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Budget 2026: टैक्स में राहत या फिर बोझ, बजट से मिडिल क्लास को क्या-क्या उम्मीदें?

Economic Survey 2025-26 के बाद Budget 2026 से मिडिल क्लास को टैक्स, EMI और TDS में राहत की उम्मीद है. सरकार के फैसले तय करेंगे कि आम टैक्सपेयर को वास्तविक फायदा मिलेगा या नहीं.

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( Image Source:  Sora AI )
प्रवीण सिंह
Edited By: प्रवीण सिंह

Published on: 30 Jan 2026 12:03 PM

Economic Survey 2025-26 पेश होते ही अब देश की नजरें Budget 2026 पर टिक गई हैं. महंगाई, EMI और टैक्स के दबाव से जूझ रहा मिडिल क्लास इस बार बजट से सीधे राहत की उम्मीद कर रहा है. सवाल यह है कि सरकार टैक्सपेयर्स को खुश करने के लिए कौन से बड़े ऐलान कर सकती है?

आर्थिक सर्वे के मुताबिक भारत की अर्थव्यवस्था चालू वित्त वर्ष में करीब 7.4% की रफ्तार से बढ़ सकती है, जबकि 2026-27 में ग्रोथ 6.8% से 7.2% के बीच रहने का अनुमान है. इस पृष्ठभूमि में बजट से जुड़े संकेत भी साफ होने लगे हैं. इस आर्थिक पृष्ठभूमि में विभिन्न क्षेत्रों में बजट से जुड़े मुख्य अपेक्षाओं का स्वरूप सामने आ रहा है:

मिडिल क्लास की सबसे बड़ी अपेक्षा इनकम टैक्स को लेकर है. टैक्सपेयर्स चाहते हैं कि टैक्स ढांचा ऐसा हो जो सिर्फ वसूली का जरिया न बने, बल्कि बचत और निवेश को बढ़ावा दे.

संभावित उम्मीदें:

टैक्स स्लैब में राहत

  • स्टैंडर्ड डिडक्शन में बढ़ोतरी
  • होम लोन के ब्याज पर अतिरिक्त छूट
  • रिटायरमेंट सेविंग्स के नए विकल्प

लोगों का मानना है कि अगर टैक्स स्ट्रक्चर सरल हुआ तो उपभोग बढ़ेगा और अर्थव्यवस्था को सीधा फायदा मिलेगा.

TDS की जटिलता से छुटकारा?

TDS सिस्टम लंबे समय से आम करदाताओं के लिए सिरदर्द बना हुआ है. सैलरी, ब्याज और प्रोफेशनल इनकम पर कटने वाला टैक्स कई बार कैश फ्लो बिगाड़ देता है.

मिडिल क्लास की मांग है कि:

  • TDS नियमों को सरल बनाया जाए
  • रिफंड प्रक्रिया तेज हो
  • छोटे निवेशकों और फ्रीलांसरों के लिए अलग व्यवस्था बने

अगर TDS को आसान किया गया तो Compliance भी सुधरेगा और टैक्सपेयर्स का भरोसा भी बढ़ेगा.

कंपनियों को राहत, तो नौकरी को फायदा

इंडस्ट्री सेक्टर बजट से ऐसी नीतियों की उम्मीद कर रहा है जो निवेश को बढ़ाएं और रोजगार के नए मौके पैदा करें.

उद्योग जगत चाहता है कि सरकार:

  • मैन्युफैक्चरिंग पर फोकस बढ़ाए
  • टेक्नोलॉजी और ग्रीन एनर्जी में निवेश बढ़ाए
  • नियमों को कम जटिल बनाए

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर कंपनियों पर Compliance का बोझ कम होगा, तो वे ज्यादा भर्ती करेंगी.

स्टार्टअप्स के लिए नई सांस?

भारत का स्टार्टअप सेक्टर अब परिपक्व हो चुका है, लेकिन फंडिंग और टैक्स को लेकर अब भी कई अड़चनें हैं.

स्टार्टअप इकोसिस्टम चाहता है:

  • ESOP पर टैक्स में राहत
  • पूंजी जुटाने के नियम आसान हों
  • रिसर्च और इनोवेशन पर इंसेंटिव मिले

इससे टैलेंट देश में रुकेगा और ब्रेन ड्रेन कम होगा.

बाजार और बैंकिंग सेक्टर की नजर

बचत का बड़ा हिस्सा अब शेयर बाजार और म्यूचुअल फंड्स में जा रहा है. ऐसे में बैंक और निवेशक चाहते हैं कि बजट:

  • क्रेडिट फ्लो बनाए रखे
  • ब्याज दरों पर दबाव न बढ़ाए
  • वित्तीय स्थिरता को प्राथमिकता दे

इससे निवेशकों का भरोसा बना रहेगा और बाजार में उतार-चढ़ाव कम होगा.

गांव और छोटे कारोबार की भूमिका

ग्रामीण भारत और MSME सेक्टर को अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है. इन दोनों को लेकर उम्मीद है कि बजट:

  • किसानों के लिए जोखिम सुरक्षा बढ़ाए
  • छोटे उद्योगों को सस्ता कर्ज दे
  • ग्रामीण इन्फ्रास्ट्रक्चर में निवेश करे

इससे रोजगार और खपत दोनों में इजाफा होगा.

Economic Survey ने संकेत दे दिया है कि भारत की आर्थिक स्थिति स्थिर है, लेकिन मिडिल क्लास पर दबाव बना हुआ है. Budget 2026 से लोगों को उम्मीद है कि वह सिर्फ आंकड़ों का खेल नहीं होगा, बल्कि आम टैक्सपेयर की जेब पर भी ध्यान देगा. अब असली सवाल यही है - क्या यह बजट मिडिल क्लास को राहत देगा या फिर सिर्फ ग्रोथ के आंकड़ों तक सीमित रह जाएगा?

बजट 2026
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