शांति वार्ता के बीच अब पाकिस्तान-इजरायल आमने-सामने! एक विवादित बयान ने खड़ा कर दिया नया बखेड़ा

इजरायल लगातार लेबनान में हिजबुल्लाह को टारगेट कर रहा है. जिसको लेकर अब पाकिस्तान के विदेश मंत्री ख्वाजा आसिफ का विवादित बयान सामने आया है.

Israel Pakistan conflict

(Image Source:  X/ @jacksonhinklle, @A_K_Mandhan )
Edited By :  विशाल पुंडीर
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मिडिल ईस्ट में जहां 2 हफ्तों का सीजफायर चल रहा है, जिसकी घोषणा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने की थी. वहीं दूसरी तरफ इजरायल लगातार लेबनान में हिजबुल्लाह को टारगेट कर रहा है. जिसको लेकर अब पाकिस्तान के विदेश मंत्री ख्वाजा आसिफ का विवादित बयान सामने आया है. ख्वाजा आसिफ के इस बयान से पाकिस्तान और इजरायल के बीच बयानबाजी का टकराव खुलकर सामने आ गया है.

सोशल मीडिया पर की गई एक पोस्ट में पाक विदेश मंत्री ने गाजा, ईरान और अब लेबनान में नागरिकों की मौतों का उल्लेख करते हुए इजरायल पर गंभीर आरोप लगाए हैं. वहीं इजरायल ने भी ख्वाजा आसिफ को इसका मुंहतोड़ जवाब दिया है.

क्या है ख्वाजा आसिफ का विवादित बयान?

एक तरफ जहां पाकिस्तान शांति वार्ता में अपनी अहम भूमिका बता रहा है तो वहीं दूसरी तरफ उनके विदेश मंत्री विवादित बयान दे रहे हैं. ख्वाजा आसिफ ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करके लिखा "इस्लामाबाद में शांति वार्ता चल रही है, वहीं लेबनान में नरसंहार हो रहा है. इजराइल द्वारा निर्दोष नागरिकों को मारा जा रहा है, पहले गाजा में, फिर ईरान में और अब लेबनान में रक्तपात लगातार जारी है. मैं आशा और प्रार्थना करता हूं कि जिन लोगों ने यूरोपीय यहूदियों से छुटकारा पाने के लिए फिलिस्तीनी भूमि पर इस कैंसर जैसे राज्य का निर्माण किया, वे नरक में जलें."

क्या बोला इजरायल?

इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने इस बयान को बेहद निंदनीय करार दियाय उनके कार्यालय ने एक्स पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा "यह ऐसा बयान नहीं है जिसे किसी भी सरकार से बर्दाश्त किया जा सकता है, खासकर ऐसी सरकार से जो शांति के लिए एक निष्पक्ष मध्यस्थ होने का दावा करती है."

इज़राइल के विदेश मंत्री गिदोन सा'आर ने भी पाकिस्तान की आलोचना करते हुए इसे स्पष्ट यहूदी-विरोधी रक्त-आलोचना बताया. उन्होंने चेतावनी दी कि इजरायल को कैंसर कहना उसके विनाश का आह्वान करने जैसा है और कहा कि देश अपनी सुरक्षा के लिए हर संभव कदम उठाएगा.

क्या दोनों देशों में आई दरार?

यह घटनाक्रम ऐसे समय पर सामने आया है जब पाकिस्तान और इजरायल के बीच औपचारिक कूटनीतिक संबंध पहले से ही नहीं हैं. परंपरागत रूप से इजरायल ने पाकिस्तान के साथ सीधे टकराव से बचने की नीति अपनाई थी, लेकिन इस बार सार्वजनिक प्रतिक्रिया ने स्थिति की गंभीरता को उजागर कर दिया है. भारत में इजरायल के राजदूत रूवेन अज़ार ने हाल ही में कहा था कि इजरायल, पाकिस्तान को शांति वार्ता में एक विश्वसनीय मध्यस्थ नहीं मानता.

लेबनान पर इजरायल का रुख

मिडिल ईस्ट में तनाव तब और बढ़ गया जब ईरान समर्थित संगठन हिजबुल्लाह ने इजरायल पर रॉकेट हमले किए. बताया गया कि यह हमला ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की हत्या का बदला लेने के लिए किया गया. इसके बाद इजरायल ने लेबनान में बड़े पैमाने पर सैन्य कार्रवाई की, जिसमें सैकड़ों लोगों के मारे जाने की खबर है. यह हमला हाल ही में अमेरिका और ईरान के बीच हुई अस्थिर शांति समझौते के तुरंत बाद हुआ, जिससे क्षेत्र में फिर से तनाव और बढ़ गया.

युद्धविराम पर मतभेद क्यों?

इजरायल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने कहा है कि उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के ईरान के खिलाफ हमलों को दो सप्ताह तक रोकने के फैसले का समर्थन किया है. हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि यह युद्धविराम लेबनान पर लागू नहीं होता. इसके विपरीत, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने दावा किया कि यह युद्धविराम हर जगह लागू होता है, जिसमें लेबनान भी शामिल है.

क्या होगी आगे की रणनीति?

नेतन्याहू ने अपने मंत्रियों को हिजबुल्लाह को निरस्त्र करने के उद्देश्य से लेबनान के साथ सीधी बातचीत शुरू करने का निर्देश दिया है. वहीं, अमेरिकी विदेश विभाग के अनुसार, इजरायल और लेबनान के प्रतिनिधि अगले सप्ताह वाशिंगटन में वार्ता कर सकते हैं.

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