Iran के वो 4 चिराग, जिनसे दुनिया में बनी धाक, अब ट्रंप की टेढ़ी नजर, जंग से भारत पर क्या असर?

ईरान इस वक्त जंग में अमेरिका और इजराइल पर धाक जमाता नजर आ रहा है. इतने लीडर्स मरने के बाद भी ऐसा महसूस होता है कि उसका खासा कुछ बिगड़ा नहीं है. इसके पीछे ये 'चार चिराग' है, जो जब तक ईरान के आंगन में रोशनी देते रहेंगे तब तक वह जंग में टिका रहेगा. अब ट्रंप की इन पर टेढ़ी नजर है.

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Edited By :  समी सिद्दीकी
Updated On : 27 March 2026 7:00 AM IST

Iran War: अमेरिका जिसे चाहे धुटनों पर ला सकता है, लेकिन ईरान के साथ जंग में यह धारणा गलत साबित होती दिख रही है. ईरान ने कई ऐसे कदम उठाए हैं, जिनकी वजह से आज पूरी दुनिया ईंधन के संकट से जूझ रही है, जिसकी वजह से अमेरिका पर भी काफी प्रभाव पड़ा है. ये जंग डायरेक्ट यानी गोला बारूद से प्रेशर बनाने के साथ-साथ 'इंडायरेक्ट वॉर' के तौर पर भी देखी जा रही है, जिसमें ईरान ने अलग-अलग स्ट्रेटजी अपनाकर पूरी दुनिया को संकट में डाल दिया है और इससे ट्रंप भी काफी परेशान हो गए हैं.

ईरान की इस धाक की वजह उसके चार चिराग हैं, जिससे वह सब कुछ कंट्रोल कर रहा है. अब ट्रंप चाहते हैं कि वह कैसे इन चार चिराग की लो को बुझा दें, ताकि तेहरान को कमजोर किया जा सके. इस मंशा के वह पहले ही संकेत दे चुके हैं और मिडिल ईस्ट के अलग-अलग देशों में सेना में बढ़ोतरी करना भी उसका ही एक संकेत माना जा रहा है.

कौन हैं Iran के चार चिराग?

  1. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़
  2. बाब-ए-मंडेब
  3. खार्ग आइलैंड
  4. अबू मूसा आइलैंड

क्यों है ईरान के ये चार चिराग अहम?

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ (Strait of Hormuz)

- यह फारस की खाड़ी और अरब सागर को जोड़ने वाला दुनिया का सबसे अहम समुद्री मार्ग है.

- दुनिया के तेल व्यापार का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है, इसलिए इसे ग्लोबल एनर्जी लाइफलाइन माना जाता है.

- ईरान इस जलडमरूमध्य के उत्तरी किनारे पर स्थित है, जिससे उसे यहां रणनीतिक बढ़त मिलती है.

ईरान ने इस जगह से गुजरने वाले जहाजों पर रोक लगा दी है, जिसकी वजह से भारत पर संकट मंडराने लगा है. भारत में एलपीजी के दामों में इजाफा हुआ है और दुनिया भर में ईंधन महंगा होने लगा है. हालांकि, ईरान कह रहा है कि वह उन देशों के जहाजों को यहां से निकलने की इजाजत दे रहा है जो दुश्मन नहीं है, लेकिन काफी कम जहाज ही यहां से गुजर पा रहे हैं.

बाब-ए-मंडेब (Bab-el-Mandeb)

- यह लाल सागर को अदन की खाड़ी से जोड़ता है और स्वेज नहर के जरिए यूरोप-एशिया व्यापार का अहम रास्ता है.

- यह दुनिया के सबसे व्यस्त शिपिंग रूट्स में से एक है.

- यमन के पास स्थित होने के कारण यह क्षेत्र पहले से ही संघर्ष प्रभावित रहा है.

यमन पर हूति कंट्रोल रखते हैं और वह इस रास्ते को बंद करने की बात कर रहे हैं. अगर ऐसा होता है यूरोप से पूरा व्यापार बाधित हो जाएगा. इससे पूरी दुनिया पर पूरा असर पड़ने वाला है. हालांकि भारत पर इसका खासा असर नहीं पड़ेगा.

खार्ग आइलैंड (Kharg Island)

- यह ईरान का सबसे बड़ा तेल निर्यात केंद्र है और देश के अधिकांश कच्चे तेल का निर्यात यहीं से होता है.

- यहां बड़े-बड़े तेल टर्मिनल और स्टोरेज सुविधाएं मौजूद हैं.

- यह फारस की खाड़ी में रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण स्थान पर है.

इसे ईरान की रीढ़ भी कहा जाता है. माना जा रहा है कि डोनाल्ड ट्रंप इस जगह पर कब्जा करने का प्लान बना रहे हैं. ताकि, ईरान को तोड़ा जा सकते. इसी वजह से ईरान ने यहां सुरक्षा को बढ़ा दिया है. अगर डोनाल्ड ट्रंप यहां कब्जा कर लेते हैं तो ईरान को ईंधन नहीं मिल सकेगा और उसकी तेल पर आधारित अर्थव्यवस्था चरमराने लगेगी.

अबू मूसा आइलैंड (Abu Musa Island)

- यह फारस की खाड़ी में स्थित एक रणनीतिक द्वीप है, जिस पर ईरान का नियंत्रण है, लेकिन यूएई भी इस पर दावा करता है.

- यह स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ के पास स्थित है, जिससे इसका सैन्य महत्व और बढ़ जाता है.

- यहां ईरान की सैन्य मौजूदगी है, जो समुद्री गतिविधियों पर नजर रखती है. आसान भाषा में समझें तो यहां से ईरान समुंद्र में हो रही सभी एक्टिविटीज पर नजर बनाए रखता है.

भारत पर क्या होगा असर?

स्ट्रेट ऑफ हार्मोज़ पर ईरान के कंट्रोल का असर सीधे तौर पर भारत की ईंधन इंडस्ट्री पर दिखने लगा है. एलपीजी की कमी से कीमतों में इजाफा हुआ है. वहीं लोग शिकायत कर कर रहे हैं कि उन्हें गैस सिलेंडर कई गुना महंगे दाम में मिल रहे हैं. कई जगहों पर रेस्टोरेंट्स पर ताले लग लग हैं और कई होटलों को अपना मेन्यू कम करना पड़ा है या फिर खाने के दाम बढ़ाने पड़े हैं.

वहीं, भारत का यूरोप के साथ बड़ा व्यापार लाल सागर और स्वेज नहर के रास्ते होता है, जो बाब-ए-मंडेब से जुड़ा है. अगर यहां संकट बढ़ता है, तो जहाजों को लंबा रास्ता (अफ्रीका के चक्कर से) लेना पड़ेगा, जिससे समय और लागत दोनों बढ़ेंगे. इसका असर भारत के निर्यात, खासकर टेक्सटाइल, इंजीनियरिंग और फार्मा सेक्टर पर पड़ेगा.

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