Economic Survey 2026: ट्रंप टैरिफ ने किया खासा नुकसान, जेम्स एंड ज्वेलरी सेक्टर को सबसे बड़ा झटका; नए बाजारों की ओर भारत का निर्यात
Economic Survey 2026 में खुलासा हुआ है कि अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ नीति ने भारत के निर्यात को बड़ा झटका दिया है. खासकर जेम्स एंड ज्वेलरी सेक्टर सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ. रिपोर्ट बताती है कि भारत अब अमेरिका पर निर्भरता घटाकर अफ्रीका, लैटिन अमेरिका और एशिया जैसे नए बाजारों की ओर तेजी से बढ़ रहा है.
Economic Survey 2026 ने वैश्विक व्यापार की सख्त हकीकत को सामने रख दिया है. अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप के दौर की टैरिफ नीति ने भारतीय निर्यात को गहरा झटका दिया, जिसका सबसे बड़ा असर जेम्स एंड ज्वेलरी सेक्टर पर पड़ा. सर्वे के मुताबिक ऊंचे आयात शुल्क, अनिश्चित अमेरिकी नीतियों और वैश्विक भू-राजनीतिक तनावों के चलते भारत को अपने पारंपरिक बाजारों से नुकसान उठाना पड़ा. हालांकि, इस चुनौती के बीच भारत ने रणनीतिक बदलाव करते हुए नए उभरते बाजारों (अफ्रीका, लैटिन अमेरिका, मध्य एशिया और दक्षिण-पूर्व एशिया) की ओर निर्यात का रुख तेज किया है. इकोनॉमिक सर्वे इसे भारत की ‘एक्सपोर्ट डाइवर्सिफिकेशन स्ट्रैटेजी’ का अहम मोड़ बता रहा है. गुरुवार, 29 जनवरी को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा संसद में आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 (Economic Survey 2026) पेश करने के साथ ही देश में केंद्रीय बजट 2026 की आधिकारिक भूमिका भी शुरू हो गई. खास बात यह रही कि इस बार बजट रविवार, 1 फरवरी को पेश किया जाएगा.
आर्थिक सर्वेक्षण 2026 में भारत-अमेरिका व्यापार समझौते (India-US Trade Deal) को लेकर महत्वपूर्ण संकेत दिए गए हैं. दस्तावेज के अनुसार, दोनों देशों के बीच बातचीत में प्रगति जरूर हुई है, लेकिन अमेरिका द्वारा लगाए गए टैरिफ (Trump tariffs) का असर भारत के कई प्रमुख निर्यात क्षेत्रों पर साफ तौर पर दिखाई देने लगा है.
अमेरिका से दूरी, नए बाजारों की ओर झुकाव
आर्थिक सर्वेक्षण के मुताबिक, अप्रैल से नवंबर 2025-26 के दौरान भारत के निर्यात पैटर्न में बड़ा बदलाव देखने को मिला है. अमेरिका अब भी भारत के लिए एक अहम बाजार बना हुआ है, लेकिन हालिया आंकड़े यह संकेत देते हैं कि भारतीय निर्यातक धीरे-धीरे अमेरिका पर निर्भरता कम कर रहे हैं और मध्य पूर्व (West Asia), यूरोप, अफ्रीका और एशिया के कुछ हिस्सों की ओर तेजी से रुख कर रहे हैं. सर्वे में कहा गया है कि अमेरिका में मांग घटने और टैरिफ संबंधी अनिश्चितताओं के चलते कई सेक्टरों में निर्यातक वैकल्पिक बाजार तलाशने लगे हैं ताकि कुल निर्यात वृद्धि बनी रहे।
सबसे ज्यादा झटका: जेम्स एंड ज्वेलरी सेक्टर
आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार, जेम्स एंड ज्वेलरी सेक्टर को अमेरिका में सबसे बड़ा झटका लगा है. अमेरिका को होने वाला निर्यात सालाना आधार पर 44.3% घट गया, जबकि वैश्विक स्तर पर इस सेक्टर का कुल निर्यात मामूली रूप से 0.6% बढ़ा है. अमेरिका का हिस्सा घटकर 33.7% से 18.7% रह गया. वहीं यूएई और हांगकांग की हिस्सेदारी बढ़कर 53.6% हो गई. दस्तावेज में बताया गया है कि बहरीन और सऊदी अरब को सोने के गहनों का निर्यात तेजी से बढ़ा है. मोती और कीमती पत्थरों (pearls & precious stones) का निर्यात कनाडा, मैक्सिको और चीन में बढ़ा है. इसके पीछे भारत-यूएई CEPA समझौते और प्रस्तावित भारत-यूके FTA से जुड़ी उम्मीदों को बड़ा कारण माना गया है.
समुद्री उत्पाद: अमेरिका में गिरावट, एशिया-यूरोप में उछाल
Marine Products (समुद्री उत्पाद) सेक्टर में भी अमेरिका को निर्यात 5.7% घटा, लेकिन कुल वैश्विक निर्यात 16.1% बढ़ा है. इस वृद्धि के पीछे मुख्य रूप से वियतनाम, मलेशिया, चीन, बेल्जियम, जर्मनी और पोलैंड जैसे यूरोपीय देश का योगदान बताया गया है. इससे संकेत मिलता है कि अमेरिका में गिरावट की भरपाई एशिया और यूरोप कर रहे हैं.
ऑटो कंपोनेंट सेक्टर: UAE बना नया हब
ऑटो कंपोनेंट उद्योग में अमेरिका को निर्यात 6.8% घटा, जबकि वैश्विक निर्यात 6% बढ़ा. सर्वे के अनुसार, यूएई, जर्मनी, बेल्जियम, स्लोवेनिया, म्यांमार और ब्राजील को निर्यात बढ़ा है. खासतौर पर यूएई की हिस्सेदारी 3% से बढ़कर 5.3% हो गई है, जो इस बात का संकेत है कि खाड़ी देश भारत के लिए ऑटो कंपोनेंट के नए बड़े बाजार बनते जा रहे हैं.
टेक्सटाइल सेक्टर: अमेरिका में गिरावट, अफ्रीका और यूरोप सहारा
टेक्सटाइल और उससे जुड़े उत्पादों के मामले में अमेरिका को निर्यात 6.1% घटा है. हालांकि, अफ्रीका, यूरोप, पश्चिम एशिया में बढ़ते निर्यात ने कुल वैश्विक शिपमेंट को स्थिर बनाए रखा है. सर्वे में कहा गया है कि यह रणनीतिक विविधीकरण (market diversification) भारत के कपड़ा उद्योग को टैरिफ जोखिम से बचाने में मदद कर रहा है.
फार्मा सेक्टर: टैरिफ के बावजूद मजबूती
फार्मास्यूटिकल सेक्टर ने सबसे ज्यादा मजबूती दिखाई है. अमेरिका में टैरिफ को लेकर अनिश्चितता के बावजूद भारत के फार्मा निर्यात में 6.5% की वृद्धि दर्ज की गई है. इसका बड़ा कारण अफ्रीका, लैटिन अमेरिका और यूरोप में दवाओं की मांग में तेजी को बताया गया है. सर्वे के मुताबिक, भारत की जेनेरिक दवाओं की वैश्विक मांग स्थिर बनी हुई है और अमेरिका पर निर्भरता धीरे-धीरे घट रही है.
रणनीतिक बदलाव की ओर भारत
Economic Survey 2026 का निष्कर्ष है कि भारतीय निर्यात अब एक रणनीतिक बदलाव (Strategic Shift) के दौर से गुजर रहा है. निर्यातक अमेरिका जैसे एक बड़े बाजार पर निर्भर रहने के बजाय बहु-देशीय रणनीति, विविध भौगोलिक बाजार और नए मुक्त व्यापार समझौते की की ओर बढ़ रहे हैं. सर्वे में साफ कहा गया है कि यह बदलाव भारत को वैश्विक व्यापार झटकों से बचाने, निर्यात को स्थिर रखने और नई आपूर्ति श्रृंखलाओं (supply chains) में शामिल होने में मदद कर सकता है.
क्यों अहम है भारत-अमेरिका व्यापार समझौता?
विशेषज्ञों के अनुसार, अमेरिका भारत का सबसे अहम रणनीतिक और आर्थिक साझेदार है. यह संबंध निर्यात विस्तार, तकनीकी सहयोग, विदेशी निवेश (FDI & FII) और वैश्विक सप्लाई चेन में भारत की भूमिका को सीधे प्रभावित करता है. इसी वजह से भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को अक्सर
“Father of all deals” कहा जाता है. विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका के साथ मजबूत व्यापार समझौता होने से सप्लाई चेन का विविधीकरण, निर्यात में दीर्घकालिक स्थिरता और निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा, जिसे विदेशी संस्थागत निवेशक (FII) खासतौर पर ध्यान में रखते हैं.
निवेशकों के लिए क्या मायने?
Economic Survey 2026 यह संकेत देता है कि भारत की निर्यात नीति अब केवल अमेरिका-केंद्रित नहीं बल्कि बहुध्रुवीय (multi-polar) बनती जा रही है. इससे भारत की सौदेबाजी की ताकत बढ़ेगी, टैरिफ युद्ध का असर सीमित होगा और वैश्विक बाजारों में भारतीय कंपनियों की पहुंच बढ़ेगी.
आर्थिक सर्वेक्षण 2026 यह साफ करता है कि ट्रंप टैरिफ का असर भारत के कई अहम सेक्टरों जेम्स एंड ज्वेलरी, टेक्सटाइल, ऑटो कंपोनेंट और मरीन प्रोडक्ट्स - पर पड़ा है. लेकिन साथ ही यह भी दिखाता है कि भारत ने अमेरिका पर निर्भरता घटाकर नए बाजारों की ओर रुख करने की रणनीति अपनाई है. फार्मा सेक्टर की मजबूती और खाड़ी, अफ्रीका व यूरोप में बढ़ता निर्यात यह संकेत देता है कि भारत अब वैश्विक व्यापार में खुद को ज्यादा संतुलित और मजबूत खिलाड़ी के रूप में स्थापित करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है.





