Iran-US War: अनलिमिटेड का दावा बनाम हकीकत, क्या ईरान युद्ध में खाली हो रहा है अमेरिका का मिसाइल भंडार?
ईरान के साथ बढ़ते संघर्ष के बीच ट्रंप ने अमेरिका के पास ‘लगभग असीमित’ हथियार होने का दावा किया है. हालांकि रिपोर्ट्स और विश्लेषण बताते हैं कि मिसाइल भंडार और उत्पादन क्षमता पर भारी दबाव बन रहा है.
ईरान के खिलाफ अमेरिकी सैन्य अभियान जैसे-जैसे तेज़ हो रहा है, वैसे-वैसे एक अहम सवाल वॉशिंगटन के रणनीतिक गलियारों में गूंज रहा है - क्या अमेरिका के पास इस लंबी लड़ाई को जारी रखने के लिए पर्याप्त हथियार हैं? क्या उसके मिसाइल और इंटरसेप्टर भंडार (Munitions Stockpile) उतने ही मजबूत हैं, जितना दावा किया जा रहा है?
द वॉल स्ट्रीट जरनल की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी सैन्य नेतृत्व ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को ईरान पर बड़े और लंबे हमले के संभावित जोखिमों से अवगत कराते समय जिन मुद्दों को उठाया किया था, उनमें से एक प्रमुख चिंता थी - अमेरिका के हथियारों के जखीरे की स्थिति. अब, जब ईरान जवाबी मिसाइल और ड्रोन हमले कर रहा है, तो अमेरिका को न सिर्फ आक्रामक हमले जारी रखने हैं, बल्कि अपने और सहयोगियों की रक्षा के लिए लगातार इंटरसेप्टर मिसाइलें भी दागनी पड़ रही हैं. यही वह बिंदु है जहां अमेरिका की वास्तविक क्षमता की परीक्षा शुरू होती है.
ट्रंप के दावे में कितना दम?
राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर दावा किया कि अमेरिका के पास “मीडियम और अपर मीडियम ग्रेड” के हथियारों का भंडार पहले से कहीं अधिक है. उन्होंने लिखा कि अमेरिका के पास इन हथियारों की “Virtually unlimited supply” यानी लगभग असीमित आपूर्ति है और केवल इन्हीं के सहारे “युद्ध अनिश्चित काल तक सफलतापूर्वक लड़े जा सकते हैं.” ट्रंप ने यह भी कहा कि “अतिरिक्त हाई ग्रेड हथियार” विदेशों में सुरक्षित स्थानों पर रखे गए हैं. हालांकि उन्होंने इन स्थानों या वास्तविक संख्या का खुलासा नहीं किया. लेकिन रक्षा विश्लेषकों का कहना है कि जमीनी सच्चाई कहीं अधिक जटिल है.
अमेरिकी मिसाइल भंडार की हकीकत क्या?
पिछले कुछ वर्षों में अमेरिका ने यूक्रेन को रूस के खिलाफ युद्ध में भारी मात्रा में मिसाइलें और एयर डिफेंस इंटरसेप्टर दिए हैं. गाजा और मध्य पूर्व में संघर्ष के दौरान भी अमेरिकी नौसेना ने बड़ी संख्या में महंगी मिसाइलें इस्तेमाल की हैं. यह स्पष्ट हो चुका है कि अमेरिका अपनी मिसाइलों का उपयोग और वितरण उत्पादन क्षमता से अधिक तेजी से कर रहा है. मिसाइल इन्वेंटरी के लिहाज से, अमेरिका किसी बड़े और लंबे युद्ध - खासकर चीन जैसे 'विरोधी' के खिलाफ - पूरी तरह तैयार नहीं दिखता.
यूक्रेन को दिए गए NASAMS, Hawk और Patriot एयर डिफेंस सिस्टम्स के लिए अमेरिका ने बड़ी मात्रा में इंटरसेप्टर भेजे, लेकिन यह भी सामने आया कि यह आपूर्ति यूक्रेन की ज़रूरतों के मुकाबले पर्याप्त नहीं थी. इसका नतीजा यह हुआ कि रूस को यूक्रेन के सैन्य ठिकानों और ऊर्जा ठिकानों पर हमले करने का अवसर मिला.
SM-3 और THAAD: सबसे कीमती हथियार
SM-3 मिसाइलें बैलिस्टिक मिसाइलों को इंटरसेप्ट करने के लिए सबसे प्रभावी मानी जाती हैं. Center for Strategic and International Studies (CSIS) की रिपोर्ट के अनुसार दिसंबर 2025 तक अमेरिका के पास ऐसी कुल 414 मिसाइलें ही थीं. अप्रैल 2024 में ईरान द्वारा दागी गई बैलिस्टिक मिसाइलों को रोकने के लिए अमेरिकी विध्वंसकों ने 4 से 7 SM-3 दागीं. प्रत्येक की कीमत 13 से 28 मिलियन डॉलर के बीच है. यानी एक ही मुठभेड़ में 50 से 190 मिलियन डॉलर तक खर्च हो गए. इसी तरह जून 2025 में भी ईरान-इजराइल तनाव के दौरान इनका इस्तेमाल किया गया. इसी तरह, अमेरिका ने इज़राइल को THAAD एयर डिफेंस सिस्टम दिया. एक THAAD सिस्टम की कीमत एक अरब डॉलर से अधिक है, और हर इंटरसेप्टर की कीमत लगभग 13 मिलियन डॉलर है.
ईरान की क्षमता: चुनौती और गंभीर
अनुमान है कि ईरान के पास 3,000 से अधिक बैलिस्टिक मिसाइलें और हजारों ड्रोन हैं. यदि वह बड़े पैमाने पर हमले करता है, तो अमेरिका और उसके सहयोगियों को और अधिक इंटरसेप्टर तैनात करने होंगे. यानी यह सिर्फ आक्रामक हमलों का मामला नहीं है - रक्षात्मक क्षमता बनाए रखना भी उतना ही महंगा और संसाधन-गहन है.
चीन की चुनौती: असली परीक्षा
Center for Strategic and International Studies (CSIS) की रिपोर्ट के अनुसार, यदि अमेरिका चीन के साथ सीधे संघर्ष में उलझता है, तो केवल तीन हफ्तों में 5,000 लंबी दूरी की मिसाइलें खर्च हो सकती हैं. ऐसी स्थिति में वर्तमान उत्पादन क्षमता और मौजूदा स्टॉक अपर्याप्त साबित हो सकते हैं. अमेरिका का रक्षा औद्योगिक आधार पहले से ही तनाव में है. उत्पादन बढ़ाने में समय, संसाधन और राजनीतिक इच्छाशक्ति - तीनों की आवश्यकता है.
ट्रंप का दावा हो सकता है कि अमेरिका के पास “लगभग असीमित” हथियार हैं, लेकिन सार्वजनिक आंकड़े और विश्लेषण बताते हैं कि मिसाइल भंडार धीरे-धीरे घट रहा है. अमेरिका की मिसाइलें एक ही दिन में खत्म नहीं होंगी, लेकिन यदि मौजूदा युद्ध लंबे समय तक चलते हैं और नए मोर्चे खुलते हैं, तो दबाव निश्चित रूप से बढ़ेगा.
ईरान के साथ जारी संघर्ष, यूक्रेन युद्ध, रेड सी ऑपरेशन और संभावित चीन टकराव - ये सभी मिलकर अमेरिकी मिसाइल भंडार और उत्पादन क्षमता पर भारी दबाव डाल रहे हैं. ऐसे में रणनीतिक संतुलन का सवाल केवल सैन्य ताकत का नहीं, बल्कि औद्योगिक क्षमता, आर्थिक संसाधन और कूटनीतिक विवेक का भी है.
युद्ध अनिश्चित काल तक लड़े जा सकते हैं - जैसा कि ट्रंप कहते हैं - लेकिन हथियारों की फैक्ट्री, बजट और वैश्विक संतुलन की अपनी सीमाएं होती हैं. अमेरिका के सामने असली चुनौती यही है: क्या वह अपनी सैन्य शक्ति को बनाए रखते हुए दीर्घकालिक स्थिरता सुनिश्चित कर पाएगा, या लगातार युद्ध उसके संसाधनों को धीरे-धीरे खोखला कर देंगे?