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FD, RD या Mutual Fund? पैसा नहीं, आपकी ‘फाइनेंशियल पर्सनैलिटी’ तय करेगी सही निवेश

FD, RD और Mutual Fund अलग-अलग सोच और जरूरतों के लिए बने निवेश विकल्प हैं. सही चुनाव आपकी फाइनेंशियल पर्सनैलिटी और लक्ष्य पर निर्भर करता है, न कि सिर्फ रिटर्न पर.

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( Image Source:  Sora AI )
प्रवीण सिंह
Edited By: प्रवीण सिंह

Published on: 27 Jan 2026 5:53 PM

निवेश को अक्सर लोग सिर्फ ज्यादा रिटर्न के नजरिए से देखते हैं, लेकिन असली सवाल यह नहीं है कि कौन सा विकल्प ज्यादा कमाई करेगा, बल्कि यह है कि आप किस तरह के निवेशक हैं. कोई व्यक्ति अपने पैसे की पूरी सुरक्षा चाहता है, कोई हर महीने थोड़ी-थोड़ी बचत करने की आदत डालना चाहता है और कोई भविष्य में बड़ा फंड बनाना चाहता है.

फिक्स्ड डिपॉजिट (FD), रेकरिंग डिपॉजिट (RD) और म्यूचुअल फंड तीनों इन्हीं अलग-अलग जरूरतों और सोच को ध्यान में रखकर बनाए गए निवेश विकल्प हैं.

फिक्स्ड डिपॉजिट किनके लिए बेहतर

फिक्स्ड डिपॉजिट उन लोगों के लिए सबसे बेहतर माना जाता है जो जोखिम से दूर रहना चाहते हैं. इसमें आप एक तय रकम बैंक या वित्तीय संस्था में निश्चित अवधि के लिए जमा करते हैं और शुरुआत में ही पता चल जाता है कि मैच्योरिटी पर आपको कितनी राशि मिलेगी. बाजार में उतार-चढ़ाव हो या आर्थिक स्थिति बदले, FD पर उसका असर नहीं पड़ता. यही वजह है कि इसे सबसे सुरक्षित निवेश विकल्पों में गिना जाता है. हालांकि, इसमें मिलने वाला ब्याज आमतौर पर महंगाई के आसपास ही रहता है, इसलिए इससे पैसा बहुत तेजी से नहीं बढ़ता. इसे अमीर बनाने वाला साधन नहीं, बल्कि पूंजी को सुरक्षित रखने वाला जरिया कहा जा सकता है.

कम कमाई वालों के लिए RD का ऑप्‍शन

रेकरिंग डिपॉजिट यानी RD उन लोगों के लिए फायदेमंद है जो एक साथ बड़ी रकम निवेश नहीं कर सकते, लेकिन हर महीने थोड़ी-थोड़ी बचत करना चाहते हैं. इसमें आप हर महीने एक तय राशि जमा करते हैं और तय समय पूरा होने पर ब्याज के साथ पूरी रकम वापस मिलती है. RD का सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह बचत की आदत डालता है और छोटे-छोटे लक्ष्यों जैसे यात्रा, शादी या इमरजेंसी फंड के लिए पैसे जोड़ने में मदद करता है. इसमें मिलने वाला ब्याज लगभग FD के बराबर ही होता है और जोखिम भी बेहद कम रहता है. यही कारण है कि नौकरीपेशा लोगों, गृहिणियों और नए निवेशकों के लिए RD को आसान और सुरक्षित विकल्प माना जाता है.

म्यूचुअल फंड यानी कंपाउंडिंग की ताकत

म्यूचुअल फंड उन निवेशकों के लिए बनाया गया है जो लंबी अवधि में बड़ा फंड बनाना चाहते हैं और बाजार के उतार-चढ़ाव को सहन कर सकते हैं. इसमें कई लोगों का पैसा एक साथ इकट्ठा किया जाता है और एक अनुभवी फंड मैनेजर उस रकम को शेयर बाजार, बॉन्ड और दूसरी वित्तीय योजनाओं में निवेश करता है. म्यूचुअल फंड की सबसे बड़ी ताकत कंपाउंडिंग होती है, यानी समय के साथ पैसा खुद पैसा बनाने लगता है. अगर कोई व्यक्ति 10 या 15 साल तक नियमित निवेश करता है, तो आमतौर पर यह महंगाई से कहीं बेहतर रिटर्न दे सकता है. हालांकि, इसका सीधा संबंध बाजार से होता है, इसलिए इसमें जोखिम भी ज्यादा रहता है और कभी-कभी बाजार गिरने पर निवेश की वैल्यू अस्थायी रूप से कम हो सकती है.

कैसे चुनें सही विकल्‍प?

सही निवेश विकल्प चुनने के लिए सबसे पहले अपनी स्थिति और लक्ष्य को समझना जरूरी है. अगर आपका लक्ष्य 1 से 3 साल का है और आप अपने पैसे की पूरी सुरक्षा चाहते हैं, तो FD या RD बेहतर विकल्प हो सकते हैं. अगर आपका लक्ष्य लंबी अवधि का है, जैसे बच्चों की पढ़ाई या रिटायरमेंट के लिए फंड बनाना, और आप उतार-चढ़ाव सहन कर सकते हैं, तो म्यूचुअल फंड बेहतर रिटर्न दे सकता है. इसके साथ ही, अपनी जोखिम उठाने की क्षमता को पहचानना भी जरूरी है. अगर बाजार गिरते ही आप बेचैन हो जाते हैं, तो सुरक्षित निवेश ही समझदारी होगी, लेकिन अगर आप धैर्य रख सकते हैं, तो म्यूचुअल फंड भविष्य में बड़ा फायदा दे सकता है.

सही संतुलन में ही समझदारी

असल समझदारी एक ही विकल्प चुनने में नहीं, बल्कि जरूरत के हिसाब से सही संतुलन बनाने में है. कई लोग FD में अपनी पूंजी की सुरक्षा रखते हैं, RD से नियमित बचत की आदत डालते हैं और म्यूचुअल फंड के जरिए संपत्ति बढ़ाने की कोशिश करते हैं. इस तरह तीनों विकल्पों को मिलाकर किया गया निवेश न सिर्फ जोखिम को संतुलित करता है, बल्कि भविष्य के लिए मजबूत आर्थिक आधार भी तैयार करता है. निवेश की शुरुआत बड़ी रकम से नहीं, बल्कि सही सोच और सही योजना से होती है, और यही सोच आपको धीरे-धीरे आर्थिक रूप से मजबूत बनाती है.

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