ईरान में भारतीय नागरिक गिरफ्तार! खामेनेई विरोधी प्रदर्शनों में हो रहे दावों की क्या है सच्चाई? राजदूत ने कर दिया क्लियर

ईरान में खामेनेई विरोधी प्रदर्शनों के बीच सोशल मीडिया पर भारतीय नागरिकों की गिरफ्तारी के दावे सामने आए, लेकिन ईरानी राजदूत ने इन्हें फर्जी बताया है. सैकड़ों मौतों और हजारों गिरफ्तारियों के दावों के बीच अमेरिका-ईरान तनाव चरम पर है. क्या अमेरिका सैन्य कार्रवाई करेगा? क्या इजरायल निशाने पर है? जानिए ईरान विरोध प्रदर्शनों, इंटरनेट ब्लैकआउट और अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रियाओं की पूरी फैक्ट-चेक रिपोर्ट.;

Edited By :  नवनीत कुमार
Updated On : 12 Jan 2026 8:14 AM IST

2026 की शुरुआत के साथ ही ईरान एक बड़े राजनीतिक संकट से गुजर रहा है. बढ़ती महंगाई, गिरती मुद्रा और सख्त शासन के खिलाफ सड़कों पर उतरे लोगों ने हालात को विस्फोटक बना दिया है. तेहरान से लेकर दूसरे बड़े शहरों तक विरोध-प्रदर्शन फैल चुके हैं. इसी बीच सोशल मीडिया पर कई दावे तेजी से वायरल हुए, जिनमें विदेशी नागरिकों की गिरफ्तारी तक की बातें कही गईं.

मानवाधिकार संगठनों और अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान में सुरक्षा बलों की कार्रवाई में अब तक 500 से ज्यादा लोगों की मौत का दावा किया जा रहा है. हजारों प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाने की भी खबरें हैं. हालांकि, ईरानी सरकार ने आधिकारिक तौर पर कुल हताहतों के आंकड़े जारी नहीं किए हैं. इसी सूचना-अंधकार में अफवाहों और अपुष्ट खबरों को हवा मिल रही है.

क्या ईरान में भारतीय नागरिक गिरफ्तार हुए?

इसी माहौल में यह दावा भी सामने आया कि ईरानी पुलिस ने कई भारतीय नागरिकों को गिरफ्तार किया है. लेकिन भारत में ईरान के राजदूत मोहम्मद फतहअली ने इन खबरों को सिरे से खारिज कर दिया. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर बयान जारी कर कहा कि कुछ विदेशी अकाउंट्स से फैलाई जा रही ये खबरें पूरी तरह झूठी हैं. साथ ही लोगों से केवल विश्वसनीय स्रोतों पर भरोसा करने की अपील की गई.

इंटरनेट बंद, वीडियो से सामने आ रही सच्चाई

ईरान में इंटरनेट और फोन सेवाएं बाधित होने के कारण बाहर की दुनिया के लिए हालात समझना मुश्किल हो गया है. इसके बावजूद कुछ वीडियो सामने आए हैं, जिनमें तेहरान के पुनक इलाके में रात के वक्त प्रदर्शन दिखाए गए हैं. लोग मोबाइल की रोशनी जलाकर सड़कों पर खड़े नजर आते हैं. माना जा रहा है कि ये वीडियो सैटेलाइट इंटरनेट के जरिए बाहर भेजे गए.

सड़कों पर प्रदर्शन, संसद में सख्त बयान

तेहरान के अलावा मशहद, केरमान और अन्य शहरों से भी विरोध की खबरें आई हैं. उधर, ईरानी संसद और सरकारी मीडिया का रुख सख्त होता जा रहा है. वरिष्ठ नेता अली लारिजानी ने कुछ प्रदर्शनकारियों की तुलना आतंकवादी संगठनों से कर दी. सरकारी टीवी ने सुरक्षा बलों के अंतिम संस्कार दिखाते हुए हिंसा के लिए प्रदर्शनकारियों को जिम्मेदार ठहराया.

अमेरिका की चेतावनी और ट्रंप का सख्त रुख

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि अमेरिका ईरान में हालात पर करीबी नजर रखे हुए है. उन्होंने यह भी संकेत दिया कि सैन्य विकल्प समेत कई प्रतिक्रियाओं पर विचार किया जा रहा है. ट्रंप के मुताबिक, अगर अमेरिकी हितों या सहयोगियों पर हमला हुआ तो जवाब अभूतपूर्व होगा. इन बयानों से मध्य पूर्व में तनाव और बढ़ गया है.

ईरान की खुली धमकी और इजरायल फैक्टर

ईरानी नेतृत्व ने भी पलटवार में कड़े शब्दों का इस्तेमाल किया है. संसद के स्पीकर मोहम्मद बाकर क़ालिबाफ़ ने कहा कि किसी भी हमले की स्थिति में अमेरिकी ठिकाने और इजरायल “वैध लक्ष्य” होंगे. संसद में ‘डेथ टू अमेरिका’ के नारे भी गूंजे. इससे साफ है कि टकराव की भाषा अब कूटनीति से आगे निकल चुकी है.

महंगाई से शुरू हुआ आंदोलन, सत्ता को चुनौती

ये प्रदर्शन 28 दिसंबर को ईरानी रियाल की भारी गिरावट से शुरू हुए थे. देखते ही देखते यह आंदोलन सीधे शासन व्यवस्था और सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के खिलाफ नारों तक पहुंच गया. अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों और आर्थिक दबाव ने गुस्से को और भड़काया. अब सवाल यह है कि क्या यह आंदोलन दबा दिया जाएगा, या ईरान एक बड़े बदलाव की ओर बढ़ रहा है.

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