ईरान को मिला नया सुप्रीम लीडर: अली खामेनेई के बाद बेटे मोजतबा संभालेंगे सत्ता, अमेरिका-इजरायल नाराज

ईरान की विशेषज्ञ सभा ने अली खामेनेई के निधन के बाद उनके बेटे मोजतबा खामेनेई को देश का नया सर्वोच्च नेता घोषित किया है. इस फैसले के बाद अमेरिका और इजरायल की प्रतिक्रिया तेज हो गई है और मध्य पूर्व में तनाव बढ़ने की आशंका जताई जा रही है.

( Image Source:  X: @immohdshuaib )
Edited By :  रूपाली राय
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ईरान के सरकारी मीडिया ने रविवार को खबर दी है कि ईरान की विशेषज्ञ सभा (Assembly of Experts) ने फैसला किया है कि मोजतबा खामेनेई अब देश के नए सर्वोच्च नेता बनेंगे. वे अपने पिता, दिवंगत अयातुल्ला अली खामेनेई के स्थान पर यह बहुत महत्वपूर्ण पद संभालेंगे. यह घोषणा कुछ दिनों पहले तेहरान-विरोधी मीडिया चैनल ईरान इंटरनेशनल की उस रिपोर्ट के बाद आई, जिसमें सबसे पहले दावा किया गया था कि 56 साल के इस कट्टरपंथी नेता को ही चुना जा रहा है.

मोजतबा खामेनेई एक मध्यम स्तर के धार्मिक विद्वान (क्लेरिक) हैं. वे ईरान के शक्तिशाली इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) से बहुत करीबी संबंध रखते हैं. लंबे समय से ईरान की सत्ता के कुछ बड़े लोगों द्वारा उन्हें अली खामेनेई का उत्तराधिकारी माना जा रहा था. उनके पिता की मौत हाल ही में अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हमलों में हुई थी, जिसके बाद मध्य पूर्व में युद्ध जैसी स्थिति बन गई है. इस नए पद पर आने से मोजतबा को ईरान के इस्लामी गणराज्य में लगभग हर मामले में सबसे ऊपर का अधिकार मिल जाएगा. वे देश की सेना, न्याय व्यवस्था, मीडिया और विदेश नीति पर अंतिम फैसला ले सकेंगे.

इससे नाराज हो सकते है ट्रंप

इस खबर से अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप बहुत नाराज हो सकते हैं. उन्होंने रविवार को ही कहा था कि ईरान के नए नेता के चयन में वाशिंगटन की भी राय होनी चाहिए. ट्रंप ने एबीसी न्यूज को इंटरव्यू में साफ कहा, 'अगर हमें हमारी मंजूरी नहीं मिली, तो वे ज्यादा दिन टिक नहीं पाएंगे.' घोषणा से पहले इजरायल ने भी धमकी दी थी कि जो भी ईरान का नया सर्वोच्च नेता बनेगा, उसे निशाना बनाया जाएगा. ईरान की विचारधारा में वंशानुगत तरीके से सत्ता का हस्तांतरण पसंद नहीं किया जाता, लेकिन मोजतबा के पास रिवॉल्यूशनरी गार्ड्स के अंदर मजबूत समर्थक हैं. उनके पिता का पुराना कार्यालय भी अभी भी बहुत प्रभावशाली है.

क्या कहा गया घोषणा में?

विशेषज्ञ सभा ने तेहरान के समयानुसार आधी रात के ठीक बाद एक बयान जारी किया. उसमें कहा गया, 'बहुमत के निर्णायक वोट से विशेषज्ञ सभा ने अयातुल्ला सैयद मोजतबा हुसैनी खामेनेई को इस्लामी गणराज्य ईरान की पवित्र व्यवस्था का तीसरा नेता नियुक्त किया है'. घोषणा से कुछ घंटे पहले ही सभा के एक सदस्य अयातुल्ला मोहसेन हैदरी अलेकासिर ने कहा था कि अली खामेनेई के मार्गदर्शन के आधार पर ऐसा उम्मीदवार चुना गया है जो 'दुश्मनों द्वारा नफरत का पात्र' हो. उन्होंने कहा, 'यहां तक कि सबसे बड़ा शैतान (अमेरिका) ने भी उसका नाम लिया है.' यह इशारा ट्रंप की उस बात की तरफ था जिसमें उन्होंने मोजतबा को अस्वीकार्य बताया था. 

मोजतबा खामेनेई कौन हैं?

मोजतबा का जन्म 1969 में ईरान के पवित्र शिया शहर मशहद में हुआ था. उनका बचपन ऐसे समय में बीता जब उनके पिता शाह की सत्ता को उखाड़ फेंकने की कोशिशों में लगे थे. युवा अवस्था में उन्होंने ईरान-इराक युद्ध में हिस्सा लिया. उन्होंने अपनी धार्मिक पढ़ाई कोम शहर के मदरसों में रूढ़िवादी उलेमाओं के मार्गदर्शन में पूरी की. कोम शिया धर्मशास्त्र की पढ़ाई का सबसे बड़ा केंद्र है।मोजतबा ने ईरान की सरकार में कभी कोई आधिकारिक या चुनी हुई पोस्ट नहीं संभाली. वे बहुत कम सार्वजनिक रूप से दिखते हैं और कम ही भाषण देते हैं. लेकिन वे वफादार समर्थकों की सभाओं में दिखाई देते रहे हैं. अमेरिकी वित्त विभाग ने 2019 में उन पर प्रतिबंध लगाए थे. उनके अनुसार, मोजतबा ने अली खामेनेई के कार्यालय में काम किया और सरकारी पद पर कभी चुने या नियुक्त न होने के बावजूद आधिकारिक तौर पर उनका प्रतिनिधित्व किया. 2010 के दशक में ईरान में एक युवती की हिरासत में मौत के बाद हुए बड़े विरोध प्रदर्शनों में लोगों ने खास तौर पर मोजतबा की आलोचना की थी. ऐसा माना जाता है कि 2005 में कट्टरपंथी महमूद अहमदीनेजाद के राष्ट्रपति बनने के पीछे भी उनका हाथ था. 

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