महंगे तेल से लेकर वर्ल्ड वार तक: अगर अमेरिका ने ईरान पर किया हमला तो क्या हो सकते हैं नतीजे?

US-Iran Conflict: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव तेल, सुरक्षा और वैश्विक राजनीति को हिला सकता है. सात संभावित परिदृश्य बताते हैं आगे क्या हो सकता है.

( Image Source:  Sora AI )
Edited By :  प्रवीण सिंह
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US-Iran Conflict: अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर खतरनाक मोड़ पर पहुंचता दिख रहा है. मध्य-पूर्व में अमेरिकी सैन्य मौजूदगी बढ़ाई जा रही है और कूटनीतिक बातचीत ठप पड़ती नजर आ रही है. अगर हालात ऐसे ही रहे और वॉशिंगटन ने सैन्य कार्रवाई का रास्ता चुना, तो इसके असर सिर्फ ईरान तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि पूरा पश्चिम एशिया और दुनिया की राजनीति-इकोनॉमी हिल सकती है.

BBC ने अपनी एक विस्तृत विश्लेषण रिपोर्ट में ऐसे सात संभावित सिनैरियो यानी हालातों का जिक्र किया है, जो भविष्य की दिशा तय कर सकते हैं. नीचे हम इन्हीं सात संभावनाओं को विस्तार से समझते हैं, ताकि यह साफ हो सके कि अगर अमेरिका हमला करता है, तो आगे क्या-क्या हो सकता है.

1. सीमित हमले और सत्ता परिवर्तन की उम्मीद

सबसे पहला यह है कि अमेरिका ईरान पर सीमित और टारगेटेड हमले करे. इनमें ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) के ठिकाने, मिसाइल बेस और परमाणु कार्यक्रम से जुड़े ठिकाने निशाने पर लिए जा सकते हैं. इस स्थिति में ईरान की मौजूदा सत्ता कमजोर पड़ सकती है और लंबे समय में राजनीतिक बदलाव की संभावना बन सकती है. कुछ विश्लेषकों का मानना है कि इससे लोकतांत्रिक ताकतों को उभरने का मौका मिल सकता है. लेकिन इतिहास इसके उलट उदाहरण भी देता है. इराक और लीबिया में पश्चिमी हस्तक्षेप से तानाशाह तो हटे, लेकिन उसके बाद वर्षों तक अराजकता और गृहयुद्ध चला. इसलिए यह कहना मुश्किल है कि ईरान में बदलाव स्थिरता लाएगा या नई अस्थिरता.

2. सत्ता बनी रहे, लेकिन नीति बदले

हमले के बावजूद ईरान की सत्ता गिरने के बजाय अपनी नीतियों में नरमी दिखाए. इसका मतलब हो सकता है कि ईरान क्षेत्रीय मिलिशिया समूहों को समर्थन कम करे, मिसाइल और परमाणु गतिविधियों पर कुछ हद तक रोक लगाए और घरेलू दमन को थोड़ा कम करे. रिपोर्ट इसे “वेनेजुएला मॉडल” जैसा बताती है, जहां बाहरी दबाव से सत्ता तो नहीं बदली, लेकिन कुछ सीमित बदलाव हुए. हालांकि, ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई के नेतृत्व में बना तंत्र दशकों से बाहरी दबावों का सामना करता आया है. इसलिए बड़े सुधार की संभावना कम ही मानी जा रही है.

3. सेना का राज आए

तीसरा विकल्प ज्यादा खतरनाक है. अगर हमलों से मौजूदा व्यवस्था कमजोर हो जाए और जनता का आंदोलन सत्ता संभाल न पाए, तो सुरक्षा बल सत्ता अपने हाथ में ले सकते हैं. ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स राजनीति और अर्थव्यवस्था में पहले से गहरी पैठ रखती हैं. ऐसे में अराजकता की स्थिति में सैन्य शासन उभर सकता है. अब तक ईरान में हुए विरोध प्रदर्शनों में बड़े पैमाने पर सत्ता के अंदर से टूट-फूट नहीं हुई है. शासक वर्ग ने बल प्रयोग से नियंत्रण बनाए रखा है. इसलिए सैन्य शासन की संभावना को पूरी तरह खारिज नहीं किया जा सकता.

4. ईरान का जवाबी हमला

ईरान पहले ही चेतावनी दे चुका है कि अगर उस पर हमला हुआ, तो वह जवाब देगा. उसकी भाषा में, “उंगली ट्रिगर पर है.” ईरान अमेरिका के ठिकानों पर बैलिस्टिक मिसाइल और ड्रोन हमले कर सकता है, खासकर बहरीन और कतर जैसे देशों में मौजूद अमेरिकी अड्डों पर. इसके अलावा, वह इज़राइल या जॉर्डन जैसे देशों को भी निशाना बना सकता है, जिन्हें वह अमेरिका का समर्थक मानता है. खाड़ी देशों को डर है कि अमेरिकी कार्रवाई का बदला उनकी जमीन पर लिया जा सकता है, जिससे पूरा इलाका युद्ध क्षेत्र बन सकता है.

5. होरमुज़ जलडमरूमध्य में संकट

पांचवां परिदृश्य वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए सबसे बड़ा झटका हो सकता है. ईरान Strait of Hormuz में जहाजों की आवाजाही बाधित कर सकता है. यह संकरा समुद्री रास्ता ईरान और ओमान के बीच है और दुनिया का लगभग 20% तेल और गैस इसी रास्ते से गुजरता है. अगर ईरान यहां समुद्री सुरंगें बिछा दे या जहाजों को रोकने लगे, तो तेल की कीमतें आसमान छू सकती हैं और वैश्विक ऊर्जा बाजार डगमगा सकता है. हालांकि, ऐसा करने से ईरान को भी नुकसान होगा, क्योंकि उसकी अपनी अर्थव्यवस्था तेल निर्यात पर निर्भर है.

6. खाड़ी में नौसैनिक टकराव

एक और आशंका यह है कि खाड़ी क्षेत्र में अमेरिका और ईरान की नौसेनाएं आमने-सामने आ जाएं. अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, सबसे बड़ा खतरा “स्वार्म अटैक” का है, जिसमें ड्रोन और तेज रफ्तार नौकाएं एक साथ किसी जहाज पर हमला कर दें. हालांकि इसकी संभावना कम मानी जाती है, लेकिन अगर किसी अमेरिकी युद्धपोत को गंभीर नुकसान पहुंचा या वह डूब गया, तो तनाव विस्फोटक स्तर पर पहुंच जाएगा. अमेरिका के पास इस क्षेत्र में दो बड़े विमानवाहक पोत समूह मौजूद हैं, जिनमें USS Gerald R Ford भी शामिल है.

7. सत्ता गिरे, अराजकता फैले

सबसे भयावह स्थिति यह होगी कि ईरान की मौजूदा सरकार गिर जाए, लेकिन उसकी जगह कोई मजबूत सत्ता न उभरे. करीब 9.3 करोड़ आबादी वाले ईरान में कुर्द, बलूच और अजरबैजानी जैसे जातीय समूह अपने-अपने इलाकों को बचाने के लिए अलग रास्ता अपना सकते हैं. इससे गृहयुद्ध जैसी स्थिति बन सकती है और पड़ोसी देशों को शरणार्थियों की बड़ी लहर का सामना करना पड़ सकता है.

वैश्विक राजनीति पर असर

अगर अमेरिका, ईरान पर हमला करता है, तो इसका असर केवल मध्य-पूर्व तक सीमित नहीं रहेगा.

  • रूस और चीन जैसी शक्तियां प्रतिक्रिया दे सकती हैं
  • तेल कीमतें बढ़ सकती हैं
  • वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता फैल सकती है

यानी यह टकराव एक क्षेत्रीय युद्ध से कहीं बड़ा रूप ले सकता है.

ईरान पर अमेरिकी हमले की स्थिति में कोई एक निश्चित नतीजा नहीं है. सातों परिदृश्य अलग-अलग रास्तों की ओर इशारा करते हैं - कहीं सीमित संघर्ष, कहीं बड़े युद्ध का खतरा और कहीं सत्ता परिवर्तन के बाद अराजकता. इतिहास बताता है कि मध्य-पूर्व में बाहरी सैन्य हस्तक्षेप अक्सर अपेक्षित नतीजे नहीं देता. ऐसे में अगर अमेरिका और ईरान के बीच टकराव होता है, तो उसके असर दशकों तक महसूस किए जा सकते हैं. दुनिया की निगाहें अब इसी सवाल पर टिकी हैं कि क्या कूटनीति आखिरी वक्त पर कोई रास्ता निकालेगी, या फिर यह संकट युद्ध की ओर बढ़ेगा?

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