90s की ग्लैमरस स्टार Suman Ranganathan: 11 फ्लॉप्स, तलाक और डिप्रेशन के बाद अब कहां हैं रहमान डकैत की एक्ट्रेस?
90s में बॉलीवुड और साउथ सिनेमा में पहचान बनाने वाली सुमन रंगनाथन को हिंदी फिल्मों में लीड रोल नहीं मिले और 11 फ्लॉप्स के बाद करियर ढलान पर चला गया. तलाक और डिप्रेशन के दौर से गुजरने के बाद उन्होंने साउथ इंडस्ट्री में कमबैक किया और आज भी एक्टिव हैं.
सुमन रंगनाथन एक मशहूर भारतीय एक्ट्रेस हैं, जिन्होंने 90 के दशक में फिल्म इंडस्ट्री में धूम मचाई थी. वह मूल रूप से बैंगलोर की रहने वाली हैं और उन्होंने मॉडलिंग से अपने करियर की शुरुआत की. फिर धीरे-धीरे फिल्मों में आईं और कई भाषाओं की फिल्मों में काम किया, जैसे कन्नड़, तमिल, तेलुगु, मलयालम और हिंदी. उनकी खूबसूरती और एक्टिंग की वजह से लोग उन्हें बहुत पसंद करते थे, लेकिन उनका सफर आसान नहीं रहा. आज हम उनकी पूरी कहानी आसान शब्दों में बताते हैं, जिसमें यह शामिल है कि वह अब कहां हैं, क्या कर रही हैं, उन्होंने फिल्म इंडस्ट्री क्यों छोड़ी और हिंदी सिनेमा में उन्हें बड़े रोल क्यों नहीं मिले.
सुमन का जन्म 26 जुलाई 1974 को बैंगलोर में हुआ था. उन्होंने अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद मॉडलिंग शुरू की और जल्दी ही फिल्मों में मौका मिल गया. उनकी पहली फिल्म कन्नड़ भाषा की 'सांता शिशुनाला शरीफा' थी, जो 1990 में आई. इसमें उनका रोल छोटा था, लेकिन लोगों ने नोटिस किया. फिर उन्होंने कई साउथ इंडियन फिल्मों में काम किया और वहां स्टार बन गईं. वह बोल्ड और ग्लैमरस रोल्स के लिए जानी जाती थीं, जैसे तमिल की 'पेरुम पुल्ली' और तेलुगु की 'मुंडाडुगु'. साउथ में उनका करियर अच्छा चल रहा था, लेकिन उन्होंने हिंदी सिनेमा में भी ट्राई किया.
कैसे हुई हिंदी फिल्मों में एंट्री?
हिंदी फिल्मों की बात करें तो सुमन ने 1996 में 'फरेब' से बॉलीवुड में डेब्यू किया. इसमें वह रोहित रॉय के साथ नजर आईं. फिर 'अंखों में तुम हो', 'हतयारा', 'आ अब लौट चलें' जैसी फिल्में कीं. सबसे यादगार रोल 2003 की 'बागबान' में था, जहां वह अमिताभ बच्चन की बहू बनी. वहीं फिल्म 'फरेब' में उनका गाना 'ये तेरी आंखें झुकी झुकी' काफी पॉपुलर हुआ. लेकिन अफसोस, हिंदी सिनेमा में उन्हें कभी बड़े लीड रोल नहीं मिले. क्यों? इसके कई कारण थे. एक तो उस समय बॉलीवुड में साउथ की एक्ट्रेस को अक्सर साइड रोल्स या ग्लैमरस कैरेक्टर ही दिए जाते थे. सुमन के साथ भी यही हुआ. उनकी कई फिल्में फ्लॉप रहीं, जैसे 11 लगातार फ्लॉप्स के बाद लोगों ने उन्हें सीरियसली नहीं लिया. साथ ही, कुछ विवाद भी हुए, जैसे उनकी बोल्ड इमेज की वजह से इंडस्ट्री में गॉसिप्स फैले. इससे बड़े डायरेक्टर्स ने उन्हें मेन हीरोइन के रोल नहीं दिए. आखिरकार, वह निराश होकर साउथ इंडियन फिल्मों में ज्यादा फोकस करने लगीं, जहां उन्हें सम्मान और अच्छे रोल मिल रहे थे.
शादी-तलाक और डिप्रेशन
अब बात करते हैं कि उन्होंने इंडस्ट्री क्यों छोड़ी. सुमन का करियर पीक पर था, जब 2006 में उन्होंने प्रोड्यूसर बंटी वालिया से शादी कर ली. शादी के बाद उन्होंने फिल्मों से ब्रेक ले लिया, क्योंकि वह फैमिली पर फोकस करना चाहती थीं. लेकिन यह शादी ज्यादा नहीं चली सिर्फ 8 महीने बाद ही 2007 में उनका तलाक हो गया. रिपोर्ट्स के मुताबिक, दोनों में अनबन थी और मीडिया में काफी खबरें आईं. तलाक के बाद सुमन डिप्रेशन में चली गईं और फिल्मों से दूर रहीं. लंबे समय तक वह इंडस्ट्री से गायब रहीं, और ब्रेक का सही कारण आज भी ज्यादा लोगों को नहीं पता. कुछ कहते हैं कि पर्सनल लाइफ की परेशानियां थीं, कुछ कहते हैं इंडस्ट्री की पॉलिटिक्स. लेकिन वह पूरी तरह इंडस्ट्री नहीं छोड़ीं, बल्कि धीरे-धीरे कमबैक किया. 2019 में उन्होंने साजन चिन्नप्पा से दूसरी शादी की, जो एक बिजनेसमैन हैं, और अब वह खुशहाल जिंदगी जी रही हैं.
अब सुमन रंगनाथन कहां हैं और क्या कर रही हैं?
वह अभी भारत में ही हैं, ज्यादातर बैंगलोर या साउथ इंडिया में रहती हैं, क्योंकि उनका काम वहीं ज्यादा है. वह फिल्म इंडस्ट्री से पूरी तरह दूर नहीं हुईं. बल्कि, कमबैक के बाद वह कन्नड़ फिल्मों में एक्टिव हैं. 2019 में 'कावलुदारी' और 'दंडुपाल्या 4' जैसी फिल्मों में नजर आईं. फिर 2022 में 'होम मिनिस्टर' और 'पेट्रोमैक्स', 2023 में 'थोथापुरी: चैप्टर 2' रिलीज हुई. यहां तक कि 2025 में उनकी फिल्म 'सिडलिंगु 2' भी आई. इसके अलावा, वह अब सिर्फ एक्टिंग नहीं कर रहीं, बल्कि राइटिंग और डायरेक्शन में भी हाथ आजमा रही हैं. कुछ रिपोर्ट्स कहती हैं कि वह डबिंग आर्टिस्ट भी बन गई हैं और तब्बू, सुष्मिता सेन जैसी एक्ट्रेस के लिए आवाज देती हैं. साथ ही, वह सोशल मीडिया पर एक्टिव रहती हैं और अपनी जिंदगी के बारे में शेयर करती हैं. वह अब 50 की उम्र में भी फिट और खूबसूरत दिखती हैं, और पर्सनल लाइफ में खुश हैं. उनकी कहानी सिखाती है कि जिंदगी में उतार-चढ़ाव आते हैं, लेकिन हार नहीं माननी चाहिए.





