1979 के बाद सबसे बड़ी मुलाकात में कौन-कौन बड़े चेहरे? Iran का डेलीगेशन Pak पहुंचा..क्या खत्म होगी 6 हफ्तों की जंग?
ईरान का डेलिगेशन पाकिस्तान पहुंच गया है. पूरी दुनिया का निगाह इस बातचीत पर टिकी हुई है, क्योंकि अगर ये बातचीत कामयाब होती है तो जंग रुक जाएगी और आर्थिक संकट का खतरा टल जाएगा.
Iran War: ईरान की संसद के स्पीकर Mohammad Baqer Qalibaf के नेतृत्व में एक डेलिगेशन शुक्रवार और शनिवार की दरमियानी रात पाकिस्तान पहुंचा. ईरानी मीडिया के मुताबिक, यह दौरा अमेरिका के साथ शांति वार्ता के लिए है. वहीं, अमेरिकी उपराष्ट्रपति JD Vance के नेतृत्व में एक अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल भी जल्द ही पाकिस्तान पहुंचने वाला है. पाकिस्तान ने इन वार्ताओं को 'इस्लामाबाद टॉक्स' नाम दिया है.
पश्चिम एशिया में जारी युद्ध को खत्म करने के लिए ये शांति वार्ता करीब छह हफ्तों की लड़ाई के बाद हो रही है. इन बातचीत का मकसद इस संघर्ष का स्थायी समाधान निकालना है. 28 फरवरी को शुरू हुई जंग में फिलहाल सीजफायर है.
'इस्लामाबाद टॉक्स' में कौन-कौन शामिल हो रहा है?
ईरान के प्रतिनिधिमंडल में कई बड़े अधिकारी शामिल हैं. इसमें संसद के स्पीकर मोहम्मद बाकर कालीबाफ के अलावा ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi भी शामिल हैं. उनके साथ ईरान की डिफेंस काउंसिल के सचिव Ali Akbar Ahmadian, सेंट्रल बैंक के प्रमुख Abdolnaser Hemmati और कई अन्य सांसद भी मौजूद हैं. भारत में ईरानी दूतावास के अनुसार, इस प्रतिनिधिमंडल में राजनीतिक, सैन्य और आर्थिक क्षेत्र के कई अहम अधिकारी शामिल हैं.
अमेरिका की तरफ से कौन हो रहा है शामिल?
अमेरिका की तरफ से आने वाला प्रतिनिधिमंडल उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के नेतृत्व में होगा. उनके साथ अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump के शीर्ष दूत Steve Witkoff और वरिष्ठ सलाहकार Jared Kushner भी शामिल होंगे, जो ट्रंप के दामाद भी हैं.
दोनों देशों के प्रतिनिधिमंडल इस्लामाबाद के एक होटल में ठहरेंगे, जहां ये बातचीत होगी. बताया जा रहा है कि यह बैठक Iranian Revolution के बाद अमेरिका और ईरान के बीच सबसे उच्च स्तर की बैठक होगी.
क्या पुरानी शर्तों को मानेगा अमेरिका?
इस्लामाबाद पहुंचने के बाद ईरान के सरकारी मीडिया ने बताया कि ये वार्ता तभी होगी जब अमेरिका उनकी पहली शर्तों को मान लेगा.प्रतिनिधिमंडल के प्रमुख कालीबाफ ने एक्स (X) पर एक पोस्ट में कहा कि बातचीत शुरू होने से पहले दो अहम कदम उठाना जरूरी है, जिन पर दोनों पक्षों की सहमति बताई गई है. इनमें लेबनान में युद्धविराम और ईरान की रोकी गई संपत्तियों को जारी करना शामिल है.
उन्होंने कहा, "दोनों पक्षों के बीच तय किए गए दो कदम अभी तक पूरे नहीं हुए हैं- लेबनान में सीजफायर और बातचीत शुरू होने से पहले ईरान की ब्लॉक की गई संपत्तियों को जारी करना. इन दोनों शर्तों को पूरा करना जरूरी है."
क्या आसानी से खुल जाएगा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज?
वहीं, व्हाइट हाउस के अधिकारी भी इन वार्ताओं को लेकर पूरी तरह आश्वस्त नहीं हैं. रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, कुछ अधिकारियों का मानना है कि भले ही बातचीत सकारात्मक रहे, लेकिन स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को दोबारा खोलना आसान नहीं होगा.
इसी बीच, लेबनान में स्थिति को लेकर भी अनिश्चितता बनी हुई है. यह साफ नहीं है कि अमेरिका और ईरान के बीच हुए दो हफ्ते के युद्धविराम में लेबनान शामिल है या नहीं. उधर, लेबनान के राष्ट्रपति Joseph Aoun के कार्यालय ने कहा है कि लेबनान और इजराइल अगले मंगलवार से अपनी अलग सीधी बातचीत शुरू करेंगे. लेबनान की सरकार इजराइल और ईरान समर्थित संगठन Hezbollah के बीच जारी संघर्ष को खत्म करना चाहती है.