सिर्फ LEMOA नहीं, COMCASA और BECA भी चर्चा में, क्या इन समझौतों से अमेरिका को मिलती है भारत के सैन्य बेस तक पहुंच?
हिंद महासागर में ईरान से जुड़े घटनाक्रम के बाद LEMOA, COMCASA और BECA समझौतों पर नई बहस शुरू हो गई है. जानिए इन समझौतों के प्रावधान, भारत की रणनीतिक स्वायत्तता और अमेरिका के सैन्य ठिकानों के इस्तेमाल से जुड़े नियम.
भारत और अमेरिका के बीच पिछले कुछ वर्षों में रक्षा और रणनीतिक सहयोग तेजी से मजबूत हुआ है. इसी कड़ी में दोनों देशों ने तीन अहम समझौते किए, लॉजिस्टिक्स एक्सचेंज मेमोरेंडम ऑफ एग्रीमेंट (LEMOA), कम्युनिकेशंस कम्पैटिबिलिटी एंड सिक्योरिटी एग्रीमेंट (COMCASA) और बेसिक एक्सचेंज एंड कोऑपरेशन एग्रीमेंट (BECA). इन समझौतों को भारत-अमेरिका रक्षा साझेदारी के 'फाउंडेशनल एग्रीमेंट' माना जाता है, क्योंकि इनके जरिए लॉजिस्टिक सपोर्ट, सुरक्षित सैन्य संचार और सैटेलाइट आधारित जियोस्पेशियल जानकारी साझा करने का रास्ता खुलता है. खासकर इंडो-पैसिफिक और हिंद महासागर क्षेत्र में बढ़ते सामरिक तनाव के बीच ये समझौते दोनों देशों के बीच सैन्य सहयोग को नई मजबूती देते हैं, जबकि भारत अपनी रणनीतिक स्वायत्तता बनाए रखने पर भी जोर देता है.
LEMOA क्या और क्यों चर्चा में है?
हाल के दिनों में हिंद महासागर में ईरान से जुड़ी एक शिप को निशाने पर लेने की खबरों के बाद भारत-अमेरिका सैन्य सहयोग से जुड़े समझौते लॉजिस्टिक्स एक्सचेंज मेमोरेंडम ऑफ एग्रीमेंट (LEMOA) की फिर चर्चा होने लगी है. यह समझौता भारत और अमेरिका के बीच 2016 में हुआ था और इसका उद्देश्य दोनों देशों की सेनाओं को एक-दूसरे के सैन्य ठिकानों पर लॉजिस्टिक सपोर्ट यानी ईंधन, मरम्मत, भोजन और अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराना है. हालांकि यह कोई सैन्य गठबंधन नहीं है और इससे भारत किसी युद्ध या सैन्य कार्रवाई में स्वतः शामिल नहीं हो जाता.
COMCASA क्या है?
भारत और अमेरिका के बीच 2018 में हुआ लॉजिस्टिक्स एक्सचेंज मेमोरेंडम ऑफ एग्रीमेंट (COMCASA) एक महत्वपूर्ण रक्षा समझौता है. इसके तहत दोनों देशों की सेनाएं सुरक्षित और एन्क्रिप्टेड संचार प्रणाली का उपयोग कर सकती हैं. इससे भारतीय सेना को अमेरिकी मूल के सैन्य उपकरणों—जैसे लड़ाकू विमान, नौसैनिक जहाज और ड्रोन—में उन्नत कम्युनिकेशन सिस्टम इस्तेमाल करने की सुविधा मिलती है. इस समझौते का उद्देश्य सैन्य अभियानों और संयुक्त अभ्यासों के दौरान रियल-टाइम जानकारी साझा करना और समन्वय को मजबूत बनाना है, जिससे समुद्र, हवा और जमीन पर ऑपरेशन अधिक प्रभावी हो सकें.
BECA क्या है?
भारत और अमेरिका के बीच 2020 में हस्ताक्षरित बेसिक एक्सचेंज एंड कोऑपरेशन एग्रीमेंट (BECA) जियोस्पेशियल इंटेलिजेंस साझा करने से जुड़ा समझौता है. इसके तहत अमेरिका भारत को सैटेलाइट इमेजरी, डिजिटल मैपिंग और भौगोलिक डेटा उपलब्ध करा सकता है. इस जानकारी से भारतीय सेना को मिसाइलों और ड्रोन की सटीकता बढ़ाने, लक्ष्य निर्धारण करने और सीमा क्षेत्रों की बेहतर निगरानी में मदद मिलती है. विशेषज्ञों के अनुसार, BECA से आधुनिक युद्ध में इस्तेमाल होने वाली नेविगेशन और टार्गेटिंग क्षमता मजबूत होती है, जिससे सैन्य अभियानों की प्रभावशीलता बढ़ती है.
LEMOA एग्रीमेंट में क्या हैं 10 मुख्य प्रावधान?
1. लॉजिस्टिक सपोर्ट की अनुमति : समझौते के तहत भारत और अमेरिका की सेनाएं एक-दूसरे के सैन्य अड्डों का इस्तेमाल ईंधन, मरम्मत और रसद के लिए कर सकती हैं.
2. केस-बाय-केस आधार पर अनुमति : किसी भी सैन्य सुविधा के इस्तेमाल के लिए हर बार अलग से अनुमति आवश्यक होती है. यह स्वतः लागू नहीं होता.
3. कोई स्थायी सैन्य बेस नहीं : इस समझौते के तहत अमेरिका भारत में स्थायी सैन्य अड्डा नहीं बना सकता.
4. भुगतान की व्यवस्था : लॉजिस्टिक सेवाओं का उपयोग करने पर संबंधित देश को भुगतान करना होता है या फिर बाद में समायोजन किया जाता है.
5. मानवीय सहायता और आपदा राहत में सहयोग : प्राकृतिक आपदा या मानवीय संकट के समय सेनाएं तेजी से एक-दूसरे की मदद कर सकती हैं.
6. संयुक्त सैन्य अभ्यास में सुविधा : संयुक्त अभ्यास के दौरान जहाजों, विमानों और सैनिकों को लॉजिस्टिक सपोर्ट मिलना आसान हो जाता है.
7. समुद्री सुरक्षा सहयोग : विशेष रूप से हिंद महासागर क्षेत्र में समुद्री निगरानी और सुरक्षा गतिविधियों में सहयोग बढ़ता है.
8. इंडो-पैसिफिक रणनीति में समन्वय : यह समझौता इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सामरिक सहयोग को मजबूत करने का एक हिस्सा माना जाता है.
9. भारत की रणनीतिक स्वायत्तता बरकरार : भारत की विदेश और रक्षा नीति स्वतंत्र रहती है; यह कोई सैन्य गठबंधन नहीं है.
10. समान शर्तों पर लागू : दोनों देशों की सेनाओं को समान अधिकार मिलते हैं; यह एकतरफा व्यवस्था नहीं है.
क्या भारत अमेरिका को सैन्य लॉजिस्टिक देने के लिए बाध्य है?
LEMOA भारत को किसी भी परिस्थिति में अमेरिका को लॉजिस्टिक सपोर्ट देने के लिए बाध्य नहीं करता. हर अनुरोध पर भारत सरकार की मंजूरी आवश्यक होती है. अगर भारत को लगता है कि कोई सैन्य कार्रवाई उसके हितों या विदेश नीति के खिलाफ है, तो वह सुविधा देने से इनकार कर सकता है. इसलिए भारत की रणनीतिक स्वायत्तता इस समझौते में सुरक्षित रखी गई है.
हिंद महासागर में ईरान की शिप को निशाना बनाने से इसका क्या कनेक्शन है?
हाल में हिंद महासागर क्षेत्र में Iran से जुड़ी एक शिप पर हमले की खबरों के बाद यह सवाल उठा कि क्या भारत के किसी सैन्य अड्डे या लॉजिस्टिक सुविधा का उपयोग इस तरह की कार्रवाई में हो सकता है. क्योंकि LEMOA के तहत अमेरिकी जहाज और विमान भारत के सैन्य अड्डों से ईंधन या लॉजिस्टिक ले सकते हैं. अगर किसी सैन्य ऑपरेशन से पहले अमेरिकी जहाज ने भारतीय बेस से सुविधा ली हो, तो तकनीकी रूप से यह चर्चा का विषय बन सकता है. लेकिन भारत किसी भी ऑपरेशन का प्रत्यक्ष हिस्सा तभी माना जाएगा जब उसने स्पष्ट रूप से अनुमति दी हो.
रणनीतिक रूप से यह समझौता क्यों महत्वपूर्ण है?
भारत और अमेरिका के बीच यह समझौता हिंद महासागर और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने का एक अहम आधार बन गया है. इससे भारतीय नौसेना को भी अमेरिकी सैन्य अड्डों जैसे डिएगो गार्सिया या गुआम पर लॉजिस्टिक सुविधा मिल सकती है, जिससे लंबी दूरी के समुद्री मिशन आसान हो जाते हैं.
पोत डूबने की घटना भारत के लिए अहम क्यों
यह घटना भारत के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि हमला जिस जगह हुआ, वह क्षेत्र भारत के रणनीतिक समुद्री पड़ोस में आता है. हिंद महासागर में श्रीलंका के दक्षिण का इलाका वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति के प्रमुख समुद्री मार्गों में शामिल है. इस क्षेत्र में किसी भी तरह का सैन्य टकराव समुद्री सुरक्षा और शिपिंग स्थिरता को प्रभावित कर सकता है.
भारत में आयोजित मिलन अभ्यास में शामिल होने के लिए आया डेना युद्धपोत 18 से 25 फरवरी तक भारत में रहा था. इस अभ्यास में दुनिया के कई देशों की नौसेनाओं ने हिस्सा लिया था और 80 से ज्यादा युद्धपोत समुद्र में एक साथ दिखाई दिए थे. कार्यक्रम का उद्देश्य समुद्री सहयोग और नौसैनिक कूटनीति को प्रदर्शित करना था. नौसैनिक परेड की समीक्षा द्रौपदी मुर्मु ने की थी.
तीनों समझौतों को एक साथ क्यों देखा जाता है?
- LEMOA, COMCASA और BECA को अक्सर भारत-अमेरिका रक्षा सहयोग के “फाउंडेशनल एग्रीमेंट” कहा जाता है.
- LEMOA लॉजिस्टिक सपोर्ट से जुड़ा है
- COMCASA सुरक्षित संचार प्रणाली से जुड़ा है
- BECA जियोस्पेशियल और सैटेलाइट डेटा से जुड़ा है
- इन तीनों के संयोजन से दोनों देशों की सेनाओं के बीच सहयोग का दायरा काफी बढ़ जाता है.
क्या इन समझौतों से भारत की रणनीतिक स्वतंत्रता प्रभावित होती है?
भारत हमेशा से अपनी विदेश नीति में रणनीतिक स्वायत्तता बनाए रखने की बात करता रहा है. इसलिए इन समझौतों में यह स्पष्ट किया गया है कि भारत किसी भी सैन्य कार्रवाई में स्वतः शामिल नहीं होगा.
उदाहरण के लिए, LEMOA के तहत अमेरिका भारतीय सैन्य अड्डों का इस्तेमाल तभी कर सकता है जब भारत सरकार अनुमति दे. यानी हर अनुरोध को केस-बाय-केस आधार पर मंजूरी मिलती है.
हिंद महासागर और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में इन समझौतों का क्या महत्व है?
India और United States दोनों ही इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा को लेकर सहयोग बढ़ा रहे हैं. इन समझौतों से समुद्री निगरानी, आतंकवाद विरोधी अभियान और मानवीय राहत मिशनों में बेहतर समन्वय संभव होता है. विशेष रूप से हिंद महासागर क्षेत्र में बढ़ती सामरिक प्रतिस्पर्धा के बीच यह साझेदारी दोनों देशों के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण मानी जाती है.
क्या यह भारत-अमेरिका रक्षा साझेदारी का नया ढांचा है?
LEMOA, COMCASA और BECA जैसे समझौतों ने भारत-अमेरिका रक्षा संबंधों को नई दिशा दी है. इनसे तकनीकी सहयोग, सैन्य समन्वय और सामरिक साझेदारी मजबूत हुई है.
हालांकि भारत ने यह भी सुनिश्चित किया है कि इन समझौतों के बावजूद उसकी विदेश नीति और सैन्य निर्णय पूरी तरह स्वतंत्र रहें. यही कारण है कि इन समझौतों को सहयोग और रणनीतिक संतुलन के बीच संतुलित ढांचे के रूप में देखा जाता है.