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बजट में ऐसा क्या हुआ एलान कि शेयर बाजार की बज गई बैंड! जानें इनवेस्टर्स के लिए क्या-क्या

Budget 2026 Share Market: बजट 2026 के बाद शेयर बाजार में तेज गिरावट देखने को मिली. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के बजट भाषण के तुरंत बाद सेंसेक्स और निफ्टी में भारी बिकवाली हुई. इसकी मुख्य वजह फ्यूचर्स और ऑप्शंस पर सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) में बढ़ोतरी रही. STT बढ़ने से ट्रेडिंग कॉस्ट बढ़ी, जिससे डेरिवेटिव सेगमेंट में निवेशकों की धारणा कमजोर हुई. सरकारी बैंक, PSU और ब्रोकिंग शेयरों पर सबसे ज्यादा दबाव देखने को मिला.

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( Image Source:  Sora AI )
सागर द्विवेदी
By: सागर द्विवेदी

Updated on: 1 Feb 2026 2:45 PM IST

Budget 2026 Share Market: केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार, 1 फरवरी को लगातार नौवीं बार देश का आम बजट पेश किया. बजट 2026 में सरकार ने जहां आर्थिक विकास को रफ्तार देने और राजकोषीय अनुशासन बनाए रखने पर जोर दिया, वहीं शेयर बाजार ने इसे हल्के झटके के साथ लिया. बजट भाषण के तुरंत बाद भारतीय शेयर बाजार में तेज गिरावट देखने को मिली, जिसने निवेशकों को चौंका दिया.

इंट्राडे कारोबार में सेंसेक्स दिन के ऊपरी स्तर से करीब 2,800 अंकों तक टूट गया, जबकि निफ्टी 50 फिसलकर 24,571.75 के स्तर पर आ गया. बाजार में यह गिरावट खासतौर पर प्रतिभूति लेनदेन कर (STT) बढ़ाने के एलान के बाद देखने को मिली, जिससे डेरिवेटिव सेगमेंट में कारोबार करने वाले निवेशकों और ट्रेडर्स की चिंता बढ़ गई.

बजट 2026: शेयर बाजार से जुड़ी बड़ी घोषणाएं

  • बजट के बाद शेयर बाजार धड़ाम- बजट भाषण के तुरंत बाद शेयर बाजार में भारी बिकवाली देखने को मिली. सेंसेक्स करीब 1,600 अंक टूटकर 80,600 तक आ गया, जबकि निफ्टी लगभग 550 अंक गिरकर 24,800 के स्तर पर पहुंच गया. हालांकि बाद में कुछ रिकवरी दिखी और सेंसेक्स 800 अंक की गिरावट के साथ 81,400 पर, जबकि निफ्टी 250 अंक टूटकर 25,050 पर कारोबार करता नजर आया.
  • फ्यूचर्स और ऑप्शंस पर STT बढ़ा- वित्त मंत्री ने फ्यूचर्स पर लगने वाला सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) 0.02% से बढ़ाकर 0.05% कर दिया. वहीं, ऑप्शंस प्रीमियम और ऑप्शन एक्सरसाइज पर STT को बढ़ाकर 0.15% किया गया. इसी फैसले को बाजार में गिरावट की सबसे बड़ी वजह माना जा रहा है.
  • सरकारी बैंक और PSU शेयरों पर सबसे ज्यादा दबाव- बजट के बाद सरकारी बैंक शेयरों में सबसे ज्यादा बिकवाली दिखी. PSU बैंक सेक्टर करीब 4% तक टूट गया. BEL, SBI और NTPC जैसे दिग्गज शेयरों में भी 4% तक की गिरावट दर्ज की गई.
  • सेंसेक्स के 30 में से 28 शेयर लाल निशान में- सेंसेक्स के 30 शेयरों में से 28 शेयरों में गिरावट देखने को मिली, जबकि सिर्फ 2 शेयर ही हरे निशान में टिक पाए. निफ्टी के भी सभी सेक्टोरल इंडेक्स दबाव में नजर आए.
  • मेटल से लेकर IT तक सभी सेक्टर फिसले- बैंक के अलावा मेटल, मीडिया, FMCG, IT, फार्मा, फाइनेंशियल सर्विसेज और रियल्टी सेक्टर में भी तेज गिरावट दर्ज की गई. यानी बजट के बाद बाजार में चौतरफा बिकवाली का माहौल रहा.
  • STT क्या है और क्यों बढ़ा असर- STT यानी सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स शेयर बाजार में हर खरीद-बिक्री पर लगने वाला टैक्स है. यह मुनाफा हो या नुकसान, दोनों हालात में देना होता है. STT सीधे ट्रांजैक्शन वैल्यू पर कटता है और स्टॉक एक्सचेंज इसे सरकार के पास जमा कराता है. फ्यूचर्स-ऑप्शंस पर STT बढ़ने से ट्रेडिंग कॉस्ट बढ़ी, जिससे निवेशकों की धारणा कमजोर हुई.
  • ब्रोकिंग और एक्सचेंज शेयरों पर दोहरी मार- STT बढ़ने के बाद ब्रोकिंग और स्टॉक एक्सचेंज से जुड़े शेयरों में सबसे ज्यादा दबाव देखने को मिला. कुछ शेयरों में 10% तक की गिरावट दर्ज की गई, क्योंकि डेरिवेटिव ट्रेडिंग पर सीधा असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है.

बजट के बाद क्यों टूटा शेयर बाजार?

शेयर बाजार में आई इस तेज गिरावट की सबसे बड़ी वजह STT में बढ़ोतरी का प्रस्ताव माना जा रहा है. वित्त मंत्री ने बजट भाषण में वायदा और विकल्प (F&O) सौदों पर लगने वाले STT को बढ़ाने की घोषणा की. निर्मला सीतारमण ने कहा कि 'मैं वायदा सौदों पर STT को मौजूदा 0.02% से बढ़ाकर 0.05% करने का प्रस्ताव रखती हूं. वहीं ऑप्शन प्रीमियम और ऑप्शन एक्सरसाइज पर STT को 0.1% और 0.125% से बढ़ाकर 0.15% किया जाएगा.'

STT क्या है और बढ़ोतरी से क्या बदलेगा?

STT यानी Securities Transaction Tax, शेयर बाजार में मान्यता प्राप्त एक्सचेंज पर शेयरों की खरीद-बिक्री पर लगाया जाने वाला टैक्स है.

वायदा सौदों पर STT अब 0.05%

ऑप्शन प्रीमियम और ऑप्शन एक्सरसाइज पर STT 0.15%

इसका सीधा असर डेरिवेटिव ट्रेडिंग की लागत पर पड़ेगा, जिससे शॉर्ट-टर्म ट्रेडिंग महंगी हो जाएगी.

एक्सपर्ट्स की राय- घबराने की जरूरत नहीं

लाइव मिंट में छपी रिपोर्ट के मुताबिक, बाजार के जानकारों का मानना है कि यह गिरावट शॉर्ट टर्म रिएक्शन है और लंबी अवधि में बजट शेयर बाजार के लिए सकारात्मक है. आनंद राठी शेयर एंड स्टॉक ब्रोकर्स के चेयरमैन एवं एमडी प्रदीप गुप्ता ने कहा कि 2026 का बजट लोकलुभावन नीतियों के बजाय प्रतिस्पर्धात्मकता पर केंद्रित है. इसका उद्देश्य भारत की विकास दर को 6.5–7% पर बनाए रखना और ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग व कैपिटल निवेश को आकर्षित करना है. उन्होंने आगे कहा कि निवेश के नजरिए से यह बजट आने वाले दशक में इंफ्रास्ट्रक्चर, मैन्युफैक्चरिंग, फाइनेंशियल्स और कैपिटल मार्केट्स के लिए संरचनात्मक अवसर पेश करता है.”

ब्रोकरेज और एक्सचेंज शेयरों पर क्यों ज्यादा दबाव?

रेलिगेयर ब्रोकिंग के रिसर्च हेड अजीत मिश्रा के मुताबिक, STT बढ़ने से ट्रेडिंग की लागत बढ़ती है, खासकर डेरिवेटिव सेगमेंट में, जहां वॉल्यूम सबसे ज्यादा है. यही वजह है कि ब्रोकरेज और एक्सचेंज से जुड़े शेयरों पर disproportionate दबाव दिखा.”

क्या STT बढ़ोतरी का लंबी अवधि में बड़ा असर पड़ेगा?

विशेषज्ञों का कहना है कि STT बढ़ाने का मकसद राजस्व बढ़ाने से ज्यादा डेरिवेटिव ट्रेडिंग के अत्यधिक वॉल्यूम को नियंत्रित करना है, कैश सेगमेंट में STT में कोई बदलाव नहीं किया गया है, जिससे लॉन्ग टर्म निवेशकों पर इसका असर सीमित रहेगा. क्रॉससीज कैपिटल के एमडी राजेश बाहेती ने कहा कि यह फैसला मध्यम अवधि में ट्रेडिंग वॉल्यूम को प्रभावित कर सकता है, लेकिन लॉन्ग टर्म फंडामेंटल्स पर इसका बड़ा असर नहीं होगा.”

सेक्टर वॉच: किन शेयरों पर रहेगी नजर?

बजट 2026 के बाद जिन सेक्टर्स में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है, उनमें शामिल हैं-

  • डिफेंस
  • इंफ्रास्ट्रक्चर
  • पावर और रेलवे
  • एग्रीकल्चर
  • फाइनेंशियल्स और हाउसिंग

सरकारी पूंजीगत खर्च (Capex) और नीतिगत समर्थन से इन सेक्टर्स को आगे फायदा मिलने की उम्मीद है.

निवेशकों के लिए क्या है संकेत?

हालांकि बजट के दिन बाजार में गिरावट दिखी, लेकिन विशेषज्ञ मानते हैं कि नीतिगत निरंतरता और विकास पर फोकस लंबी अवधि में शेयर बाजार के लिए फायदेमंद रहेगा. किसी भी सकारात्मक सरप्राइज से निफ्टी और सेंसेक्स में तेज रिकवरी भी देखने को मिल सकती है.

निवेशकों को क्या होगा फायदा

अन्य कर प्रस्ताव

बजट में प्रमोटरों द्वारा बायबैक के अनुचित प्रयोग पर रोक लगाने के लिए सभी प्रकार के शेयरधारकों के लिए बायबैक पर पूंजीगत लाभ कर का प्रावधान प्रस्तावित किया गया है. कॉर्पोरेट प्रवर्तकों के लिए यह कर 22% और गैर-कॉर्पोरेट प्रवर्तकों के लिए 30% होगा. टीसीएस दरों में भी सुधार किए गए हैं: एल्कोहॉल युक्त लीकर, स्क्रैप और खनिज विक्रेताओं के लिए दर 2% की गई है. तेंदु पत्तों पर दर को 5% से घटाकर 2% किया गया है. 10 लाख रुपये से अधिक रेमिटेंस के लिए टीसीएस दरें शिक्षा और इलाज के लिए 2%, अन्य उद्देश्यों के लिए 20% प्रस्तावित की गई हैं.

वायदा सौदों पर प्रतिभूति लेनदेन कर (STT) 0.02% से बढ़ाकर 0.05% करने का प्रस्ताव है. ऑप्शन प्रीमियम और ऑप्शन कार्यकलाप पर STT वर्तमान दरों 0.1% और 0.125% से बढ़ाकर 0.15% करने का प्रावधान है.

मैट और क्रेडिट प्रावधान

कंपनियों को नई व्यवस्था में स्थानांतरित करने के लिए मैट-क्रेडिट का उपयोग समयोजित करने की अनुमति केवल नई व्यवस्था में होगी. नई व्यवस्था में उपलब्ध मैट-क्रेडिट के माध्यम से समायोजन कर देयताओं के ¼ की सीमा तक छूट दी जाएगी. 1 अप्रैल, 2026 से कोई और क्रेडिट संचय नहीं होगा और मैट को अंतिम कर बनाया जाएगा. इसके अनुरूप, मौजूदा 15% की मैट दर को घटाकर 14% किया गया है.

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