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Budget 2026 से पहले क्यों अहम है Economic Survey? जानें इससे जुड़े हर सवाल का जवाब

Budget से पहले पेश होने वाला Economic Survey सरकार के लिए अर्थव्यवस्था का आईना माना जाता है. यह दस्तावेज़ बीते एक साल में भारत की आर्थिक स्थिति, विकास दर, महंगाई, रोजगार, वित्तीय क्षेत्र और वैश्विक चुनौतियों का गहराई से विश्लेषण करता है. वित्त मंत्रालय के तहत Chief Economic Adviser की टीम इसे तैयार करती है.

Budget 2026 से पहले क्यों अहम है Economic Survey? जानें इससे जुड़े हर सवाल का जवाब
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( Image Source:  Sora AI )
प्रवीण सिंह
Edited By: प्रवीण सिंह

Updated on: 19 Jan 2026 7:50 AM IST

जैसे-जैसे केंद्रीय बजट 2026 की तारीख नज़दीक आ रही है, देश की अर्थव्यवस्था से जुड़ा एक अहम दस्तावेज़ हर साल की तरह फिर चर्चा में है - Economic Survey. इसे अक्सर भारत की अर्थव्यवस्था का रिपोर्ट कार्ड कहा जाता है. बजट से ठीक पहले पेश होने वाला यह सर्वे यह बताता है कि बीते एक साल में देश की आर्थिक हालत कैसी रही, सरकार किन चुनौतियों से जूझी और आगे का रास्ता क्या हो सकता है.

Economic Survey सिर्फ आंकड़ों का पुलिंदा नहीं होता, बल्कि यह सरकार की आर्थिक सोच, प्राथमिकताओं और बजट की दिशा को समझने की चाबी माना जाता है.

Economic Survey क्या है और क्यों जारी किया जाता है?

Economic Survey एक वार्षिक सरकारी दस्तावेज़ है, जिसमें भारत की अर्थव्यवस्था का विस्तार से विश्लेषण किया जाता है. इसमें यह देखा जाता है कि देश की आर्थिक स्थिति पिछले वित्त वर्ष में कैसी रही - विकास दर (GDP Growth), महंगाई, रोजगार, सरकारी वित्त, व्यापार और वैश्विक हालात का देश पर क्या असर पड़ा. इस सर्वे को जारी करने का मुख्य उद्देश्य यह होता है कि केंद्रीय बजट के लिए एक मजबूत और तथ्य-आधारित आधार तैयार किया जा सके. बजट में सरकार जो फैसले लेती है - टैक्स, खर्च, योजनाएं - उनके पीछे का तर्क Economic Survey में छिपा होता है. सरल शब्दों में कहें तो Economic Survey यह बताता है कि अर्थव्यवस्था कहां खड़ी है और बजट से क्या उम्मीद की जा सकती है.

Economic Survey कौन तैयार करता है?

भारत में Economic Survey को वित्त मंत्रालय (Ministry of Finance) के अंतर्गत आने वाला Department of Economic Affairs तैयार करता है. इसकी जिम्मेदारी मुख्य रूप से Chief Economic Adviser (CEA) और उनकी टीम की होती है. इसमें देश-विदेश से आए अर्थशास्त्री, डेटा विशेषज्ञ और नीति विश्लेषक शामिल होते हैं. हालांकि यह सरकारी दस्तावेज़ होता है, लेकिन इसकी खासियत यह है कि इसमें अक्सर खुले विचार, वैश्विक तुलना और ईमानदार आर्थिक आकलन देखने को मिलता है. कई बार इसमें सरकार की नीतियों पर अप्रत्यक्ष आलोचना या सुधार के सुझाव भी दिए जाते हैं.

Economic Survey में क्या-क्या शामिल होता है?

Economic Survey 2026 में आमतौर पर ये प्रमुख हिस्से होते हैं:

  • मैक्रो-इकोनॉमिक प्रदर्शन : GDP ग्रोथ, महंगाई दर, राजकोषीय घाटा (Fiscal Deficit), विदेशी मुद्रा भंडार, चालू खाता घाटा
  • सेक्टर-वाइज विश्लेषण : कृषि (Agriculture), उद्योग और मैन्युफैक्चरिंग, सर्विस सेक्टर, इंफ्रास्ट्रक्चर और निर्माण
  • रोज़गार और श्रम बाजार : नौकरियों की स्थिति, वर्कफोर्स भागीदारी, स्किल डेवलपमेंट
  • वित्तीय क्षेत्र : बैंकिंग सिस्टम, क्रेडिट ग्रोथ, शेयर बाजार और पूंजी बाजार
  • सामाजिक क्षेत्र : शिक्षा, स्वास्थ्य, गरीबी और असमानता, आगे का आउटलुक और जोखिम, आने वाले साल की आर्थिक संभावनाएं, वैश्विक मंदी, युद्ध, तेल कीमतों जैसे जोखिम
  • नीति सुझाव : स्ट्रक्चरल रिफॉर्म, मीडियम टर्म आर्थिक रणनीति

इसके अलावा हर साल Special Chapters भी होते हैं, जिनमें डिजिटल इकॉनमी, क्लाइमेट चेंज, जनसंख्या, टेक्नोलॉजी या प्रोडक्टिविटी जैसे विषयों पर फोकस किया जाता है.

Economic Survey कब पेश किया जाता है?

परंपरा के अनुसार Economic Survey को Union Budget से ठीक एक दिन पहले संसद में पेश किया जाता है. साल 2017 से हर साल 31 जनवरी को Economic Survey पेश होता है और ठीक उसके अगले दिन यानी 1 फरवरी को केंद्रीय बजट पेश होता है. हालांकि अगर बजट की तारीख में बदलाव होता है, तो सर्वे की तारीख भी बदल सकती है.

Economic Survey और Union Budget में क्या अंतर है?

अक्सर लोग इन दोनों को एक जैसा समझ लेते हैं, लेकिन इनका काम अलग-अलग होता है. Economic Survey एक विश्लेषणात्मक दस्तावेज़ होता है जिसमें कोई टैक्स या खर्च का ऐलान नहीं होता और “क्यों” पर फोकस करता है. वहीं केंद्रीय बजट वित्तीय दस्तावेज़ होता है जिसमें टैक्स, सब्सिडी, और तमाम योजनाओं का ऐलान होता है. यानी Economic Survey नीति की सोच समझाता है और Budget उस सोच को अमल में लाता है.

आम लोगों के लिए क्यों जरूरी है Economic Survey?

Economic Survey से आम नागरिक यह समझ सकते हैं कि:

  • सरकार की आर्थिक प्राथमिकताएं क्या हैं
  • आने वाले बजट में किस सेक्टर को फायदा मिल सकता है
  • महंगाई, रोजगार और विकास को लेकर सरकार की सोच क्या है

यही वजह है कि बजट से पहले Economic Survey को गंभीरता से पढ़ा और देखा जाता है, क्योंकि यही आने वाले आर्थिक फैसलों की दिशा तय करता है. Economic Survey सिर्फ एक रिपोर्ट नहीं, बल्कि बजट की नींव है. Budget 2026 से पहले यह दस्तावेज़ यह संकेत देगा कि सरकार किस रास्ते पर चलने वाली है और देश की अर्थव्यवस्था आगे किस दिशा में बढ़ सकती है.

बजट 2026
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