Iran के आसमान पर कब्जे का दावा, ट्रंप की चेतावनी और जंग का नया मोड़..जानिए व्हाइट हाउस की कहीं 5 बड़ी बातें

मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका ने ईरान को लेकर बड़ा दावा किया है. व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने कहा कि आने वाले कुछ घंटों में अमेरिकी सेना ईरान के आसमान पर “पूरी तरह से नियंत्रण” हासिल कर सकती है.

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Edited By :  समी सिद्दीकी
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US-Iran-Israel War: मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका ने बड़ा दावा किया है. व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने कहा कि अगले कुछ घंटों में अमेरिका को ईरान के हवाई क्षेत्र पर पूरी पकड़ मिल जाएगी. इससे पहले अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने भी कहा था कि अमेरिका ने अपने नागरिकों और सहयोगियों की सुरक्षा के लिए कोई कमी नहीं छोड़ी है और हर क्षमता का इस्तेमाल किया जा रहा है.

कैरोलिन लेविट ने प्रेस ब्रीफिंग में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की तारीफ करते हुए कहा कि ट्रंप अपने पूर्व नेताओं की तरह सिर्फ बातें नहीं करते. उन्होंने कहा कि ट्रंप धमकी देते हैं तो उसे पूरा भी करते हैं. अमेरिकी अधिकारियों ने इस दौरान पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा की भी आलोचना की और कहा कि उन्होंने ईरान के साथ शांति वार्ता की थी.

आइये जानते हैं इस प्रेस ब्रीफिंग की 5 अहम बातें

  • ईरानी हवाई क्षेत्र पर पूरी पकड़ का दावा

लेविट ने कहा कि अगले कुछ घंटों में अमेरिका ईरान के हवाई क्षेत्र पर पूरी तरह नियंत्रण हासिल कर लेगा. उन्होंने कहा, “हम उम्मीद करते हैं कि जल्द ही ईरान के आसमान पर हमारी पूरी और पूर्ण पकड़ होगी, जिससे हमारे बहादुर सैनिक अपने मिशन को आगे बढ़ा सकेंगे.” उनका कहना था कि ईरान लगातार मध्य पूर्व में अमेरिका के सहयोगी देशों, खासकर खाड़ी देशों, पर हमले कर रहा है और अमेरिकी सैन्य ढांचे को निशाना बना रहा है.

  • ट्रंप ब्लफ नहीं करते

लेविट ने कहा कि आतंकवादी संगठनों को लगा था कि ट्रंप भी अपने पूर्व नेताओं की तरह सिर्फ बातें करेंगे और अपनी चेतावनियों को लागू नहीं करेंगे. लेकिन यह उनकी बड़ी गलती साबित हुई. उन्होंने कहा कि ट्रंप ने कूटनीति के बजाय सैन्य कार्रवाई का रास्ता चुना और उनके साथ दुनिया के सबसे ताकतवर सैनिक खड़े हैं. लेविट ने कहा कि जब ट्रंप धमकी देते हैं तो वह सिर्फ बयान नहीं होता, बल्कि उसे लागू भी किया जाता है.

  • मारे गए अमेरिकी सैनिकों को सम्मान के साथ लाया जाएगा

लेविट ने बताया कि कुवैत के शुआइबा बंदरगाह पर ईरानी हमलों में छह अमेरिकी सैनिक मारे गए हैं. उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप इन सैनिकों के पार्थिव शरीर को सम्मान के साथ अमेरिका लाने की प्रक्रिया में शामिल होना चाहते हैं. उन्होंने कहा कि ट्रंप इन सैनिकों के परिवारों के साथ खड़े रहेंगे. पेंटागन अभी इस प्रक्रिया की तारीख तय करने पर काम कर रहा है. मारे गए सैनिकों के पार्थिव शरीर को अमेरिका के डेलावेयर स्थित डोवर एयर फोर्स बेस लाया जाएगा.

  • ईरान ने शांति का रास्ता नहीं चुना

लेविट ने कहा कि ट्रंप ने कूटनीतिक रास्ता भी खुला रखा था, लेकिन ईरान ने शांति के प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया. उनके अनुसार ईरान का मुख्य लक्ष्य परमाणु हथियार बनाना है, ताकि वह अमेरिका और उसके सहयोगियों को धमका सके. उन्होंने कहा कि ईरान ने शांति का रास्ता इसलिए ठुकराया क्योंकि वहां की सत्ता में बैठे लोग परमाणु हथियार बनाना चाहते थे. हालांकि इससे पहले ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई ने कहा था कि ईरान परमाणु बम नहीं बना रहा है और इस्लाम में सामूहिक विनाश के हथियारों की इजातत नहीं है।

  • स्कूल पर हमले के सवाल पर अमेरिका का जवाब

दक्षिणी ईरान में एक लड़कियों के प्राथमिक स्कूल पर हुए हमले के बारे में जब सवाल पूछा गया तो लेविट ने कहा कि यह ईरानी प्रचार भी हो सकता है. हालांकि उन्होंने इसे पूरी तरह खारिज भी नहीं किया. ईरानी सरकारी मीडिया के अनुसार मिनाब शहर में हुए इस हमले में 100 से ज्यादा लोगों की मौत हुई थीं.

लेविट ने कहा कि अमेरिका ईरान की सरकार को निशाना बना रहा है, जिसे उन्होंने 'दुष्ट शासन' बताया. उनका कहना था कि ईरान प्रचार का इस्तेमाल बहुत प्रभावी तरीके से करता है और कई लोग उस प्रचार पर विश्वास कर लेते हैं. उन्होंने कहा कि नागरिकों को निशाना बनाना अमेरिकी सेना की नीति नहीं है और ऐसे मामलों में अमेरिका पर सीधे आरोप लगाने से पहले सावधानी बरतनी चाहिए.

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