Middle East में लड़ रहे अमेरिका के लिए जंग में क्यों नहीं कूद रहा NATO, ट्रंप का भड़कना कितना सही?

ईरान के खिलाफ जंग में अमेरिका के हाल बुरे नजर आ रहे हैं. NATO ने ट्रंप का साथ छोड़ दिया है, जिससे साफ संकेत मिलता है कि सहयोगी देश अमेरिकी राष्ट्रपति के पागलपन को बखूबी समझते हैं.

Edited By :  समी सिद्दीकी
Updated On : 2 April 2026 8:01 AM IST

Why NATO not supporting America: अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump और उनके NATO सहयोगियों के बीच पहले से ही तनावपूर्ण रिश्ते अब और बिगड़ते नजर आ रहे हैं. ईरान के साथ अमेरिका-इज़राइल युद्ध दूसरे महीने में पहुंच चुका है, और इसी बीच कई सहयोगी देश इस संघर्ष में खुलकर साथ देने से पीछे हट रहे हैं. इससे ट्रांस-अटलांटिक संबंधों में दरार और गहरी हो गई है.

ट्रंप प्रशासन चाहता है कि NATO सहयोगी देश ज्यादा सक्रिय भूमिका निभाएं- चाहे वह Strait of Hormuz में नौसैनिक तैनाती हो या यूरोप में मौजूद सैन्य ठिकानों का इस्तेमाल. लेकिन सहयोगी देशों की प्रतिक्रिया ठंडी रही है. इससे नाराज ट्रंप ने ब्रिटिश अखबार The Telegraph को दिए इंटरव्यू में NATO को “पेपर टाइगर” तक कह दिया और यहां तक संकेत दिया कि अमेरिका इस संगठन से बाहर निकलने पर भी विचार कर सकता है.

इसी तरह का रुख अमेरिकी विदेश मंत्री Marco Rubio ने भी दिखाया. उन्होंने कहा कि अगर यह गठबंधन सिर्फ यूरोप की रक्षा तक सीमित है और अमेरिका के हितों की रक्षा नहीं करता, तो इस व्यवस्था की दोबारा समीक्षा करनी होगी.

सहयोगियों ने कहां-कहां रोकी मदद?

  • Spain सबसे मुखर विरोधी के रूप में सामने आया है. स्पेन ने साफ कहा है कि वह अपने हवाई क्षेत्र का इस्तेमाल अमेरिकी सैन्य विमानों के लिए नहीं करने देगा. रक्षा मंत्री मार्गरीटा रोब्लेस ने कहा कि इस मुद्दे पर स्पेन का रुख बिल्कुल स्पष्ट है. वहीं, प्रधानमंत्री Pedro Sanchez ने इस युद्ध को “अनुचित” और “खतरनाक” बताया है. इसके जवाब में ट्रंप ने मैड्रिड के साथ व्यापार कम करने की धमकी भी दी.
  • Italy में भी अमेरिका को झटका लगा. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सिसिली स्थित एक सैन्य बेस के इस्तेमाल की अनुमति अमेरिकी बमवर्षकों को नहीं दी गई. हालांकि इटली सरकार ने कहा कि अमेरिका के साथ कोई तनाव नहीं है और हर अनुरोध पर अलग-अलग आधार पर फैसला लिया जाएगा.
  • United Kingdom ने सीमित समर्थन दिया है. ब्रिटेन ने अपने ठिकानों का इस्तेमाल सिर्फ रक्षात्मक मिशनों के लिए ही मंजूर किया है. प्रधानमंत्री Keir Starmer ने साफ कहा, “यह हमारी जंग नहीं है और हम इसमें शामिल नहीं होंगे.”
  • France ने भी अमेरिकी विमानों को अपने हवाई क्षेत्र से गुजरने की अनुमति देने से इनकार कर दिया, खासतौर पर उन विमानों को जो इज़राइल के लिए सैन्य सामान ले जा रहे थे. ट्रंप ने इस कदम को “बेहद असहयोगी” बताया.
  • वहीं Poland ने भी अपने पैट्रियट एयर डिफेंस सिस्टम को मिडिल ईस्ट भेजने से इनकार कर दिया. रक्षा मंत्री व्लादिस्लाव कोसिनियाक-कामिश ने कहा कि पोलैंड की सुरक्षा उनकी पहली प्राथमिकता है.

क्या स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर भी है मतभेद?

तनाव सिर्फ सैन्य सहयोग तक सीमित नहीं है, बल्कि Strait of Hormuz को लेकर भी गहरे मतभेद सामने आए हैं. यह समुद्री रास्ता दुनिया के करीब 20% तेल और गैस निर्यात के लिए बेहद अहम है. ईरान ने अपनी रणनीतिक स्थिति का इस्तेमाल करते हुए यहां जहाजों की आवाजाही लगभग रोक दी है.

अमेरिका ने सहयोगियों से इस मार्ग को खोलने के लिए नौसैनिक गठबंधन बनाने की अपील की, लेकिन Italy, United Kingdom, France और Greece समेत कई देशों ने इसमें शामिल होने से साफ इनकार कर दिया. जर्मनी के रक्षा मंत्री Boris Pistorius ने कहा, “यह हमारी जंग नहीं है, हमने इसे शुरू नहीं किया." हालांकि कुछ देशों ने सीमित तकनीकी मदद की संभावना जताई है, जैसे कि माइन हटाने के ऑपरेशन. ब्रिटेन ने कहा है कि वह इस दिशा में सहयोगियों से बातचीत कर रहा है, लेकिन ट्रंप इससे संतुष्ट नहीं हैं.

ट्रंप ने क्या कहा?

ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर सहयोगी देशों को कड़ा संदेश देते हुए कहा कि जो देश होर्मुज के कारण ईंधन संकट झेल रहे हैं, वे या तो अमेरिका से तेल खरीदें या फिर खुद जाकर इस रास्ते की सुरक्षा करें. उन्होंने यहां तक कहा कि देशों को “हिम्मत दिखानी” चाहिए और जाकर इस मार्ग को अपने नियंत्रण में लेना चाहिए.

क्या NATO पर बढ़ रहा है संकट?

विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप और उनके सहयोगियों के बयानों से गुस्सा बढ़ता जा रहा है, खासकर उनके समर्थकों के बीच. इस टकराव का असर NATO के भविष्य पर पड़ सकता है और इसके रिश्ते और कमजोर हो सकते हैं.

क्या सहयोगी सच में मना कर सकते हैं?

ट्रंप के इस सुझाव कि सहयोगी देश खुद होर्मुज संकट का समाधान करें, ने यह चिंता भी बढ़ा दी है कि क्या अमेरिका इस मुद्दे से खुद को अलग कर सकता है. ट्रंप ने कहा कि इस जलडमरूमध्य में जो कुछ भी होगा, उसमें अमेरिका की कोई भूमिका नहीं होगी. अगर ऐसा होता है, तो NATO सहयोगियों के साथ-साथ पूरी दुनिया को गंभीर आर्थिक असर झेलना पड़ सकता है, क्योंकि यह मार्ग वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति की एक अहम कड़ी है.

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