Hormuz पर अब महाभारत! 35 देशों की आपात बैठक, ट्रंप की धमकी से बढ़ा ग्लोबल Tensions
Strait of Hormuz लेकर बढ़ते संकट पर 35 देशों की बैठक, ट्रंप के बयान से बढ़ा तनाव. जानें कैसे दुनिया की तेल सप्लाई और अर्थव्यवस्था पर असर पड़ सकता है.
मिडिल ईस्ट में जारी तनाव अब वैश्विक संकट का रूप लेता जा रहा है. दुनिया की सबसे अहम तेल सप्लाई लाइन. हॉर्मुज स्ट्रेट को लेकर हालात इतने गंभीर हो चुके हैं कि इंटरनेशनल लेवल पर कूटनीतिक हल तलाशने की कोशिशें तेज हो गई हैं. इसी कड़ी में ब्रिटेन ने इस सप्ताह एक बड़ी अंतरराष्ट्रीय बैठक बुलाने का एलान किया है.
ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ने साफ कहा है कि इस संघर्ष का असर आने वाली पूरी पीढ़ी को झेलना पड़ सकता है. बढ़ती महंगाई, ऊर्जा संकट और वैश्विक व्यापार पर खतरे के बीच अब दुनिया की नजरें इस अहम जलमार्ग पर टिक गई हैं, जहां से दुनिया का करीब 20% तेल गुजरता है.
हॉर्मुज स्ट्रेट पर UK क्या प्लान बना रहा है?
ब्रिटेन इस हफ्ते एक अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक सम्मेलन आयोजित करने जा रहा है, जिसमें 35 देशों ने मिलकर समुद्री सुरक्षा बहाल करने पर सहमति जताई है. इस बैठक में उन सभी उपायों पर चर्चा होगी, जिनसे- समुद्री मार्ग को फिर से खोला जा सके और फंसे हुए जहाजों और नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित हो. तेल और जरूरी वस्तुओं की सप्लाई दोबारा शुरू हो सके. बैठक के बाद सैन्य योजनाकारों की भी मीटिंग होगी, ताकि युद्ध के बाद इस स्ट्रेट को सुरक्षित और चालू करने की रणनीति बनाई जा सके.
किन-किन देशों ने दिया समर्थन?
इस पहल को कई बड़े देशों का समर्थन मिला है, जिनमें-
ब्रिटेन
फ्रांस
जर्मनी
इटली
जापान
नीदरलैंड. जैसे देश शामिल हैं. यह साफ संकेत है कि यह संकट अब केवल क्षेत्रीय नहीं बल्कि वैश्विक बन चुका है.
ट्रंप ने सहयोगी देशों को क्यों लगाई फटकार?
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने उन देशों पर तीखा हमला बोला है, जिन्होंने ईरान के खिलाफ कार्रवाई में अमेरिका का साथ नहीं दिया. उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि 'वे सभी देश जो Strait of Hormuz की वजह से जेट फ्यूल नहीं हासिल कर पा रहे हैं, जैसे यूनाइटेड किंगडम... उन्हें सीधे जलडमरूमध्य पर जाना चाहिए और बस उसे अपने कब्जे में ले लेना चाहिए. ट्रंप ने ब्रिटेन और यूरोपीय देशों पर तंज कसते हुए कहा कि 'खुद के लिए लड़ना सीखना शुरू करो.' यानि अब अमेरिका हर बार मदद के लिए आगे नहीं आएगा.
UK और US के रिश्तों में क्यों आई दरार?
ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ने अमेरिका के दबाव के बावजूद ईरान के खिलाफ युद्ध में सीधे शामिल होने से इनकार कर दिया था. हालांकि बाद में उन्होंने केवल "defensive missions" की अनुमति दी, जिसका मकसद क्षेत्र में मौजूद नागरिकों की सुरक्षा बताया गया. इस फैसले के बाद ट्रंप और ब्रिटेन के बीच रिश्तों में सार्वजनिक तौर पर खटास देखने को मिली.
ईरान की रणनीति क्या है और दुनिया क्यों डरी हुई है?
ईरान ने साफ चेतावनी दी है कि जो भी जहाज हॉर्मुज स्ट्रेट से गुजरने की कोशिश करेगा, उसे निशाना बनाया जा सकता है. यह वही मार्ग है जिससे- दुनिया का करीब 20% तेल और गैस सप्लाई होती है. भारत और चीन जैसे बड़े बाजार जुड़े हैं
इस वजह से-
- वैश्विक महंगाई बढ़ रही है
- ऊर्जा संकट गहराता जा रहा है
- बाजारों में अस्थिरता बढ़ रही है
क्या यह संकट 1970 के तेल संकट जैसा बन सकता है?
ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ने चेतावनी दी है कि यह संकट 1970 के दशक के तेल संकट जैसा असर डाल सकता है. उनके मुताबिक इस युद्ध का प्रभाव आने वाली पीढ़ी को परिभाषित करेगा. यानि अगर हालात नहीं सुधरे, तो पूरी दुनिया को आर्थिक झटका लग सकता है.