Trump ने शेयर किया Shahbaz का न्योता, जंग अब अंजाम के करीब! क्या Pakistan बनेगा सबसे बड़ा पीस ब्रोकर?

Donald Trump द्वारा Shehbaz Sharif के निमंत्रण को शेयर करने के बाद US-ईरान टकराव के बीच नई कूटनीतिक हलचल तेज हो गई है. ट्रंप ने सीधे तौर पर संकेत दे दिया है कि पाकिस्तान ईरान अमेरिका और इजराइल के बीच सुलह में अहम भूमिका निभाने वाला है.

( Image Source:  @ZaryabAhmadPk1 )
Edited By :  समी सिद्दीकी
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Iran War Peace Talk: अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने मंगलवार को साफ संकेत दिए कि ईरान के साथ युद्ध खत्म करने के लिए बातचीत पाकिस्तान में हो सकती है. पहले इस बात का केवल अंदाजा लगाया जा रहा था, हालांकि अब ये बात पुख्ता हो गई है कि पाकिस्तान इस जंग को रोकने में अहम रोल निभा सकता है.डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री Shehbaz Sharif के निमंत्रण का स्क्रीनशॉट भी साझा किया.

प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने मंगलवार शाम X पर लिखा कि अगर अमेरिका और ईरान सहमत होते हैं, तो पाकिस्तान इस चल रहे संघर्ष के व्यापक समाधान के लिए सार्थक और निर्णायक बातचीत की मेजबानी करने के लिए तैयार है. ट्रंप ने एक घंटे के भीतर इस पोस्ट का स्क्रीनशॉट लेकर अपने Truth Social अकाउंट पर शेयर कर दिया. यह ट्रंप के रुख में बड़ा बदलाव माना जा रहा है, क्योंकि इससे पहले वे बार-बार दावा कर रहे थे कि अमेरिका पहले ही युद्ध जीत चुका है.

क्या जंग रोकने में पाकिस्तान निभाएगा अहम रोल?

रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका के उपराष्ट्रपति JD Vance भी इस बातचीत के लिए इस्लामाबाद जा सकते हैं. सोमवार को ट्रंप द्वारा पहली बार बातचीत की बात कहने के लगभग 12 घंटे बाद ही पाकिस्तान संभावित मेजबान के रूप में उभरकर सामने आ गया था.

ईरान का क्या है रुख?

ईरान के विदेश मंत्रालय ने शुरुआत में ट्रंप के इन दावों का मजाक उड़ाया था कि बैकचैनल बातचीत पहले से चल रही है. लेकिन बाद में ईरान ने माना कि उसे कुछ दोस्त देशों से संदेश मिले हैं, जिनमें अमेरिका की ओर से युद्ध खत्म करने के लिए बातचीत की इच्छा जताई गई है.

कौन करेगा ईरान का प्रतिनिधित्व?

अब तक यह स्पष्ट नहीं है कि अगर बातचीत होती है तो ईरान की ओर से कौन प्रतिनिधित्व करेगा. हालांकि, संसद अध्यक्ष Mohammad Bagher Ghalibaf को तेहरान की ओर से संभावित प्रतिनिधि माना जा रहा है, हालांकि उनका सार्वजनिक रुख अभी भी सख्त बना हुआ है.

अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ट्रंप के मुख्य वार्ताकार स्टीव विटकॉफ और उनके दामाद जेरेड कुशनर जल्द ही पाकिस्तान में ईरानी प्रतिनिधिमंडल से बातचीत कर सकते हैं. यह मुलाकात इस सप्ताह ही होने की संभावना जताई जा रही है और इसका स्थान राजधानी इस्लामाबाद हो सकता है.

क्या ईरान से बात कर रहा है पाकिस्तान?

इस बीच, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने बताया कि उन्होंने ईरान के राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian से बात की है. पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार ने भी कहा कि उनकी ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची से बातचीत हुई है.

रिपोर्ट्स में यह भी कहा जा रहा है कि पाकिस्तान के सेना प्रमुख Asim Munir की भी इस प्रक्रिया में अहम भूमिका हो सकती है. पाकिस्तान के ओमान में पूर्व राजदूत इमरान अली चौधरी ने एक टीवी चैनल से कहा कि असिम मुनीर ने करीब दो से ढाई हफ्ते पहले, यानी युद्ध के दौरान ही, विटकॉफ और कुशनर से बातचीत की थी, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है.

अमेरिका और पाकिस्तान के कैसे रहे हैं रिश्ते?

ट्रंप की मौजूदा विदेश नीति में पाकिस्तान की भूमिका काफी अहम रही है, खासकर उनके नोबेल शांति पुरस्कार के दावे को लेकर. ट्रंप जिन आठ युद्धों को खत्म करने का दावा करते हैं, उनमें मई 2025 में भारत-पाकिस्तान के बीच हुए सैन्य तनाव को भी शामिल करते हैं. हालांकि भारत का कहना है कि उसने संघर्षविराम पाकिस्तान के अनुरोध पर स्वीकार किया था.

पाकिस्तान ने इस मामले में ट्रंप को श्रेय लेने से नहीं रोका है. यहां तक कि असिम मुनीर और शहबाज शरीफ ने उनके लिए नोबेल शांति पुरस्कार की मांग भी की है.

पाकिस्तान के अलावा और कौन करा रहा है सुलह?

वैश्विक स्तर पर मध्यस्थता के प्रयासों में पाकिस्तान के अलावा सऊदी अरब, मिस्र और तुर्की भी सक्रिय हैं. पारंपरिक मध्यस्थ Qatar ने मंगलवार को कहा कि वह युद्ध खत्म करने के लिए सभी कूटनीतिक प्रयासों का समर्थन करता है.अमेरिका के विदेश मंत्री Marco Rubio शुक्रवार को फ्रांस में G7 देशों के विदेश मंत्रियों से मुलाकात करेंगे, जहां ईरान मुद्दे पर चर्चा होगी. यह युद्ध शुरू होने के बाद उनकी पहली विदेश यात्रा होगी.

इस बीच, प्रधानमंत्री Narendra Modi से भी ट्रंप ने मंगलवार को फोन पर बात की. पीएम मोदी ने सोशल मीडिया पर लिखा कि पश्चिम एशिया की स्थिति पर उनकी उपयोगी बातचीत हुई. उन्होंने कहा कि भारत तनाव कम करने और जल्द शांति बहाल करने का समर्थन करता है. साथ ही, उन्होंने कहा कि Strait of Hormuz का खुला, सुरक्षित और सुलभ रहना पूरी दुनिया के लिए जरूरी है.

पीएम मोदी ने इससे पहले ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन से भी बातचीत की थी. साथ ही उन्होंने उन खाड़ी देशों के नेताओं से भी संपर्क किया है, जहां अमेरिकी सैन्य ठिकाने हैं और जो ईरानी हमलों की जद में आए हैं.

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