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आग में घी डाल रहा सऊदी, ट्रंप के साथ गुफ्तगू का खुला राज! Mohammed Bin Salman को अधूरी जंग से सता रहा इस बात का डर

मिडिल ईस्ट में बढ़ते युद्ध के बीच सऊदी अरब की भूमिका सवालों में है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, मोहम्मद बिन सलमान ने ट्रंप से जंग जारी रखने की अपील की, जबकि सार्वजनिक तौर पर शांति की बात की जा रही है.

आग में घी डाल रहा सऊदी, ट्रंप के साथ गुफ्तगू का खुला राज! Mohammed Bin Salman को अधूरी जंग से सता रहा इस बात का डर
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( Image Source:  @Pie_Opinion-X )
सागर द्विवेदी
By: सागर द्विवेदी3 Mins Read

Published on: 25 March 2026 1:02 AM

मीडिल ईस्ट में जारी युद्ध अब सिर्फ क्षेत्रीय संघर्ष नहीं रह गया है, बल्कि वैश्विक शक्ति संतुलन को प्रभावित करने वाला बड़ा भू-राजनीतिक खेल बन चुका है. इसी बीच एक चौंकाने वाली रिपोर्ट ने सऊदी अरब की भूमिका पर नए सवाल खड़े कर दिए हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, Mohammed bin Salman ने निजी बातचीत में Donald Trump से ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान जारी रखने की अपील की है.

हालांकि, दूसरी तरफ सऊदी अरब ने आधिकारिक तौर पर इस दावे से दूरी बनाते हुए खुद को शांति का समर्थक बताया है. इस विरोधाभास ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर सऊदी की असली रणनीति क्या है. युद्ध या कूटनीति?

क्या सऊदी अरब ने US को युद्ध जारी रखने के लिए उकसाया?

रिपोर्ट के अनुसार, सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने अमेरिका-इजरायल के सैन्य अभियान को 'ऐतिहासिक अवसर' बताया. उनका मानना है कि यह ईरान की नेतृत्व क्षमता को कमजोर कर मध्य पूर्व का नया नक्शा तैयार कर सकता है. उन्होंने कथित तौर पर यह भी कहा कि Iran खाड़ी क्षेत्र के लिए दीर्घकालिक खतरा बना हुआ है, इसलिए इस मौके को गंवाना नहीं चाहिए.

फिर सार्वजनिक रूप से शांति की बात क्यों?

सऊदी सरकार ने इन दावों को खारिज करते हुए साफ कहा कि सऊदी अरब का साम्राज्य इस संघर्ष के शुरू होने से पहले भी हमेशा इसके शांतिपूर्ण समाधान का समर्थन करता रहा है. साथ ही यह भी जोड़ा आज हमारी प्राथमिक चिंता अपने लोगों और हमारे नागरिक बुनियादी ढांचे पर हो रहे रोज़ाना हमलों से खुद की रक्षा करना है.

ईरान ने गंभीर कूटनीतिक समाधानों की बजाय खतरनाक टकराव (ब्रिंकमेन्शिप) का रास्ता चुना है. यानी एक तरफ बैकडोर कूटनीति, दूसरी तरफ सार्वजनिक रूप से शांति का संदेश. यही सऊदी की रणनीतिक संतुलन की कोशिश मानी जा रही है.

क्या ईरान के तेल ठिकानों और जमीनी हमले की भी चर्चा हुई?

रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि सऊदी नेतृत्व ने ईरान के ऊर्जा ढांचे पर हमले और यहां तक कि जमीनी ऑपरेशन जैसे विकल्पों पर भी चर्चा की. हालांकि, ऐसे कदम बेहद जोखिम भरे हो सकते हैं और पूरे क्षेत्र को बड़े युद्ध में झोंक सकते हैं.

जंग का असर कितना बड़ा हो चुका है?

28 फरवरी से शुरू हुए अमेरिका-इजरायल के संयुक्त हमलों के बाद हालात तेजी से बिगड़े हैं. ईरान की जवाबी कार्रवाई ने पूरे खाड़ी क्षेत्र को युद्ध के दायरे में ला दिया है. तेल सप्लाई, शिपिंग रूट और खासकर Strait of Hormuz जैसे अहम मार्ग प्रभावित हुए हैं, जिससे वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता बढ़ गई है.

क्या सऊदी को अधूरी जंग का डर सता रहा है?

विश्लेषकों के मुताबिक, सऊदी अरब को डर है कि अगर यह अभियान अधूरा रह गया, तो ईरान और ज्यादा मजबूत होकर उभरेगा और बार-बार हमले कर सकता है. लेकिन दूसरी ओर, सऊदी यह भी समझता है कि अगर ईरान में अस्थिरता बढ़ी, तो इससे पूरे क्षेत्र में अराजकता फैल सकती है. इसी बीच Donald Trump ने 5 दिनों तक हमले टालने की घोषणा की और दावा किया कि ईरान के साथ बहुत अच्छी और सकारात्मक बातचीत हुई हैं. हालांकि, ईरान पहले ही किसी भी बातचीत से इनकार कर चुका है, जिससे ट्रंप के दावों पर सवाल उठ रहे हैं.

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