Assi: समाज की कड़वी सच्चाई और दिल-दिमाग को झकझोर देने वाली कहानी, 39 साल पुरानी इस फिल्म को है ट्रिब्यूट
'अस्सी' एक महिला के साथ हुए जघन्य अपराध और उसके बाद न्याय की लड़ाई की कहानी है. यह फिल्म समाज, कानून और पितृसत्ता की परतें उधेड़ देती है.
Assi: अनुभव सिन्हा की निर्देशित फिल्म 'अस्सी' (Assi) सिनेमाघरों में रिलीज हो गई है. जिसमें तापसी पन्नू (Taapsee Pannu) और कानी कुसरुति (Kani Kusruti) लीड रोल निभा रही है. यह वीमेन सेंट्रिक फिल्म आधे से ज्यादा दर्शकों का दिल जीतने में कामयाब हुई है. अनुभव सिन्हा की नई फिल्म 'अस्सी' शुरुआत से ही बहुत डरावना और गहरा एहसास पैदा करती है. यह फिल्म एक सामाजिक ड्रामा है जो बेहद झकझोरने वाली कहानी बताती है, लेकिन इसका अंत इतना अप्रत्याशित है कि कोई भी संदेह करने वाला व्यक्ति भी इसे सोच नहीं सकता था.
फिल्म की लीड किरार परिमा (कानी कुसरुति) एक मलयाली महिला है, जो दिल्ली के एक स्कूल में टीचर है. उसका पति विनय (मोहम्मद जीशान अय्यूब) एक हरियाणवी है और दोनों का एक छोटा बेटा ध्रुव है. उनका परिवार खुशहाल लगता है, लेकिन एक रात सब कुछ बर्बाद हो जाता है. स्कूल की फेरवेल पार्टी से लौटते समय परिमा मेट्रो से उतरती है और पांच आदमी उसे अगवा कर लेते हैं. वे कार में उसके साथ गैंग रेप करते हैं.
क्या होता है परिमा के साथ?
यह सीन बहुत क्रूर और दर्दनाक है. वे बारी-बारी से उसके साथ रेप और मारपीट करते हैं, जिससे उसकी एक आंख लगभग अंधी हो जाती है. वे हंसते-मजाक करते हुए एक-दूसरे से बात करते हैं कि कौन कितनी देर तक टिक सकता है. निर्देशक आपको पीड़ित के सदमे और दर्द को इतनी गहराई से महसूस करवाते हैं कि लगता है यह कभी खत्म ही नहीं होगा. समय बहुत धीमा बीतता लगता है और दर्शक को असहज महसूस होता है.
फिल्म 'मिर्च मसाला' को ट्रिब्यूट
बलात्कार और मारपीट के बाद, सुबह होते ही उन्हें अधनंगा रेलवे ट्रैक के पास फेंक दिया जाता है. एक अच्छे इंसान की नजर उस पर पड़ती है और वह मदद करता है. कुछ महिलाएं सूखी लाल मिर्च बिखेरकर उसे ठेले पर अस्पताल ले जाती हैं. यह दृश्य शायद केतन मेहता की पुरानी फिल्म 'मिर्च मसाला' को ट्रिब्यूट है. तापसी पन्नू द्वारा निभाई गई रावी एक वकील है, जो परिमा का केस लड़ती है. वह न्याय व्यवस्था में विश्वास रखती है, लेकिन अक्सर निराश भी होती है. वह जानती है कि 'घी सीधी उंगली से नहीं निकलता', इसलिए वह सख्ती से काम करती है.
निर्दोष हो तो छुपना क्यों?
रावी की एक सहकर्मी कावेरी की हिट-एंड-रन में मौत हो गई है (दिव्या दत्ता की आवाज), और उसके पति कार्तिक (कुमुद मिश्रा) गहरे दुख में हैं. रेप से पहले दिखाया जाता है कि परिमा और विनय अपने बेटे को सही तरीके से पाल रहे हैं. वे बेटे को सिखाते हैं कि लड़कियों को सावधान रहने के बजाय लड़कों को सम्मान करना चाहिए. जब घटना होती है, तो परिमा हार नहीं मानती. वह अपना दुपट्टा फेंक देती है क्योंकि उसे लगता है कि इससे उसकी पहचान छिप रही है और वह घुटन महसूस कर रही है वह निर्दोष है, तो क्यों छिपे?.
क्या रहा समाज का बर्ताव?
अदालत में वह बचाव पक्ष के वकील को करारा जवाब देती है. वह स्कूल में वापस पढ़ाना चाहती है, लेकिन प्रिंसिपल (सीमा पाहवा) उसे रोकती हैं और कहती हैं कि स्कूल उसे स्वीकार नहीं करेगा. एक सीन में वह बारात में महिलाओं को 'फेविकोल से' गाने पर नाचते देखती है और उसके चेहरे का दर्द दिल छू लेता है. विनय अपने बेटे के साथ बहुत प्यार से पेश आता है. वह बेटे को 'यारा' कहकर बुलाता है. बेटे को पूरी सच्चाई नहीं बताई जाती, लेकिन वह समझता है कि मां बहुत आहत है.
कितने घंटे की है फिल्म?
मोहम्मद जीशान अय्यूब ने विनय के किरदार को बहुत संवेदनशीलता से निभाया है. वह चुपचाप पत्नी का साथ देते हैं, बिना सवाल किए. फिल्म में मनोज पाहवा एक आरोपी के पिता हैं, जो अपराध छिपाने में मदद करते हैं. एक सीन में वे छोले भटूरे की तुलना करते हैं. सुप्रिया पाठक भी एक सीन में हैं और पितृसत्ता को हथियार की तरह इस्तेमाल करती दिखती हैं.' अस्सी' 2 घंटे 14 मिनट की फिल्म में कई मुद्दों को छूती है, जैसे सहमति, शर्म, भ्रष्टाचार, सोशल मीडिया पर ट्रायल, बच्चों का भविष्य आदि.
कहां कमजोर पड़ती है कहानी?
इरादे अच्छे हैं, लेकिन कुछ जगह कहानी थोड़ी कमजोर लगती है. एक हत्या का रहस्य है, जहां 'अंब्रेला मैन' नाम का व्यक्ति बलात्कारियों को मारता है. यह थोड़ा जबरदस्ती लगता है. जज (रेवती) निष्पक्ष दिखने की कोशिश करती हैं, लेकिन फैसला पहले से तय लगता है. फिल्म में कहा गया है कि भारत में रोज 80 बलात्कार के केस दर्ज होते हैं. हर 20 मिनट बाद स्क्रीन रेड हो जाती है, जो याद दिलाती है कि अभी एक बलात्कार हुआ है. यह बहुत प्रभावशाली है.
दर्शकों की प्रतिक्रिया
फिल्म 20 फरवरी 2026 को रिलीज हुई है और अभी नई है. ज्यादातर क्रिटिक्स इसे सराह रहे हैं क्योंकि यह समाज की कड़वी सच्चाई दिखाती है. कई क्रिटिक्स ने 3.5 से 4 स्टार दिए हैं. कुछ ने कहा कि यह थोड़ी असमान है या ओवरऐम्बिशियस (ज्यादा मुद्दे एक साथ). दर्शकों में भी ज्यादातर लोग इसे पसंद कर रहे हैं, खासकर सोशल मीडिया पर कई ने 'मस्ट वॉच', 'शेकिंग', 'आंखें खोलने वाली' कहा है. लेकिन कुछ लोगों को यह बहुत डिस्टर्बिंग लगी, आसानी से नहीं देखी जा सकती.
तापसी ने जीता दिल
फिल्म 'अस्सी' में तापसी पन्नू का किरदार रावी (Raavi) है, जो एक सख्त और ईमानदार वकील है. वह परिमा (पीड़िता) का केस लड़ती है और न्याय व्यवस्था में विश्वास रखते हुए भी सिस्टम की कमियों से जूझती रहती है. तापसी की एक्टिंग को ज्यादातर रिव्यू में बहुत सराहा गया है. कई क्रिटिक्स और दर्शकों ने इसे उनकी कैरियर की सबसे पावरफुल परफॉर्मेंस में से एक बताया है. इससे पहले उन्हें महिला प्रधान फिल्मों में दमदार रोल में देखा जा चुका है जैसे- थप्पड़, मुल्क, नाम शबाना,पिंक और अब अस्सी.




