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ईरान पर होगा हमला? अमेरिका ने मिडिल ईस्ट में की 2003 के बाद की सबसे बड़ी सैन्य तैनाती, ट्रंप का प्लान जान उड़ जाएंगे खामेनेई के होश

अमेरिका ने मिडिल ईस्ट में बड़े पैमाने पर लड़ाकू विमान और युद्धपोत तैनात कर दिए हैं, जिससे ईरान के साथ युद्ध की आशंका बढ़ गई है. अगर हमला होता है तो यह छोटा ऑपरेशन नहीं, बल्कि कई हफ्तों तक चलने वाला बड़ा युद्ध हो सकता है. हालांकि बातचीत भी जारी है, इसलिए अभी अंतिम फैसला नहीं हुआ है.

ईरान पर होगा हमला? अमेरिका ने मिडिल ईस्ट में की 2003 के बाद की सबसे बड़ी सैन्य तैनाती, ट्रंप का प्लान जान उड़ जाएंगे खामेनेई के होश
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Iran US Tension: मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका ने अपनी सबसे बड़ी सैन्य तैनाती कर दी है, जो 2003 के इराक युद्ध के बाद पहली बार इतनी बड़े पैमाने पर देखी जा रही है, रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका ने अत्याधुनिक F-35 Lightning II और F-22 Raptor जैसे लड़ाकू विमानों के साथ सपोर्ट एयरक्राफ्ट भी मध्य पूर्व की ओर भेजे हैं. यह कदम ईरान के साथ बढ़ते टकराव और संभावित युद्ध की आशंका के बीच उठाया गया है.

बताया जा रहा है कि अगर अमेरिका सैन्य कार्रवाई करता है, तो यह सीमित हमले के बजाय कई हफ्तों तक चलने वाला व्यापक अभियान हो सकता है. तनाव की शुरुआत ईरान में महंगाई के खिलाफ हुए विरोध प्रदर्शनों से हुई, जो बाद में सरकार विरोधी आंदोलन में बदल गए. इसके बाद सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के नेतृत्व वाली सरकार ने प्रदर्शनकारियों पर सख्ती की, जिससे अमेरिका की नाराजगी और बढ़ गई.

ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई

अमेरिका ने क्यों बड़े पैमाने पर की सैन्य तैनाती?

रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम और मिसाइल क्षमता को लेकर कड़ा रुख अपनाया है. इसी के चलते अमेरिकी सेना ने क्षेत्र में दो विमानवाहक पोत-USS Abraham Lincoln और USS Gerald R. Ford—तैनात किए हैं. इनके साथ इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर विमान, कमांड-एंड-कंट्रोल सिस्टम और मिसाइल डिफेंस सिस्टम भी भेजे गए हैं, जो बड़े पैमाने पर हवाई हमले की क्षमता देते हैं.

USS Gerald R. Ford Warship

ट्रंप के सामने क्या है विकल्प?

अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, राष्ट्रपति ट्रंप के पास कई सैन्य विकल्प हैं, जैसे ईरान के परमाणु और बैलिस्टिक मिसाइल ठिकानों पर हवाई हमले, राजनीतिक और सैन्य नेताओं की हत्या या फिर बड़े स्तर पर अभियान चलाकर ईरानी नेतृत्व और उसके क्षेत्रीय सहयोगियों को निशाना बनाना. हालांकि, अभी तक अंतिम फैसला नहीं लिया गया है. इसी बीच जिनेवा में अमेरिका और ईरान के प्रतिनिधियों के बीच परमाणु कार्यक्रम को लेकर बातचीत भी जारी है, जिसमें कुछ प्रगति जरूर हुई है, लेकिन कई मुद्दों पर मतभेद बने हुए हैं.

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