Iran में बरसे बारूद से पाकिस्तानियों को सफ़ोकेशन- Petrol हुआ सोना, Covid जैसी पाबंदियों से हायतौबा
मिडिल ईस्ट संकट और तेल की बढ़ती कीमतों का असर अब पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पर साफ दिखाई दे रहा है. पेट्रोल और डीजल की कीमतों में भारी बढ़ोतरी के बाद सरकार ने ईंधन बचाने के लिए कई सख्त कदम उठाए हैं. इसके तहत स्कूल दो हफ्ते बंद रखने और सरकारी दफ्तरों को हफ्ते में चार दिन ही खोलने का फैसला किया गया है.
Pakistan Oil Crisis: मिडिल ईस्ट में जारी संकट और तेल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी का असर अब पाकिस्तान पर भी साफ दिखाई देने लगा है. कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर जाने के बाद पाकिस्तान सरकार ने फ्यूल बचाने के लिए कई बड़े कदम उठाने का ऐलान किया है. इन कदमों के तहत स्कूलों को दो हफ्ते के लिए बंद करने और सरकारी दफ्तरों को हफ्ते में सिर्फ चार दिन खोलने का फैसला लिया गया है.
न्यूज एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने सोमवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए इस किए गए बदलावों के बारे में जानकारी दी है. जिससे ऐसा लग रहा है कि पाक फिर से कोविड काल में पहुंच गया है.
पाकिस्तान ने क्या किए बड़े बदलाव?
शहबाज शरीफ ने कहा कि फ्यूल की बचत के लिए बैंकों को छोड़कर सभी सरकारी दफ्तर अब हफ्ते में चार दिन ही खुलेंगे. उन्होंने कहा कि इस हफ्ते के बाद सभी स्कूल दो हफ्ते के लिए बंद कर दिए जाएंगे. इसके अलावा उच्च शिक्षा संस्थानों में पढ़ाई ऑनलाइन माध्यम से कराई जाएगी.
प्रधानमंत्री ने यह भी बताया कि जरूरी सेवाओं को छोड़कर सरकारी विभागों में 50 प्रतिशत कर्मचारी घर से काम करेंगे. इसके साथ ही अगले दो महीनों के दौरान सरकारी विभागों को मिलने वाले फ्यूल में 50 प्रतिशत तक की कटौती करने का फैसला लिया गया है.
सरकारी गाड़ियों के लिए क्या किए बदलाव?
सरकार की ओर से कई और सख्त फैसलों की भी घोषणा की गई है. अगले दो महीनों के लिए सरकारी गाड़ियों के फ्यूल अलाउंस में 50 प्रतिशत की कटौती की जाएगी, हालांकि एम्बुलेंस और पब्लिक बसों जैसी जरूरी सेवाओं से जुड़ी गाड़ियों को इससे छूट दी गई है. इसके अलावा फेडरल और प्रांतीय सरकारी संस्थानों में 60 प्रतिशत सरकारी वाहनों को अगले दो महीनों के लिए इस्तेमाल से बाहर रखा जाएगा.
क्या सैलरी में की गई कटौती?
सरकार ने यह भी फैसला किया है कि फेडरल और प्रांतीय कैबिनेट के मंत्री अगले दो महीनों तक अपनी सैलरी और अलाउंस नहीं लेंगे. वहीं फेडरल और प्रांतीय विधानसभाओं के सदस्यों की सैलरी में भी दो महीने के लिए 25 प्रतिशत की कटौती की जाएगी.
सरकारी खर्च कम करने के लिए एक और कदम उठाते हुए कहा गया है कि फेडरल और प्रांतीय संस्थानों में BS-20 ग्रेड के वे अधिकारी, जिनकी आय 300,000 रुपये या उससे ज्यादा है, उन्हें दो दिन की सैलरी नहीं दी जाएगी. हालांकि स्वास्थ्य और शिक्षा क्षेत्र में काम करने वाले अधिकारियों को इस फैसले से छूट दी गई है.
इसके अलावा चौथी तिमाही के दौरान सभी फेडरल और प्रांतीय सरकारी संस्थानों के गैर-कर्मचारी से जुड़े खर्चों में 20 प्रतिशत की कमी की जाएगी. पब्लिक सेक्टर में भी 50 प्रतिशत कर्मचारी घर से काम करेंगे, जबकि जरूरी सेवाओं से जुड़े कर्मचारियों को इससे छूट दी गई है. पब्लिक सेक्टर के दफ्तर भी हफ्ते में चार दिन ही खुलेंगे, लेकिन जरूरी सेवाओं और बैंकिंग सेक्टर को इससे बाहर रखा गया है।
शिक्षा के क्षेत्र में क्या बदलाव किए?
शिक्षा के क्षेत्र में भी बदलाव किए गए हैं. सभी उच्च शिक्षा संस्थानों में 16 मार्च से 31 मार्च तक ऑनलाइन कक्षाएं आयोजित की जाएंगी, जबकि इसी अवधि में स्कूलों में दो हफ्ते की छुट्टी घोषित की गई है.
सरकारी खर्चों को सीमित करने के लिए यह भी तय किया गया है कि जून 2026 तक सरकारी विभाग गाड़ियां, फर्नीचर, एयर कंडीशनर और अन्य सामान नहीं खरीदेंगे. इसके साथ ही मंत्रियों, सलाहकारों और सरकारी अधिकारियों के विदेश दौरे पर भी रोक लगा दी गई है, जब तक कि वह देश के हित में बेहद जरूरी न हों.
पाकिस्तान पर क्यों पड़ा तेल के दामों का इतना असर?
दरअसल, पाकिस्तान में फ्यूल की कमी का मुख्य कारण होर्मुज स्ट्रेट में बढ़ता संकट बताया जा रहा है. यह संकट अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच जारी युद्ध की वजह से पैदा हुआ है. पाकिस्तान को होर्मुज स्ट्रेट के रास्ते बड़ी मात्रा में तेल की आपूर्ति होती है और हालिया पाबंदियों के कारण उसे पेट्रोल की कीमतों में भारी बढ़ोतरी करनी पड़ी है.
क्या पाकिस्तान में ब़ढ़ गईं तेल की कीमतें?
सरकार ने देर रात आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में पेट्रोल की कीमत में 55 पाकिस्तानी रुपये की बढ़ोतरी का ऐलान किया, जो भारतीय मुद्रा में करीब 18 रुपये के बराबर है. बताया जा रहा है कि यह बढ़ोतरी पाकिस्तान के इतिहास में सबसे ज्यादा है. इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में पेट्रोलियम मंत्री अली परवेज मलिक, उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इशाक डार तथा वित्त मंत्री मुहम्मद औरंगजेब भी मौजूद थे.
पेट्रोल के साथ-साथ हाई-स्पीड डीजल की कीमतों में भी करीब 20 प्रतिशत की बढ़ोतरी की गई है. पहले डीजल की कीमत 280.86 पाकिस्तानी रुपये प्रति लीटर थी, जिसे बढ़ाकर 335.86 पाकिस्तानी रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है.