SIP तो करते होंगे आप, SWP के बारे में भी जान लीजिए, रेगुलर इनकम का धुरंधर फॉर्मूला
SWP यानी Systematic Withdrawal Plan रिटायरमेंट के बाद रेगुलर इनकम का आधुनिक तरीका बन चुका है. यह FD और पेंशन से ज्यादा लचीला और टैक्स के लिहाज से फायदेमंद विकल्प माना जा रहा है.
नौकरी खत्म होते ही सबसे बड़ा डर यही होता है कि जमा किया हुआ पैसा कहीं जल्दी खत्म न हो जाए. ज़िंदगी भर की कमाई को एक झटके में खर्च करने का रिस्क कोई नहीं लेना चाहता. इसी वजह से अधिकतर लोग रिटायरमेंट के बाद अपनी रकम एफडी या एन्युटी स्कीम में डाल देते हैं, ताकि हर महीने कुछ तय आमदनी मिलती रहे. लेकिन अब निवेश की दुनिया में एक अलग रास्ता तेजी से लोकप्रिय हो रहा है - SWP यानी Systematic Withdrawal Plan.
SWP का कॉन्सेप्ट सीधा है, लेकिन असरदार. इसमें आप पूरी रकम एक साथ निकालने की बजाय हर महीने एक तय राशि निकालते हैं. आपका बाकी पैसा म्यूचुअल फंड में निवेशित रहता है और बाजार के साथ बढ़ता-घटता है. यानी यह व्यवस्था पेंशन जैसी महसूस होती है, फर्क बस इतना है कि यहां पैसा पूरी तरह लॉक नहीं होता और कंट्रोल आपके हाथ में रहता है.
क्यों रिटायर्ड लोगों को SWP ज्यादा पसंद आ रहा है?
रिटायरमेंट के बाद खर्च खत्म नहीं होते - घर का राशन, बिजली-पानी का बिल, दवाइयां, ट्रैवल और छोटे-मोटे शौक. SWP इन जरूरतों के लिए एक फ्लेक्सिबल इनकम लाइन बनाता है. आप तय करते हैं कि हर महीने कितनी रकम चाहिए और वही पैसा सीधे आपके बैंक अकाउंट में ट्रांसफर हो जाता है. सबसे बड़ी खासियत यह है कि जरूरत पड़ने पर आप निकासी की रकम घटा-बढ़ा सकते हैं, कभी भी SWP रोक सकते हैं और फंड बदल सकते हैं, जबकि पारंपरिक पेंशन प्रोडक्ट्स में ये सुविधा नहीं मिलती.
सिर्फ SWP पर निर्भर रहना खतरनाक क्यों हो सकता है?
अगर SWP ही आपकी इकलौती कमाई है, तो रिस्क बढ़ जाता है. मार्केट का खराब साल आपके फंड की वैल्यू गिरा सकता है और उसी समय अगर निकासी भी चल रही हो, तो पूंजी तेजी से घटती है. इसलिए फाइनेंशियल प्लानिंग का बेहतर तरीका यह माना जाता है कि:
- बेसिक खर्च (दवा, खाना, बिजली) - पेंशन, SCSS या FD से
- लाइफस्टाइल खर्च (घूमना, शौक) - SWP से
यानी SWP को सपोर्ट सिस्टम की तरह इस्तेमाल किया जाए, न कि अकेला सहारा बनाया जाए.
कितनी रकम निकालना सुरक्षित माना जाता है?
SWP की जान उसकी निकासी दर (withdrawal rate) है. आमतौर पर सालाना 4% से 6% की निकासी को सुरक्षित जोन माना जाता है. उदाहरण के तौर पर अगर आपके म्यूचुअल फंड में ₹50 लाख हैं, तो शुरुआत ₹20,000 से ₹25,000 महीना निकालने से की जा सकती है. बाजार अच्छा चले तो रकम बढ़ाने का मन करता है, लेकिन यहीं सबसे बड़ी गलती होती है. ज्यादा निकासी आपकी पूंजी की उम्र कम कर देती है.
टैक्स के मामले में SWP क्यों स्मार्ट माना जाता है?
SWP में मिलने वाली पूरी रकम टैक्सेबल इनकम नहीं मानी जाती. टैक्स सिर्फ उस हिस्से पर लगता है जो मुनाफा (capital gain) होता है. अगर निवेश पुराना है तो टैक्स कम लगता है. कई मामलों में FD के ब्याज से भी कम टैक्स देना पड़ता है. इसी वजह से कई रिटायर्ड लोगों का टैक्स बोझ SWP में हल्का रहता है.
अनुशासन नहीं तो SWP फेल
SWP की सबसे बड़ी ताकत उसकी आसानी है, और सबसे बड़ी कमजोरी भी वही है. लोग खर्च बढ़ते ही निकासी बढ़ा देते हैं, बिना यह सोचे कि इसका असर 10 साल बाद क्या होगा. अगर रिटायरमेंट के शुरुआती सालों में बाजार गिर जाए और निकासी ज्यादा हो तो पूंजी तेजी से खत्म हो सकती है. इसका समाधान यह है कि साल में एक बार प्लान का रिव्यू करें और जरूरत हो तो निकासी घटा लें. इसके अलावा पोर्टफोलियो का कुछ हिस्सा डेट फंड में शिफ्ट करें और एक्स्ट्रा इनकम मिले तो दोबारा कॉर्पस में जोड़ लें. यही तरीके SWP की उम्र बढ़ाते हैं.
किसके लिए SWP सबसे बेहतर है?
SWP उन लोगों के लिए ज्यादा कारगर है जिनका रिटायरमेंट फंड पर्याप्त है, जो खर्च पर कंट्रोल रख सकते हैं, जिनके पास पेंशन या FD जैसी सेफ इनकम पहले से है. ऐसे लोगों के लिए SWP आमदनी देता है, ग्रोथ की संभावना रखता है और पूरी योजना पर कंट्रोल भी देता है. यानी यह परंपरागत पेंशन सिस्टम से ज्यादा आधुनिक और लचीला तरीका बन चुका है. SWP कोई जादुई फार्मूला नहीं है, लेकिन सही तरीके से इस्तेमाल किया जाए तो यह रिटायरमेंट के बाद की जिंदगी को आर्थिक रूप से संतुलित बना सकता है. जो लोग सोच-समझकर निकासी करते हैं और जल्दबाज़ी से बचते हैं, उनके लिए SWP लंबी अवधि तक भरोसेमंद इनकम का जरिया बन सकता है.
डिस्क्लेमर : यह खबर आपको कोई सलाह देने के लिए नहीं है. कृपया निवेश से पहले किसी योग्य वित्तीय सलाहकार से परामर्श अवश्य लें.





