क्या है अमेरिका की SEAL Team 6? जिसने पहले ओसामा का किया काम तमाम, अब ईरान से बचा लाई पायलट
मिडिल ईस्ट में जारी जंग के बीच अमेरिका ने ईरान में घुसकर अपने घायल पायलट को सुरक्षित वहां से निकाल लिया. अमेरिका का ये बड़ा कारनामा दुनियाभर में चर्चा का विषय बन गया है.
SEAL Team 6
(Image Source: X/ @Mary_Flynn17, @redpillb0t )मिडिल ईस्ट में जारी जंग के बीच अमेरिका ने ईरान में घुसकर अपने घायल पायलट को सुरक्षित वहां से निकाल लिया. अमेरिका का ये बड़ा कारनामा दुनियाभर में चर्चा का विषय बन गया है. हर कोई ये जानना चाहता है कि कैसे अमेरिका ने इस ऑपरेशन को अंजाम दिया और कौनसी स्पेशल फोर्स ईरान में घुसकर पायलट को बचाकर लाई. तो आपको बता दें, साल 2011 में एबटाबाद में ओसामा बिन लादेन को मार गिराने वाली SEAL टीम 6 ने ही इस ऑपरेशन को अंजाम दिया है.
3 अप्रैल को शुरू हुई इस घटना ने जल्द ही एक हाई-रिस्क सैन्य अभियान का रूप ले लिया. एक F-15E स्ट्राइक ईगल के मार गिराए जाने के बाद शुरू हुआ यह मिशन केवल एक रेस्क्यू ऑपरेशन नहीं था, बल्कि तकनीक, रणनीति और साहस का अभूतपूर्व प्रदर्शन बन गया.
क्या है अमेरिका की SEAL टीम 6?
अमेरिका की सबसे खतरनाक और अत्याधुनिक विशेष बल इकाइयों में शामिल सील टीम सिक्स को दुनिया की सबसे प्रभावशाली कमांडो यूनिट्स में गिना जाता है. साल 1980 में गठित यह यूनिट भले ही प्रशासनिक रूप से अमेरिकी नेवी का हिस्सा हो, लेकिन इसके ऑपरेशन का नियंत्रण ज्वाइंट स्पेशल ऑपरेशंस कमांड (JSOC) के अधीन होता है. इसकी भूमिका इतनी संवेदनशील और महत्वपूर्ण होती है कि इसे “टियर वन” स्पेशल मिशन यूनिट का दर्जा दिया गया है.
सील टीम सिक्स का हिस्सा बनना बेहद कठिन माना जाता है. इसके लिए सैनिकों को एक बेहद सख्त चयन प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है, जिसमें शारीरिक क्षमता, मानसिक मजबूती और रणनीतिक सोच की कड़ी परीक्षा ली जाती है. चयन के बाद भी ट्रेनिंग खत्म नहीं होती। कमांडो को लगातार उन्नत प्रशिक्षण दिया जाता है, ताकि वे किसी भी चुनौतीपूर्ण परिस्थिति में खुद को ढाल सकें
कब शुरू हुआ मिशन?
यह पूरी घटना तब शुरू हुई जब अमेरिकी F-15E स्ट्राइक ईगल विमान को मार गिराया गया. यह चल रहे युद्ध में नष्ट हुआ पहला अमेरिकी लड़ाकू विमान था. विमान में सवार दोनों चालक दल के सदस्य इजेक्ट करने में सफल रहे. जहां पायलट को तुरंत सुरक्षित निकाल लिया गया, वहीं हथियार प्रणाली अधिकारी पहाड़ों में लापता हो गया, जिससे एक बड़े रेस्क्यू ऑपरेशन की नींव पड़ी.
लापता अधिकारी ने 24 घंटे से अधिक समय तक दुश्मन के बीच जीवित रहने के लिए संघर्ष किया. उसके पास केवल एक पिस्तौल, एन्क्रिप्टेड ट्रैकिंग बीकन और एसईआरई प्रशिक्षण का अनुभव था. वह 7,000 फीट ऊंची पहाड़ी पर चढ़ गया, चट्टानों की दरारों में छिपा और लगातार अपनी लोकेशन बदलता रहा, ताकि दुश्मन की नजरों से बच सके. इस ऑपरेशन में सैकड़ों विशेष बलों के सैनिक, दर्जनों युद्धक विमान और हेलीकॉप्टर शामिल थे. साइबर, अंतरिक्ष और खुफिया संसाधनों को एक साथ जोड़ा गया, ताकि मिशन को सफल बनाया जा सके.
CIA और इजरायल कैसे ईरान को भटकाया?
इस मिशन में खुफिया एजेंसियों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. सीआईए ने एक भ्रामक अभियान चलाकर ईरानी बलों को गुमराह किया कि वायुसैनिक पहले ही भाग चुका है. इजरायली खुफिया एजेंसियों ने जमीन पर हो रही हर गतिविधि की निगरानी की, जबकि इजरायली वायु सेना ने 36 घंटे तक अपने हमले रोककर एक सुरक्षित बचाव मार्ग तैयार किया.