Artemis II: Pacific Ocean में सफल लैंडिंग, लेकिन असली परीक्षा अब शुरू..क्यों आइसोलेशन में रखे जाएंगे चांद से लौटे एस्ट्रॉनॉट्स?
Artemis II मिशन पूरा हो गया है. Pacific Ocean में सफल लैंडिंग में हो गई है अब सभी एस्ट्रॉनॉट्स को आइसोलेशन में रखा जाएगा. आखिर इसके पीछे क्या वजह है?
Artemis II मिशन के अंतरिक्ष यात्री 10 दिन का ऐतिहासिक चांद का सफर पूरा करने के बाद शनिवार सुबह (भारतीय समयानुसार) सुरक्षित पृथ्वी पर लौट आए. एस्ट्रॉनोट को लिए हुए स्पेसक्राफ्ट Pacific Ocean में लैंड किया.
NASA ने बताया कि जैसे ही यान पृथ्वी के वातावरण में दाखिल हुआ, एजेंसी ने दोबारा अंतरिक्ष यात्रियों से संपर्क स्थापित कर लिया. इस मिशन में कमांडर Reid Wiseman, पायलट Victor Glover, Christina Koch और कनाडा के Jeremy Hansen शामिल थे.
एस्ट्रॉनॉट्स का क्या है अपडेट?
लैंडिंग के बाद रिकवरी टीम अंतरिक्ष यात्रियों को अपने साथ ले गई, जहां उनकी मेडिकल जांच की गई और फिर उन्हें अमेरिकी सैन्य जहाज तक पहुंचाया गया. नासा के अधिकारियों के मुताबिक, सभी अंतरिक्ष यात्री सुरक्षित हालत में हैं. मिशन कमांडर रीड वाइसमैन ने कहा कि पूरी टीम स्टेबल है. नासा के पब्लिक अफेयर्स अधिकारी Rob Navias ने लाइवस्ट्रीम के दौरान बताया कि सभी की हालत बहुत अच्छी है.
प्रशांत महासागर में लैंडिंग के बाद अमेरिकी नौसेना के जहाज USS John P Murtha की रिकवरी टीम अंतरिक्ष यात्रियों को वापस लाने के लिए तैयार थी. टीम नावों के जरिए स्पेसक्राफ्ट ओरियन के दरवाजे से जुड़े एक फुलाए जाने वाले प्लेटफॉर्म (पोर्च) तक पहुंची. इसके बाद नौसेना के कर्मचारियों ने अंतरिक्ष यात्रियों की जांच की और उन्हें हेलीकॉप्टर के जरिए जहाज पर ले जाया गया.
लैंडिंग के बाद क्या-क्या होता है?
Artemis II मिशन के तहत लौटे अंतरिक्ष यात्रियों को लैंडिंग के बाद कुछ समय के लिए आइसोलेशन (क्वारंटीन) में रखा जाएगा. यह सिर्फ एक औपचारिक प्रक्रिया नहीं है, बल्कि इसके पीछे कई अहम वजहें हैं.
सबसे पहले बात स्वास्थ्य की है. अंतरिक्ष से लौटने के बाद शरीर तुरंत सामान्य नहीं होता. लंबे समय तक माइक्रोग्रैविटी में रहने की वजह से कमजोरी, चक्कर आना, मांसपेशियों की ताकत कम होना और संतुलन बिगड़ने जैसी समस्याएं हो सकती हैं. इसी वजह से NASA के डॉक्टर लगातार उनकी निगरानी करते हैं, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि वे सुरक्षित तरीके से सामान्य स्थिति में लौट रहे हैं.
दूसरा पहलू सावधानी से जुड़ा है. भले ही चंद्रमा पर जीवन के कोई पुख्ता संकेत नहीं मिले हैं, फिर भी वैज्ञानिक किसी भी संभावित जैविक जोखिम को नजरअंदाज नहीं करते. एहतियात के तौर पर यह सुनिश्चित किया जाता है कि अंतरिक्ष से कोई अज्ञात सूक्ष्म जीव या हानिकारक तत्व पृथ्वी पर न पहुंचे. इसी तरह की प्रक्रिया पहले भी अपनाई गई थी, जब Apollo 11 और Apollo 17 मिशनों के बाद अंतरिक्ष यात्रियों को कुछ समय के लिए क्वारंटीन में रखा गया था.
तीसरी वजह वैज्ञानिक अध्ययन है. अंतरिक्ष में बिताए गए समय का शरीर पर क्या असर पड़ता है, इसे समझना बेहद जरूरी होता है. हड्डियों की घनत्व में कमी, मांसपेशियों की कमजोरी और प्रतिरक्षा प्रणाली में बदलाव जैसे पहलुओं का विस्तार से अध्ययन किया जाता है. यह जानकारी भविष्य के लंबे अंतरिक्ष मिशनों, खासकर चंद्रमा और मंगल ग्रह की यात्राओं के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित होती है.
अब आगे क्या है NASA का प्लान?
NASA ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि वह पृथ्वी और चंद्रमा के बीच के अंतरिक्ष (सिसलूनर स्पेस) में इंसानों को सुरक्षित भेजने और वापस लाने में सक्षम है. अब इस मिशन से मिली जानकारी के आधार पर आर्टेमिस प्रोग्राम को आगे बढ़ाया जाएगा, ताकि 2028 में इंसानों को चंद्रमा पर उतारने का लक्ष्य पूरा किया जा सके. यह 56 साल बाद होगा, जब आखिरी बार इंसान चंद्रमा पर गए थे.
इस मिशन के दौरान दुनिया भर के लोगों को भी एक खास अनुभव मिला. करीब डेढ़ हफ्ते तक लोगों ने चंद्रमा की शानदार वीडियो और हाई-रेजोल्यूशन तस्वीरें देखीं, साथ ही दूर से पृथ्वी का नजारा भी देखा. इस दौरान आमतौर पर कम भावुक रहने वाले अंतरिक्ष यात्रियों ने भी अपने अनुभव साझा किए, जिसने लोगों को जोड़ने का काम किया.
क्या बोलीं Christina Koch?
नासा की अंतरिक्ष यात्री Christina Koch ने चंद्रमा के पास पहुंचने के अपने अनुभव के बारे में कहा, "जब मैंने चंद्रमा को देखा तो मैं भावुक हो गई. यह एहसास सिर्फ एक-दो सेकंड का था और मैं इसे दोबारा महसूस नहीं कर पाई, लेकिन उस पल मुझे ऐसा लगा जैसे मैं सच में चंद्रमा के करीब हूं."
उन्होंने आगे कहा, "चंद्रमा वास्तव में इस ब्रह्मांड में एक अलग ही तरह का पिंड है. जब हम इसे पृथ्वी से तुलना करते हैं, तो हमें एहसास होता है कि हमारे पास कितनी चीजें समान हैं. हमें जो भी चाहिए, वह सब पृथ्वी हमें देती है, और यह अपने आप में एक तरह का चमत्कार है."