Iran की सत्ता, सेना और परमाणु नीति का सबसे बड़ा चेहरा! कौन थे Israel के हमले में मारे गए आयतुल्लाह अली खामेनेई?

आयतुल्लाह अली खामेनेई की इजराइल के जरिए किए गए हमलों में मौत हो गई. पिछले तीन दशकों से ज्यादा समय तक ईरान की सत्ता के सबसे शक्तिशाली चेहरे रहे. उनके एक फैसले का असर सिर्फ ईरान ही नहीं, बल्कि पूरे मध्य पूर्व और वैश्विक राजनीति पर पड़ता था. आइए जानते हैं कौन थे खामेनेई और कैसे वह क्रांति से देश के सुप्रीम लीडर तक पहुंचे.

( Image Source:  x- @khamenei_ir )
Edited By :  समी सिद्दीकी
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Who Was Ayatollah Ali Khamenei: ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली खामेनेई की मौत की पुष्टि ईरान के सरकारी मीडिया ने कर दी है. यह पुष्टि उस बड़े सैन्य हमले के बाद हुई, जिसमें अमेरिका और इजरायल ने दशकों में पहली बार ईरान के ठिकानों पर सबसे बड़े हमले किए. इससे पहले अमेरिका और इजरायल ने दावा किया था कि तेहरान पर संयुक्त हमलों की बौछार के बाद खामेनेई मारे गए.

रविवार सुबह सरकारी प्रसारक आईआरआईबी (IRIB) ने रिपोर्ट में कहा, 'ईरान के सुप्रीम लीडर शहीद हो गए हैं.' इस्लामी देश के दूसरे सर्वोच्च नेता की हत्या से तेहरान के भविष्य को लेकर अनिश्चितता गहरा सकती है, क्योंकि उनका कोई आधिकारिक उत्तराधिकारी तय नहीं था. ईरान पहले ही जवाबी कार्रवाई की धमकी दे चुका है, ऐसे में लंबे संघर्ष की आशंका भी बढ़ गई है.

आयतुल्लाह अली खामेनेई कौन थे?

अली खामेनेई ईरान के सुप्रीम लीडर थे. यह पद उन्हें देश का प्रमुख और सरकार का सबसे शक्तिशाली व्यक्ति बनाता है. ईरान की व्यवस्था 'विलायत-ए-फकीह' यानी इस्लामी धर्मगुरु के जरिए शासन की अवधारणा पर आधारित है, जिसे 1979 की ईरानी क्रांति के बाद पहले सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह रुहोल्लाह खुमैनी ने स्थापित किया था.

1939 में जन्मे अली खामेनेई ने अपनी धार्मिक पढ़ाई कई बड़े इस्लामी विद्वानों के मार्गदर्शन में की, जिनमें रुहोल्लाह खुमैनी भी शामिल थे. 1960 के दशक में उन्होंने ईरान की राजशाही के खिलाफ हो रहे आंदोलनों में हिस्सा लिया, इस वजह से उन्हें कई बार जेल भी जाना पड़ा.

1979 की ईरानी क्रांति के बाद उन्हें रिवोल्यूशनरी काउंसिल में शामिल किया गया. इसके बाद उन्होंने सरकार में कई अहम पद संभाले, जिनमें उप रक्षा मंत्री का पद और कुछ समय के लिए इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) की कमान भी शामिल थी.

आयतुल्लाह अली खामेनेई ने कब संभाली ईरान के सुप्रीम लीडर की गद्दी?

1989 में विशेषज्ञों की सभा (Assembly of Experts) ने उन्हें खुमैनी के उत्तराधिकारी के रूप में सुप्रीम लीडर चुना, तब से वह इस पद पर बने हुए थे.

ईरान में सुप्रीम लीडर का क्या काम होता है?

सुप्रीम लीडर सरकार के सभी प्रमुख कार्यों की निगरानी करते हैं. वह शीर्ष सैन्य अधिकारियों, गार्जियन काउंसिल के धार्मिक सदस्यों और न्यायाधीशों की नियुक्ति करते हैं. जंग का ऐलान करने की ताकत भी सुप्रीम लीडर के पास होती है और वही ईरान की सशस्त्र सेनाओं के टॉप लीडर कमांडर होते हैं. हालांकि ईरान में राष्ट्रपति और संसद का चुनाव होता है, लेकिन देश की नीतियों की दिशा तय करने और चुनावी प्रक्रिया पर प्रभाव रखने में सुप्रीम लीडर की भूमिका बेहद अहम और प्रभावशाली मानी जाती है.

खामेनेई के नेतृत्व में ईरान को उसकी नीतियों, खासकर परमाणु कार्यक्रम को लेकर, अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों का सामना करना पड़ा. 2015 में पश्चिमी देशों के साथ तनाव कम करने की कोशिश हुई थी.

उस समय संयुक्त व्यापक कार्य योजना (Joint Comprehensive Plan of Action - JCPOA) नाम का समझौता हुआ था. हालांकि बाद में फिर से तनाव बढ़ गया. उनके नेतृत्व में लिए गए आर्थिक और विदेश नीति से जुड़े फैसलों को लेकर ईरान के अंदर कई बार विरोध प्रदर्शन भी हुए, जिनमें लोग महंगाई और हालात को लेकर सड़कों पर उतरे.

ज्ञात हो कि इजराइल और ईरान के बीच जंग की शुरुआत हो चुकी है. बीते रोज इजराइल ने ईरान की कई जगहों को निशाना बनाया था, जिसमें कई लीडर्स की मौत भी हुई है. ईरान में मरने वालों का आंकड़ा 200 को पार कर चुका है.

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