मुताबिक, तेहरान की नई शांति योजना में कई अहम मांगें शामिल हैं. इनमें लेबनान समेत अलग-अलग मोर्चों पर संघर्ष खत्म करना, ईरान के आसपास से अमेरिकी सेना हटाना, अमेरिका और इजरायल के हमलों से हुए नुकसान की भरपाई, आर्थिक प्रतिबंध हटाना, ईरान की जमा पूंजी को जारी करना और अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी खत्म करना शामिल है.




