IRGC का '3H' कनेक्शन जो नहीं टूटने देता Iran की कमर, गाजा से यमन तक ऐसे फैली है मिलिशिया मशीन
ईरान का 3H कनेक्शन उसे एक्सट्रा स्पोर्ट देने का काम करता है. जब भी इस्लामिक मुल्क पर कोई मुसीबत आती है को ये मिलिशिया का जाल एक्टिव हो जाता है और विरोधी देश पर हमले शुरू कर देता है. इस मिलिशिया संगठन को आईआरजीसी सपोर्ट करने का काम करता है.
US-Iran-Israel War: 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद, ईरानी शासन की प्रमुख प्राथमिकताओं में से एक इसका प्रभाव विदेशों तक फैलाना रहा है. 1984 में अमेरिका ने ईरान को आतंकवाद का प्रायोजक घोषित किया गया था. ऐसा माना जाता है कि ईरान एक ऐसा देश है जिसकी पूरी दुनिया में सबसे पावरफुल प्रॉक्सीज़ हैं.
ईरान पर इल्जाम लगता है कि दुनिया भर में आतंकवादी समूहों को फाइनेंशल सपोर्ट, ट्रेनिंग और हथियार उपलब्ध कराता है, खास तौर पर लेबनान है हिज़बुल्लाह को. ईरान अपनी 3H प्रॉक्सीज़ के लिए काफी मशहूर है. हमास, हिज़बुल्लाह और हूती. जब भी ईरान पर कोई आंच आती हैं तो ये संगठन एकदम एक्टिव हो जाती हैं.
कैसे काम करती हैं ये प्रॉक्सी?
तेहरान ने मध्य पूर्व में दर्जनों मिलिशिया और आतंकवादी समूहों का इस्तेमाल किया है. ये समूह ईरानी इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के अधीन काम करते हैं. IRGC की विशेष ऑपरेशन यूनिट, कुद्स फोर्स, ने मध्य पूर्व के देशों जैसे बहरीन, इराक, लेबनान, फिलिस्तीन, सीरिया और यमन में हथियार, प्रशिक्षण और वित्तीय सहायता प्रदान की है. आइये जानते हैं ईरान की 3H प्रॉक्सी के बारे में.
- हमास
हमास, या हरकत अल-मुक़ावमा अल-इस्लामियाह, एक सुन्नी इस्लामी आतंकवादी संगठन है जो गाजा पट्टी का नेतृत्व करता है. 1988 में पहली इंटिफ़ादा के दौरान मुस्लिम ब्रदरहुड से अलग होकर इसका गठन हुआ. इसका टारगेट इज़राइल की समाप्ति और एक इस्लामी राज्य की स्थापना है. हमास चाहता है कि वही फिलिस्तीन दोबारा से बने जो इजराइल बनने से पहले था.
ईरान ने 1990 के दशक से ही IRGC के माध्यम से हमास को वित्तीय, हथियार और प्रशिक्षण सहायता दी थी. हालांकि 2012 में ईरान ने सीरिया गृहयुद्ध में असद का समर्थन न करने के कारण हमास को वित्तीय सहायता रोक दी थी, लेकिन 2017 में फिर से वित्तीय सहायता शुरू हुई. हमास के वरिष्ठ नेता याह्या सिनवार के अनुसार, “ईरान हमास के सैन्य विंग, इज्ज़ अद-दीन अल-क़ासम ब्रिगेड्स को सबसे बड़ा समर्थन देता है.”
- हिज़हुल्लाह
हिज़बुल्लाह, लेबनान में एक्टिव है. यह संगठन लेबनानी सरकार पर भी व्यापक प्रभाव रखता है. इसका गठन 1980 के दशक में लेबनानी सियाह युद्ध के दौरान शिया मुसलमानों के बीच हुआ. हिज़बुल्लाह ने 1984 में बेरूत में अमेरिकी दूतावास पर बम हमला किया जिसमें 63 लोग मारे गए.
हिज़बुल्लाह ने यूरोप, लैटिन अमेरिका और अफ्रीका में आतंकवादी नेटवर्क भी स्थापित किए हैं. 1994 में बुएनस आयर्स में AMIA सेंटर पर हमला, 2012 में बुल्गारिया में इजराइली पर्यटकों पर हमला का इसी संगठन पर आरोप है.
- हूती
हौती आंदोलन यमन में ईरान समर्थित है और उन्हें IRGC ने 2011 से समर्थन दिया है. 2015 में सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन के यमन युद्ध में हस्तक्षेप के बाद ईरान ने ट्रेनिंग और हथियार आपूर्ति बढ़ा दी थी.
हूतियों ने सऊदी अरब और यूएई पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए हैं. जनवरी 2022 में हूतियों ने अबू धाबी पर हमले में तीन लोग मारे गए और छह घायल हुए. अक्टूबर 2023 में हमास ने इजराइल पर हमला किया और इसके बाद इजराइळ ने जब गाजा पर हमले किए तो हूतियों ने लाल सागर में जहाजों पर हमले और इज़राइल पर मिसाइल‑ड्रोन हमले तेज कर दिए थे.
इस दौरान हूतियों ने अमेरिकी जहाज़ को भी कब्जे में ले लिया था. अमेरिका ने दिसंबर 2023 में हूतियों के हमलों को रोकने के लिए एक नौसैनिक टास्क फोर्स बनाया था, जिसमें ब्रिटेन, कनाडा, फ्रांस, बहरीन, नॉर्वे और स्पेन शामिल हैं.