T-20 से पहले ड्रामा! बांग्लादेश में नहीं होगा IPL का प्रसारण, मुस्तफिजुर विवाद के बाद यूनुस सरकार का फैसला
बांग्लादेश सरकार ने इंडियन प्रीमियर लीग के ब्रॉडकास्ट और विज्ञापन पर अनिश्चितकालीन रोक लगा दी है. यह कदम कोलकाता नाइट राइडर्स से बांग्लादेशी गेंदबाज़ मुस्तफिज़ुर रहमान को बाहर किए जाने के बाद उठाया गया. ढाका ने इस फैसले को अपमानजनक बताया है. मामला अब क्रिकेट तक सीमित नहीं, बल्कि भारत-बांग्लादेश संबंधों, सॉफ्ट पावर और क्रिकेट डिप्लोमेसी से जुड़ गया है.;
बांग्लादेश सरकार ने Indian Premier League (IPL) के प्रसारण पर रोक लगाने का फैसला किया है. यह कदम बांग्लादेशी तेज गेंदबाज Mustafizur Rahman से जुड़े हालिया विवाद के बाद उठाया गया है. सरकारी सूत्रों के मुताबिक, मौजूदा हालात और जनभावनाओं को देखते हुए यह निर्णय लिया गया है. बताया जा रहा है कि अंतरिम सरकार के प्रमुख Muhammad Yunus के नेतृत्व में यह फैसला लिया गया, जिसके तहत बांग्लादेश में IPL मैचों का आधिकारिक टीवी और डिजिटल प्रसारण नहीं किया जाएगा. इस फैसले से क्रिकेट प्रेमियों में नाराजगी देखी जा रही है, वहीं खेल और कूटनीति के रिश्तों पर भी नई बहस छिड़ गई है.
बांग्लादेश सरकार द्वारा इंडियन प्रीमियर लीग के ब्रॉडकास्ट और विज्ञापन पर अनिश्चितकालीन प्रतिबंध महज़ एक खेल संबंधी फैसला नहीं है, बल्कि यह साफ तौर पर राजनीतिक संदेश भी देता है. कोलकाता नाइट राइडर्स से बांग्लादेशी तेज़ गेंदबाज़ मुस्तफिज़ुर रहमान को बाहर किए जाने के बाद लिया गया यह कदम दिखाता है कि क्रिकेट अब सिर्फ मैदान तक सीमित नहीं, बल्कि राष्ट्रों की प्रतिष्ठा और आंतरिक राजनीति से भी जुड़ चुका है. बांग्लादेश के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने स्पष्ट कहा कि इंडियन प्रीमियर लीग में मुस्तफिज़ुर को बाहर करने का कोई “ठोस और तार्किक” कारण नहीं बताया गया. सरकार ने इसे बांग्लादेशी जनता का अपमान करार देते हुए IPL के प्रचार, प्रसारण और री-टेलीकास्ट पर रोक लगा दी. यह भाषा बताती है कि मामला खेल से आगे बढ़कर राष्ट्रीय सम्मान के विमर्श में बदल चुका है.
स्टेट मिरर अब WhatsApp पर भी, सब्सक्राइब करने के लिए क्लिक करें
BCCI–KKR का फैसला
3 जनवरी को कोलकाता नाइट राइडर्स द्वारा मुस्तफिज़ुर को रिलीज़ किया गया. बांग्लादेश में इसे सीधे तौर पर BCCI के दबाव से जोड़ा गया. भारत में अल्पसंख्यक हिंदुओं पर हिंसा की खबरों के बीच यह मुद्दा और संवेदनशील हो गया, जिससे खेल का फैसला सांप्रदायिक और राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गया.
ढाका का जवाब: क्रिकेट डिप्लोमेसी
बांग्लादेश का IPL बैन असल में “क्रिकेट डिप्लोमेसी” का उदाहरण है. जहां खेल के ज़रिए असहमति जताई जाती है. यह संदेश दिया गया कि अगर बांग्लादेशी खिलाड़ियों के साथ ऐसा व्यवहार होगा, तो मनोरंजन और बाज़ार तक उसकी प्रतिक्रिया पहुंचेगी. IPL जैसे बड़े ब्रांड पर रोक लगाना भारत के लिए आर्थिक नहीं, बल्कि सॉफ्ट-पावर के स्तर पर चुनौती है.
वर्ल्ड कप से दूरी का संकेत
इस फैसले से ठीक पहले बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड का टी-20 वर्ल्ड कप को लेकर रुख भी बदला दिखा. भारत में मैच खेलने से इनकार और उन्हें श्रीलंका शिफ्ट कराने की मांग—यह सब बताता है कि खेल कैलेंडर अब राजनीतिक समीकरणों से तय हो रहा है. यह वही रास्ता है, जिस पर भारत–पाकिस्तान क्रिकेट पहले से चल रहा है.
पाकिस्तान मॉडल की पुनरावृत्ति
पाकिस्तान पहले ही भारत में ICC इवेंट खेलने से इनकार कर चुका है और अपने मैच तटस्थ स्थानों पर खेलता है. अगर बांग्लादेश भी यही रास्ता अपनाता है, तो यह भारत के लिए नया नहीं, लेकिन चिंता बढ़ाने वाला संकेत होगा. क्रिकेट, जो कभी दक्षिण एशिया को जोड़ने का ज़रिया था, अब दूरी बढ़ाने का माध्यम बनता दिख रहा है.
ग्रुप की मुश्किलें और मैदान की सच्चाई
टी-20 वर्ल्ड कप 2026 में बांग्लादेश का ग्रुप पहले से ही चुनौतीपूर्ण है, जहां इंग्लैंड, वेस्टइंडीज़, साउथ अफ्रीका और न्यूज़ीलैंड जैसी दिग्गज टीमें हैं. ऐसे में राजनीतिक तनाव के बीच खेल की तैयारी प्रभावित होना बांग्लादेश के लिए जोखिम भरा है. सवाल उठता है कि क्या भावनात्मक फैसले क्रिकेटिंग हितों पर भारी पड़ रहे हैं?
बन गया अंतरराष्ट्रीय विवाद
मुस्तफिज़ुर रहमान का IPL से बाहर होना एक स्पोर्टिंग कॉल था, लेकिन उस पर बांग्लादेश की प्रतिक्रिया ने इसे अंतरराष्ट्रीय विवाद बना दिया. यह पूरा घटनाक्रम बताता है कि उपमहाद्वीप में क्रिकेट अब केवल खेल नहीं रहा—यह पहचान, राजनीति और शक्ति प्रदर्शन का मंच बन चुका है. आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि क्या दोनों देश इस टकराव को सीमित रख पाते हैं, या क्रिकेट की यह लड़ाई और बड़े मंचों तक जाएगी.