मासूमों को जंग में झोंक रहा है Iran! 12 साल के बच्चों की सेना में भर्ती, आखिर Tehran को क्यो लेना पड़ा ये फैसला
ईरान के एक फैसले ने दुनिया को चौंका दिया है, जिसमें 12 साल तक के बच्चों को भी युद्ध से जुड़े कामों में शामिल करने की बात कही गई है. इस कदम को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं.
Iran News: ईरान ने कहा है कि अब 12 साल तक के बच्चे भी युद्ध से जुड़े सहायक कार्यों में शामिल हो सकते हैं. देश के सरकारी मीडिया के अनुसार, ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स (IRGC) के एक अधिकारी ने बताया कि युद्ध से जुड़े सपोर्ट रोल्स के लिए न्यूनतम उम्र घटा दी गई है.
Iran International English के मुताबिक, तेहरान में गार्ड्स के सांस्कृतिक अधिकारी रहीम नदाली ने कहा कि “फॉर ईरान” नाम की पहल के तहत लोगों को गश्त, चेकपोस्ट और लॉजिस्टिक्स जैसे कामों में मदद के लिए भर्ती किया जा रहा है.
कम उम्र के बच्चों को जंग में क्यों झोक रहा है ईरान?
रहीम नदाली ने कहा कि जो लोग आगे आ रहे हैं उनकी उम्र कम हो रही है और वे हिस्सा लेना चाहते हैं, इसलिए हमने न्यूनतम उम्र 12 साल कर दी है.” उन्होंने यह भी जोड़ा कि 12 और 13 साल के बच्चे भी अपनी इच्छा से इसमें भाग ले सकते हैं.
ये बयान सरकारी मीडिया में युद्ध से जुड़ी कवरेज के दौरान प्रसारित किए गए. यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है, जबकि ईरान ने बाल अधिकारों पर संयुक्त राष्ट्र के कन्वेंशन के तहत बच्चों को सैन्य गतिविधियों में शामिल न करने का वादा किया हुआ है.
ट्रंप की ईरान को चेतावनी?
इससे पहले अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को चेतावनी देते हुए कहा कि वह जल्द से जल्द समझौते के लिए गंभीर हो जाए, नहीं तो उसे “अंतिम झटका” झेलना पड़ सकता है. ट्रंप का यह बयान ऐसे समय में आया है, जब उन्होंने एक दिन पहले कहा था कि युद्ध खत्म करने के लिए समझौता करीब है, हालांकि तेहरान ने उनके 15 बिंदुओं वाले सीजफायर प्लान को खारिज कर दिया था.
ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य में उन जहाजों को रोकना शुरू कर दिया है, जिन्हें वह अमेरिका और इजराइल के युद्ध प्रयासों से जुड़ा मानता है, जबकि कुछ अन्य जहाजों को सीमित रूप से गुजरने दिया जा रहा है. खाड़ी सहयोग परिषद के महासचिव जासेम मोहम्मद अल-बुदैवी ने कहा कि ईरान इस जलमार्ग से सुरक्षित गुजरने के लिए शुल्क भी वसूल रहा है.
इस बीच अमेरिका हजारों सैनिकों को तैनात करने की तैयारी कर रहा है, जिन्हें जरूरत पड़ने पर ईरान में जमीनी कार्रवाई के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है. युद्ध में मरने वालों की संख्या लगातार बढ़ रही है. ईरान में 1,900 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि लेबनान में करीब 1,100 लोगों की जान गई है. इसके अलावा इजराइल और अन्य क्षेत्रों में भी कई लोगों की मौत हुई है. अमेरिकी सेना के 13 जवान भी इस संघर्ष में मारे गए हैं. वहीं, लेबनान और ईरान में लाखों लोग अपने घर छोड़ने को मजबूर हो गए हैं.