'ट्रंप का रेसिप्रोकल टैरिफ गलत', सुप्रीम कोर्ट ने इसे गैरकानूनी ठहराया; US राष्ट्रपति को तगड़ा झटका
अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को उनके द्वारा लगाए गए वैश्विक टैरिफ को असंवैधानिक करार दिया. कोर्ट ने स्पष्ट किया कि ट्रंप ने आपातकालीन शक्तियों का दुरुपयोग करते हुए व्यापारिक सहयोगियों पर व्यापक टैरिफ लगाने का अधिकार नहीं था.
अमेरिका में शुक्रवार को इतिहासिक फैसला सुनाया गया जब सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए टैरिफ को अवैध घोषित कर दिया. कोर्ट ने कहा कि ट्रंप ने राष्ट्रीय आपातकालीन परिस्थितियों में लागू होने वाले कानून का गलत तरीके से इस्तेमाल करते हुए व्यापक टैरिफ लगाए. यह फैसला अमेरिकी अर्थव्यवस्था और राजनीतिक परिदृश्य में बड़ा झटका साबित हुआ.
इस फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि संविधान के तहत टैक्स और टैरिफ लगाने का अधिकार कांग्रेस को है, राष्ट्रपति को नहीं. ट्रंप ने आर्थिक और विदेशी नीति के लिए टैरिफ को एक प्रमुख उपकरण के रूप में इस्तेमाल किया था, लेकिन अब कोर्ट की सख्त टिप्पणी ने उनके इस कदम को चुनौती दी है.
सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप के टैरिफ पर क्या निर्णय लिया?
जवाब: कोर्ट ने शुक्रवार को टैरिफ को अवैध घोषित करते हुए कहा कि ट्रंप ने अपनी शक्ति से अधिक काम किया. अदालत ने बताया कि टैरिफ लगाने का प्रयास 1977 के International Emergency Economic Powers Act (IEEPA) के तहत किया गया था, जो केवल राष्ट्रीय आपातकाल में उपयोग के लिए था.
सुप्रीम कोर्ट ने क्यों कहा कि ट्रंप ने कानून का उल्लंघन किया?
कोर्ट ने निर्णय में कहा कि 'अगर कांग्रेस ने IEEPA के तहत टैरिफ लगाने की असाधारण शक्ति देना चाहा होता, तो वह स्पष्ट रूप से ऐसा करती, जैसा उसने अन्य टैरिफ कानूनों में किया है.' इस फैसले में कोर्ट ने ट्रंप के कदम को संविधान और कानून के खिलाफ बताया.
अमेरिकी संविधान के अनुसार टैरिफ लगाने का अधिकार किसे है?
अमेरिकी संविधान स्पष्ट करता है कि टैक्स और टैरिफ लगाने का अधिकार केवल कांग्रेस को है, राष्ट्रपति को नहीं. ट्रंप ने टैरिफ को अमेरिकी अर्थव्यवस्था और सुरक्षा के लिए आवश्यक बताया, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इसे असंगत और गैरकानूनी करार दिया.
ट्रंप ने टैरिफ क्यों लगाया था?
रिपब्लिकन नेता ट्रंप ने टैरिफ को अमेरिका की आर्थिक सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण बताया था. उन्होंने कहा था कि इन टैरिफ के बिना देश बिना सुरक्षा और आर्थिक रूप से तबाह हो जाएगा. हालांकि कोर्ट ने उनके इस तर्क को खारिज करते हुए कानून की सीमा बताई.




