Mars Water Discovery: मंगल ग्रह पर जीवन संभव! चीन के वैज्ञानिकों ने खोजी पानी से बनी 8 गुफाएं; रिसर्च में NASA ने की हेल्प

चीनी वैज्ञानिकों ने मंगल ग्रह के Hebrus Valles क्षेत्र में पानी से बनी आठ रहस्यमयी गुफाओं की खोज की है. ये गुफाएं ज्वालामुखी गतिविधि से नहीं, बल्कि पानी द्वारा चट्टानों के घुलने से बनी मानी जा रही हैं, जिन्हें ‘कार्स्ट गुफाएं’ कहा जाता है. NASA सैटेलाइट डेटा के विश्लेषण में कार्बोनेट और सल्फेट जैसे खनिज मिले हैं, जो प्राचीन जल प्रवाह की ओर इशारा करते हैं. वैज्ञानिकों का मानना है कि ये गुफाएं मंगल पर कभी मौजूद रहे सूक्ष्मजीव जीवन के सुरक्षित आश्रय हो सकती थीं.;

( Image Source:  sora ai )
Edited By :  नवनीत कुमार
Updated On : 2 Jan 2026 4:52 PM IST

अब तक मंगल ग्रह को सूखी, लाल और बंजर दुनिया के रूप में देखा जाता रहा है, लेकिन चीनी वैज्ञानिकों की नई खोज ने इस सोच को चुनौती दे दी है. शोधकर्ताओं ने मंगल पर ऐसी आठ गुफाओं की पहचान की है, जो संभवतः पानी की मौजूदगी से बनी थीं. यह खोज मंगल की सतह नहीं, बल्कि उसके भीतर छिपे इतिहास की ओर इशारा करती है.

इन गुफाओं की सबसे खास बात यह है कि ये ज्वालामुखी गतिविधि से नहीं बनी हैं, बल्कि पानी द्वारा घुलनशील चट्टानों के क्षरण से बनी मानी जा रही हैं. पृथ्वी पर इस तरह की संरचनाओं को कार्स्ट गुफाएं कहा जाता है. वैज्ञानिकों के मुताबिक, किसी दूसरे ग्रह पर इस तरह की गुफाओं का मिलना पहली बार दर्ज किया गया है.

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हिब्रस वैलीज़ बना खोज का केंद्र

ये सभी गुफाएं मंगल के Hebrus Valles इलाके में पाई गई हैं. यहां उत्तर-पश्चिमी हिस्से में आठ गोलाकार और गहरे गड्ढे मिले, जो सामान्य उल्कापिंड क्रेटर जैसे नहीं दिखते. इनके किनारे ऊंचे नहीं हैं और आसपास मलबा भी नहीं है, जिससे वैज्ञानिकों को शक हुआ कि ये किसी और प्रक्रिया से बने हैं.

स्काइलाइट्स: धरती के नीचे का रास्ता

शोधकर्ताओं ने इन संरचनाओं को “स्काइलाइट्स” के रूप में पहचाना है. ये दरअसल जमीन धंसने से बने ऐसे छिद्र होते हैं, जो नीचे मौजूद खाली गुफाओं तक रास्ता खोलते हैं. यानी ये सिर्फ गड्ढे नहीं, बल्कि मंगल की सतह के नीचे मौजूद किसी बड़े सिस्टम का प्रवेश द्वार हो सकते हैं.

नासा के डेटा ने की पुष्टि

इस अध्ययन में NASA के कई सैटेलाइट मिशनों से मिले डेटा का इस्तेमाल किया गया, जिनमें अब सेवानिवृत्त Mars Global Surveyor भी शामिल है. थर्मल एमिशन स्पेक्ट्रोमीटर से मिले आंकड़ों में कार्बोनेट और सल्फेट जैसे खनिज पाए गए, जो आमतौर पर पानी की मौजूदगी में बनते हैं.

पानी से बनी चट्टानें, मंगल पर नई भू-वैज्ञानिक कहानी

कार्बोनेट और सल्फेट की मौजूदगी ने वैज्ञानिकों को इस निष्कर्ष तक पहुंचाया कि कभी मंगल की जमीन के नीचे पानी बहता था. इसी पानी ने घुलनशील चट्टानों को धीरे-धीरे काटकर गुफाओं का रूप दिया. यह खोज मंगल के भू-वैज्ञानिक इतिहास में पानी की भूमिका को और मजबूत करती है.

क्या यहां कभी जीवन रहा होगा?

अगर मंगल पर कभी जीवन रहा होगा, तो उसे सतह की कठोर परिस्थितियों से बचने के लिए किसी सुरक्षित जगह की जरूरत रही होगी. तेज सौर विकिरण, धूल भरी आंधियां और अत्यधिक तापमान जीवन के लिए बेहद खतरनाक हैं. वैज्ञानिकों का मानना है कि ऐसी गुफाएं सूक्ष्मजीवों के लिए सुरक्षित शरणस्थली बन सकती थीं.

भविष्य के मिशनों के लिए बड़ा संकेत

30 अक्टूबर 2025 को The Astrophysical Journal Letters में प्रकाशित यह अध्ययन मंगल पर जीवन की खोज को एक नई दिशा देता है. अब भविष्य के मिशन सिर्फ सतह पर नहीं, बल्कि मंगल की जमीन के नीचे झांकने की कोशिश कर सकते हैं. संभव है कि जीवन के सबसे अहम सबूत लाल ग्रह की इन्हीं गहराइयों में छिपे हों.

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