धरती के नीचे ‘मौत का शहर! ईरान का अंडरग्राउंड हथियार किला, आसमान से US-इजराइल; मिशन पॉसिबल या इम्पॉसिबल?
ईरान की अंडरग्राउंड मिसाइल सिटीज उसकी सबसे बड़ी सैन्य ताकत मानी जाती हैं. लेकिन सवाल यह है. क्या इजरायल इन छिपे ठिकानों को खोजकर नष्ट कर सकता है?
ईरान ने पिछले कुछ वर्षों में जमीन के नीचे विशाल अंडरग्राउंड नेटवर्क तैयार किए हैं, जिन्हें मिसाइल सिटीज कहा जाता है. ये सिर्फ बंकर नहीं, बल्कि पूरे के पूरे सैन्य शहर हैं, जहां लंबी सुरंगें, बड़े स्टोरेज हॉल और ऑटोमेटेड लॉन्च सिस्टम मौजूद हैं. इनका मकसद साफ है - दुश्मन के हवाई हमलों से बचते हुए किसी भी समय जवाबी हमला करने की क्षमता बनाए रखना. इन्हीं वजहों से इन्हें ‘मौत का शहर’ भी कहा जाता है. अमेरिका और इजरायल के सामने चुनौती यह है कि, क्या वे ईरान के मिसाइल सिटी को ध्वस्त कर पाएंगे?
इन अंडरग्राउंड ठिकानों में कौन-कौन से हथियार छिपे हैं?
इन मिसाइल सिटीज़ में सैकड़ों से लेकर हजारों तक बैलिस्टिक और क्रूज मिसाइलें रखी जा सकती हैं. इनमें लंबी दूरी की मिसाइलें जैसे गादर, कासिम, फत्ताह-1 और खेबर शेकन शामिल हैं. कई मिसाइलें ट्रांसपोर्टर-इरेक्टर-लॉन्चर (TEL) ट्रकों पर तैनात रहती हैं, जिससे उन्हें तेजी से किसी भी जगह लॉन्च किया जा सके. इसके अलावा बड़ी संख्या में ड्रोन और UAV भी इन सुरंगों में स्टोर किए जाते हैं.
ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल सिस्टम कितने ताकतवर हैं?
ईरान के पास मिडिल ईस्ट का सबसे बड़ा बैलिस्टिक मिसाइल स्टॉकपाइल माना जाता है. इसकी मिसाइल क्षमता उसकी सैन्य रणनीति की रीढ़ है. प्रमुख मिसाइलों में सेजिल (2000–2500 किमी), इमाद (लगभग 1700 किमी), गदर (करीब 2000 किमी), शाहाब-3 (1300 से 2000 किमी) और खोर्रमशहर (2000 किमी) शामिल हैं. इसके अलावा होवेयज़ेह क्रूज़ मिसाइल की रेंज करीब 1350 किमी मानी जाती है, जो सटीक हमले के लिए जानी जाती है. ईरान ने शायद अब तक का अपना सबसे बड़ा मिसाइल शहर बनाया है जो इस इलाके में US के सभी एसेट्स को तबाह कर सकता है।
नए अंडरग्राउंड मिसाइल बेस में हज़ारों प्रिसिजन-गाइडेड मिसाइलें हैं जैसे खेबर शेकन, हज कासेम, ग़दर-एच, सेज्जिल, इमाद और दूसरी।
शॉर्ट-रेंज और टैक्टिकल मिसाइलों में ईरान कितना मजबूत है?
करीबी और बैटलफील्ड ऑपरेशन के लिए ईरान के पास फतेह-110 और जोल्फाघर जैसी टैक्टिकल मिसाइलें हैं, जिनकी रेंज 300 से 700 किलोमीटर तक है. ये मिसाइलें तेज़ी से तैनात की जा सकती हैं और सीमित दूरी के भीतर सटीक निशाना साधने के लिए इस्तेमाल होती हैं.
ईरान की क्रूज़ मिसाइलें कितनी एडवांस्ड हैं?
क्रूज़ मिसाइल कैटेगरी में ईरान के पास सौमर (2000–3000 किमी अनुमानित रेंज) और पवेह जैसी मिसाइलें हैं, जो केएच-55 तकनीक पर आधारित मानी जाती हैं. इनकी खासियत यह है कि ये रडार से बचते हुए कम ऊंचाई पर उड़ान भर सकती हैं और बेहद सटीक तरीके से लक्ष्य को भेद सकती हैं.
ईरान के पास कितनी मिसाइलें और लॉन्चर?
ईरान अपनी मिसाइलों की सटीक संख्या सार्वजनिक नहीं करता, लेकिन विभिन्न आकलनों के अनुसार उसके पास 3000 से ज्यादा मिसाइलें हो सकती हैं. इनके साथ लगभग 50 से 200 के बीच लॉन्चर होने का अनुमान है, जो अलग-अलग स्थानों से एक साथ हमले की क्षमता देते हैं.
‘खैबर’ मिसाइल और नए परीक्षण क्या संकेत देते हैं?
अमेरिका के साथ बढ़ते तनाव के बीच ईरान ने हाल ही में ‘खैबर’ नाम की नई बैलिस्टिक मिसाइल का परीक्षण किया है. यह सतह से सतह पर मार करने वाली चौथी पीढ़ी की मिसाइल बताई जा रही है. इसे एक गुप्त स्थान से लॉन्च किया गया, जो ईरान की रणनीतिक गोपनीयता और तैयारी को दर्शाता है. इसके अलावा “ऑपरेशन ट्रू प्रॉमिस 2” के दौरान ईरान ने अंडरग्राउंड सुरंगों में मौजूद मिसाइलों का फुटेज भी जारी किया, जो अचानक और बड़े हमलों की उसकी क्षमता को दिखाता है.
ईरान की ड्रोन ताकत कितनी बड़ी?
ड्रोन टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में भी ईरान तेजी से आगे बढ़ा है. उसके पास शाहेद-136 जैसे सुसाइड ड्रोन, मोहाजेर और अबाबिल जैसे निगरानी और अटैक UAV मौजूद हैं. इन ड्रोन का इस्तेमाल रूस ने यूक्रेन युद्ध में भी किया है, जिससे उनकी प्रभावशीलता साबित होती है. 2025 के संघर्ष में कुछ नुकसान के बावजूद ईरान ने अपने ड्रोन बेड़े का लगभग 80–85% फिर से तैयार कर लिया है.
ये सुरंगें और बंकर कितने सुरक्षित हैं?
ईरान ने इन अंडरग्राउंड नेटवर्क को बेहद मजबूत बनाया है. ये सुरंगें पहाड़ों के नीचे सैकड़ों मीटर गहराई में बनाई गई हैं और इनमें मोटे कंक्रीट और चट्टानों की कई परतें होती हैं. हाल के वर्षों में इन्हें और मजबूत किया गया है, खासकर नतांज और पिकैक्स माउंटेन जैसे इलाकों में. इनका डिजाइन ऐसा है कि सामान्य बमबारी से इन्हें नुकसान पहुंचाना बेहद मुश्किल माना जाता है.
क्या इन मिसाइल सिटीज में ऑटोमेटेड लॉन्च सिस्टम मौजूद हैं?
इन ठिकानों की सबसे बड़ी खासियत इनका एडवांस्ड इंफ्रास्ट्रक्चर है. यहां रेल-माउंटेड और रोड-मोबाइल लॉन्च सिस्टम मौजूद हैं, जो तेजी से मिसाइलों को लॉन्च करने में सक्षम हैं. कुछ सुरंगों में ऑटोमेटेड सिस्टम लगाए गए हैं, जिससे बिना ज्यादा समय गंवाए एक साथ कई मिसाइलें दागी जा सकती हैं.
2025 के बाद ईरान ने क्या नए सैन्य अपग्रेड किए हैं?
2025 की शुरुआत में ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड (IRGC) ने नई अंडरग्राउंड सुविधाओं का खुलासा किया. इनमें खास सुरंगें बनाई गई हैं, जहां से रडार से बचने वाली क्रूज़ मिसाइल लॉन्च करने वाली स्पीडबोट्स भी ऑपरेट की जा सकती हैं. इससे ईरान की समुद्री और मिसाइल ताकत और ज्यादा खतरनाक हो गई है.
‘ओघाब 44’ और नतांज कॉम्प्लेक्स क्यों हैं इतने अहम?
ओघाब-44 (Eagle 44) एक अंडरग्राउंड एयरबेस है, जिसे फाइटर जेट, बॉम्बर और ड्रोन रखने के लिए बनाया गया है. वहीं नतांज़ और उसके आसपास का क्षेत्र ईरान के सबसे मजबूत सैन्य और परमाणु ढांचे में शामिल है. यहां गहरे और मजबूत सुरंग नेटवर्क बनाए गए हैं, जो ईरान की रणनीतिक क्षमता को कई गुना बढ़ाते हैं.
क्या इजरायल अंडरग्राउंड मिसाइल सिटीज को नष्ट कर सकता है?
यह सबसे बड़ा सवाल है. इजरायल के पास एडवांस्ड एयरफोर्स, प्रिसिजन गाइडेड बम और बंकर-बस्टर हथियार हैं, जो जमीन के अंदर बने ठिकानों को निशाना बना सकते हैं. लेकिन ईरान की मिसाइल सिटीज़ की गहराई, मजबूती और फैले हुए नेटवर्क को देखते हुए इन्हें पूरी तरह नष्ट करना बेहद मुश्किल माना जाता है. किसी भी हमले के लिए सटीक इंटेलिजेंस और लगातार ऑपरेशन की जरूरत होगी.
क्या यह जंग ‘अंडरग्राउंड बनाम एयरपावर’ की होगी?
ईरान की रणनीति है, छिपकर वार करना, जबकि इजरायल की ताकत है, हवाई हमले और तकनीकी श्रेष्ठता. ऐसे में यह संघर्ष “अंडरग्राउंड इंफ्रास्ट्रक्चर बनाम एयर सुपरियोरिटी” की लड़ाई बन सकता है, जहां जीत उसी की होगी जो दुश्मन की कमजोरी को पहले पहचान ले.
ईरान की अंडरग्राउंड मिसाइल सिटीज उसे एक मजबूत और टिकाऊ सैन्य शक्ति बनाती हैं. हालांकि इजरायल के पास इन्हें चुनौती देने की क्षमता है, लेकिन इन गुप्त ठिकानों को पूरी तरह खत्म करना आसान नहीं है. यही वजह है कि यह संघर्ष केवल हथियारों का नहीं, बल्कि रणनीति और तकनीक की भी जंग है.
क्या ईरान की सैन्य ताकत अमेरिका के सामने कुछ नही?
ग्लोबल फायरपावर 2026 की रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका के पास 13 लाख एक्टिव सैनिक, $895B बजट, 1000 से ज्यादा F-35 जेट्स, 11 कैरियर्स, सैटेलाइट्स, प्रिसीजन स्ट्राइक्स की क्षमता हैं. ईरान के पास 6.1 लाख एक्टिव, 10 बिलयिन डॉलर का रक्षा बजट, 2000 से ज्यादा बैलिस्टिक मिसाइल्स और ड्रोन्स में मजबूत पक्ष है, लेकिन एयर फोर्स पुरानी और उसकी नेवी कमजोर है. ईरान इसके दम पर 4 से 5 हफ्ते तक युद्ध कर सकता है. उसके बाद इजरायल और अमेरिका वाले रेजीम चेंज की कोशिश करेंगे. इसके बावजूद ईरान की IRGC मजबूत है. वह असिमेट्रिक हमले जारी रख सकता हैं.
गाजा की तुलना बड़े सवाल खड़े करती है?
ईरान का दावा है कि उसके अंडरग्राउंड नेटवर्क को खत्म करने में दो साल से ज़्यादा लग सकते हैं. एनालिस्ट अक्सर गाजा से तुलना करते हैं, जहां इज़राइल ने कथित तौर पर 365 स्क्वायर किलोमीटर में फैले टनल सिस्टम के खिलाफ 64,000 बम इस्तेमाल किए, जिसमें अनुमानित 500-700 किलोमीटर टनल हैं.
इसके उलट, ईरान 1.65 मिलियन स्क्वायर किलोमीटर में फैला है, जो गाजा से लगभग 4,500 गुना बड़ा है, और माना जाता है कि इसकी फैसिलिटी ज़्यादा गहरी और टेक्नोलॉजी के हिसाब से ज़्यादा एडवांस्ड हैं, जिसमें रेल सिस्टम, एंटी-ब्लास्ट दरवाज़े और ऑटोमेटेड लॉन्च मैकेनिज्म शामिल हैं. उस पैमाने के हिसाब से, ईरान के पूरे अंडरग्राउंड इंफ्रास्ट्रक्चर को खत्म करने के लिए एक लंबे और रिसोर्स-इंटेंसिव कैंपेन की ज़रूरत होगी.
गाजा की तुलना ईरान के अंडरग्राउंड नेटवर्क पर बड़े सवाल क्यों खड़े करती है?
ईरान के अंडरग्राउंड मिसाइल नेटवर्क को लेकर सबसे बड़ी बहस इसकी तुलना गाजा से की जाती है. ईरान का दावा है कि उसके इन गुप्त ठिकानों को पूरी तरह खत्म करने में दो साल से ज्यादा समय लग सकता है. यही वजह है कि सैन्य विश्लेषक गाजा के अनुभव को एक संदर्भ के तौर पर देखते हैं, जहां पहले ही बड़े पैमाने पर सुरंगों के खिलाफ ऑपरेशन हो चुका है.
गाजा में इजरायल ने सुरंग नेटवर्क को निशाना बनाने के लिए बेहद बड़े स्तर पर सैन्य कार्रवाई की थी. करीब 365 वर्ग किलोमीटर के इलाके में फैले टनल सिस्टम को खत्म करने के लिए लगभग 64,000 बम गिराए गए थे. रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस क्षेत्र में 500 से 700 किलोमीटर लंबी सुरंगें मौजूद थीं, जिन्हें पूरी तरह खत्म करना बेहद चुनौतीपूर्ण साबित हुआ.
ईरान का आकार और इंफ्रास्ट्रक्चर गाजा से कितना अलग है?
अगर गाजा और ईरान की तुलना करें, तो तस्वीर पूरी तरह बदल जाती है. ईरान का कुल क्षेत्रफल लगभग 1.65 मिलियन वर्ग किलोमीटर है, जो गाजा से करीब 4,500 गुना बड़ा है. इतना ही नहीं, ईरान की अंडरग्राउंड सुविधाएं ज्यादा गहरी, मजबूत और तकनीकी रूप से कहीं अधिक उन्नत मानी जाती हैं.
ईरान के सुरंग नेटवर्क सिर्फ छिपने के लिए नहीं हैं, बल्कि ये पूरी तरह से ऑपरेशनल सैन्य ढांचे हैं. इनमें रेल सिस्टम, एंटी-ब्लास्ट दरवाजे, मल्टी-लेयर प्रोटेक्शन और ऑटोमेटेड मिसाइल लॉन्च सिस्टम शामिल हैं. इसका मतलब यह है कि ये ठिकाने सिर्फ सुरक्षित ही नहीं, बल्कि तेजी से जवाबी कार्रवाई करने में भी सक्षम हैं.
क्या ईरान के अंडरग्राउंड नेटवर्क को खत्म करना संभव है?
सैद्धांतिक रूप से किसी भी सैन्य ढांचे को निशाना बनाया जा सकता है, लेकिन ईरान के मामले में यह बेहद जटिल और लंबा ऑपरेशन होगा. इसके लिए लगातार हमले, सटीक इंटेलिजेंस और भारी संसाधनों की जरूरत पड़ेगी. विशेषज्ञों का मानना है कि यह एक शॉर्ट-टर्म ऑपरेशन नहीं, बल्कि लंबे समय तक चलने वाला “रिसोर्स-इंटेंसिव कैंपेन” होगा.