कितनी घातक हैं US की JASSM-ER मिसाइल, जिसे दुनिया भर से इकट्ठा कर रहें ट्रंप, क्या बड़े हमले की है तैयारी?

अमेरिका ईरान पर JASSM-ER से हमले का प्लान बना रहा है. ट्रंप दुनिया भर के अमेरिकी बेस से इन मिसाइलों को मंगवा रहे हैं. जिन्हें खाड़ी में तैनात किया जाएगा.

( Image Source:  X-@ruswar )
Edited By :  समी सिद्दीकी
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Iran War News: अमेरिका और ईरान के बीच जारी संघर्ष अब और ज्यादा गंभीर मोड़ लेने जा रहा है. इस हफ्ते की शुरुआत में दिए गए एक प्राइमटाइम संबोधन में अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने कहा था कि वह ईरान पर इतना बड़ा हमला करेंगे कि देश स्टोन एज में वापस चला जाएगा. इस बयान के बाद अब अमेरिका ईरान के खिलाफ अपने सबसे खतरनाक लंबी दूरी के हथियारों को तैनात करने की तैयारी में है.

ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी सैन्य अभियान के अगले चरण में JASSM-ER (Joint Air-to-Surface Standoff Missile-Extended Range) क्रूज मिसाइलों का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया जा सकता है. ये मिसाइलें दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में मौजूद अमेरिकी सैन्य भंडार से निकाली जा रही हैं.

JASSM-ER की क्या है खासियत?

JASSM-ER मिसाइलें 600 मील यानी करीब 965 किलोमीटर से ज्यादा दूरी तक सटीक हमला कर सकती हैं. इन्हें इस तरह डिजाइन किया गया है कि ये दुश्मन की एयर डिफेंस प्रणाली से दूर रहकर भी निशाना साध सकें. लंबी दूरी की इन मिसाइलों के अलावा, लगभग दो-तिहाई कम दूरी वाली JASSM मिसाइलों को भी ईरान के खिलाफ इस युद्ध में शामिल किया गया है. इनकी मारक क्षमता करीब 250 मील (402 किलोमीटर) है.

रिपोर्ट के मुताबिक, मार्च के आखिर में प्रशांत क्षेत्र में तैनात करीब 15 लाख डॉलर कीमत वाली इन मिसाइलों को वहां से हटाने का आदेश दिया गया था. अब इन्हें अमेरिका के विभिन्न सैन्य ठिकानों से हटाकर United States Central Command के बेस और ब्रिटेन के फेयरफोर्ड एयरबेस तक पहुंचाया जा रहा है. यह भी बताया गया है कि इन ऑपरेशनों के लिए ब्रिटेन के बेस के इस्तेमाल को लेकर अमेरिका ने दबाव बनाया.

क्यों करता है अमेरिका ऐसे हथियारों का इस्तमाल?

अमेरिका लंबे समय से ऐसे स्टैंडऑफ हथियारों का इस्तेमाल करता रहा है, ताकि सैनिकों को सीधे खतरे में डाले बिना हमले किए जा सकें. लेकिन इस रणनीति का असर अब हथियारों के भंडार पर साफ दिखाई दे रहा है, क्योंकि ये स्टॉक भविष्य के संभावित बड़े युद्धों, खासकर चीन जैसे प्रतिद्वंद्वियों के लिए भी जरूरी माने जाते हैं.

इससे पहले The Washington Post ने रिपोर्ट किया था कि दक्षिण कोरिया में तैनात THAAD मिसाइल डिफेंस सिस्टम के कुछ हिस्सों को मध्य पूर्व भेजा जा रहा है. यह कदम तब उठाया गया, जब खबर आई कि ईरान ने जॉर्डन में एक अमेरिकी सहयोगी एयरबेस पर करीब 300 मिलियन डॉलर के इंटरसेप्टर को नष्ट कर दिया.

ईरान के खिलाफ जारी इस अभियान में लंबी दूरी के हथियारों के भारी इस्तेमाल से अमेरिका के सैन्य भंडार पर दबाव लगातार बढ़ रहा है. United States Central Command के मुताबिक, ऑपरेशन "एपिक फ्यूरी" की शुरुआत से अब तक अमेरिका 12,300 से ज्यादा लक्ष्यों पर हमला कर चुका है. इनमें नौसैनिक जहाज, मिसाइल लॉन्चर और रक्षा उत्पादन से जुड़े ठिकाने शामिल हैं.

अलग-अलग जगहों से मिसाले क्यों इकट्ठा कर रहा है अमेरिका?

ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, युद्ध के पहले चार हफ्तों में ही 1,000 से ज्यादा JASSM-ER मिसाइलों का इस्तेमाल हो चुका है. इसके बाद अब वैश्विक स्तर पर उपलब्ध करीब 2,300 मिसाइलों में से केवल लगभग 425 ही बचेंगी. इसके अलावा करीब 75 मिसाइलें तकनीकी खराबी या नुकसान के कारण इस्तेमाल के लायक नहीं रह गई हैं. मौजूदा उत्पादन दर को देखते हुए इन मिसाइलों और इंटरसेप्टर सिस्टम के भंडार को दोबारा भरने में कई साल लग सकते हैं.

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