सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद भी नहीं माने ट्रंप, लगा दिया 10% टैरिफ; जानें अब तक के बड़े अपडेट
सुप्रीम कोर्ट के टैरिफ रद्द करने के फैसले के बाद डोनाल्ड ट्रंप ने 10 फीसद ग्लोबल टैरिफ साइन कर दिया है. उन्होंने अपने सोशल मीडिया अकाउंट से इस बारे में जानकारी दी है.
Donald Trump 10 percent Tarrif: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अमेरिका में आयात होने वाले सामानों पर 10 फीसद टैरिफ लगाने का आदेश जारी किया. सुप्रीम कोर्ट ने उनके अधिक मात्रा में और अचानक लगाए गए टैरिफ को रद्द कर दिया था, जिसे उनकी अहम आर्थिक नीति के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है.
ट्रंप ने ओवल ऑफिस में इस टैरिफ आदेश पर हस्ताक्षर किए. उन्होंने सोशल मीडिया पर कहा कि यह फैसला लगभग तुरंत प्रभाव से लागू होगा. पिछले एक साल में ट्रंप ने कई देशों चाहे दोस्त हों या विरोधी सभी पर अलग-अलग दरों से टैरिफ लगाए थे, ताकि उन पर दबाव बनाया जा सके.
ट्रंप ने क्या किया पोस्ट?
ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट से लिखा,"यह मेरे लिए बहुत सम्मान की बात है कि मैंने अभी-अभी ओवल ऑफिस से सभी देशों पर ग्लोबल 10% टैरिफ पर साइन किया है, जो लगभग तुरंत लागू होगा. इस पर ध्यान देने के लिए धन्यवाद.
क्या पहले लगने वाली इंपोर्ट ड्यूटी रहेंगे जारी?
10 फीसद टैरिफ लागू करने के साथ ही राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि वह सेक्शन 301 और सेक्शन 232 के तहत पहले से लगी इंपोर्ट ड्यूटी को भी जारी रखेंगे. इसके साथ ही ट्रंप ने अमेरिकी ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव (USTR) के कार्यालय को सेक्शन 301 के तहत जांच शुरू करने का निर्देश दिया है.
क्या कहता है सेक्शन 301?
सेक्शन 301 के तहत टैरिफ लगाने से पहले संबंधित देश के खिलाफ विशेष जांच करनी होती है. इसमें सुनवाई की प्रक्रिया और प्रभावित कंपनियों या देशों को अपनी बात रखने का मौका दिया जाता है. अधिकारियों को यह निष्कर्ष निकालना होता है कि संबंधित देश ने किसी व्यापार समझौते का उल्लंघन किया है या ऐसी नीतियां अपनाई हैं जिससे अमेरिकी व्यापार को नुकसान पहुंचा है. इसके बाद ही टैरिफ लगाया जा सकता है.
राष्ट्रपति ने शुक्रवार को पहले संकेत दिया था कि जब तक 10 प्रतिशत की आधार दर लागू रहेगी, तब तक ये जांच जारी रह सकती हैं. बाद में ये जांच फ्लैट 10 प्रतिशत दर की जगह ले सकती हैं. हालांकि उन्होंने यह साफ नहीं किया कि क्या वह सेक्शन 122 के तहत लगाए गए शुल्क को आगे भी बढ़ाएंगे या नहीं.
ब्लूमबर्ग इकोनॉमिक्स के अनुमान के मुताबिक, 10 प्रतिशत का वैश्विक शुल्क लागू होने से अमेरिका की औसत प्रभावी टैरिफ दर 13.6 प्रतिशत से बढ़कर 16.5 प्रतिशत तक जा सकती है. हालांकि अगर मौजूदा छूट (एक्सेम्प्शन) जारी रहती हैं, तो यह दर घटकर 11.4 प्रतिशत भी हो सकती है.
ट्रंप के टैरिफ पर सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा था?
सुप्रीम कोर्ट में कंजर्वेटिव बहुमत वाली पीठ ने 6-3 के फैसले में कहा था कि 1977 का वह कानून, जिसके तहत ट्रंप अलग-अलग देशों पर अचानक टैरिफ लगा रहे थे, राष्ट्रपति को इस तरह का अधिकार नहीं देता. यह कानून इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट (IEEPA) है.
दिलचस्प बात यह है कि जिन जजों ने ट्रंप के फैसले को खारिज किया, उनमें से दो को ट्रंप ने ही नामित किया था. फैसले के बाद ट्रंप ने बिना सबूत के आरोप लगाया कि अदालत पर विदेशी हितों का असर हो सकता है.
टैरिफ हटाने के बाद क्या बोले ट्रंप?
ट्रंप ने पत्रकारों से कहा,"मैं अदालत के कुछ मेंबर्स से शर्मिंदा हूं. उनमें हमारे देश के लिए सही काम करने का साहस नहीं है." उन्होंने यह भी कहा,"अपने देश की रक्षा के लिए राष्ट्रपति पहले से ज्यादा टैरिफ लगा सकता है. इस फैसले से मैं और ज्यादा ताकतवर हुआ हूं.
किन सेक्टर्स को कवर नहीं करता SC का ये फैसला?
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले का असर उन सेक्टर-विशेष टैरिफ पर नहीं पड़ा, जो ट्रंप ने स्टील, एल्युमिनियम और अन्य वस्तुओं पर अलग से लगाए थे. सरकार की ओर से चल रही जांच के बाद कुछ और सेक्टोरल टैरिफ भी लगाए जा सकते हैं. हालांकि, व्हाइट हाउस लौटने के 13 महीने बाद यह ट्रंप के लिए सुप्रीम कोर्ट में अब तक की सबसे बड़ी हार मानी जा रही है.
शुक्रवार के फैसले में जजों ने कहा कि अगर कांग्रेस राष्ट्रपति को टैरिफ लगाने जैसी 'असाधारण शक्ति' देना चाहती, तो वह इसे कानून में साफ तौर पर लिखती, जैसा कि दूसरे टैरिफ कानूनों में किया गया है. मुख्य न्यायाधीश जॉन रॉबर्ट्स ने अपने फैसले में कहा,"IEEPA में टैरिफ या शुल्क का कोई जिक्र नहीं है."
SC के फैसले का क्या हुआ असर?
फैसले के बाद वॉल स्ट्रीट में शेयर बाजार में हल्की बढ़त देखी गई. व्यापार संगठनों ने इस फैसले का स्वागत किया. नेशनल रिटेल फेडरेशन ने कहा कि इससे कंपनियों को “बहुत जरूरी स्पष्टता” मिली है.
क्या रिफंड देंगे डोनाल्ड ट्रंप?
अदालत में ट्रंप प्रशासन ने कहा था कि अगर टैरिफ गैरकानूनी पाए गए तो कंपनियों को रिफंड दिया जाएगा. लेकिन सुप्रीम कोर्ट के फैसले में इस मुद्दे पर कोई टिप्पणी नहीं की गई. ट्रंप ने कहा कि रिफंड देने को लेकर कई सालों तक कानूनी लड़ाई चल सकती है. जस्टिस ब्रेट कैवनॉ, जो ट्रंप के नामित जज थे और इस मामले में उनके पक्ष में थे, ने कहा कि रिफंड की प्रक्रिया 'काफी उलझन भरी' हो सकती है.