US से 5 साल में 500 अरब डॉलर की खरीद! ट्रंप ने घटाया टैरिफ, क्या किसान सेफ रहेंगे?
भारत और अमेरिका के बीच हुए नए ट्रेड डील में भारत 5 साल तक सालाना 100 अरब डॉलर की खरीद करेगा. सरकार का दावा है कि कृषि और डेयरी सेक्टर पूरी तरह सुरक्षित हैं.;
भारत और अमेरिका के बीच हुए नए ट्रेड डील ने ग्लोबल मार्केट में हलचल मचा दी है. इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, इस डील के तहत भारत अगले पांच साल तक हर साल अमेरिका से करीब 100 अरब डॉलर के उत्पाद खरीदने के लिए तैयार है. यानी कुल मिलाकर यह सौदा 500 अरब डॉलर से ज्यादा का बनता है, जो अब तक की सबसे बड़ी भारत-अमेरिका ट्रेड कमिटमेंट में से एक है.
खास बात यह है कि यह डील ऐसे वक्त आई है, जब अमेरिका ने भारत पर लगाए गए भारी-भरकम टैरिफ को घटाकर 18 फीसदी कर दिया है. पहले यह टैरिफ अगस्त 2005 से 50 फीसदी तक पहुंच चुका था. सवाल यही है. भारत क्या खरीदेगा, अमेरिका को कितना फायदा होगा और क्या भारतीय किसानों के हित सुरक्षित रहेंगे?
भारत अमेरिका से सालाना 100 अरब डॉलर का क्या-क्या खरीदेगा?
इस डील के तहत भारत अमेरिका से एयरक्राफ्ट, हाई-टेक टेक्नोलॉजी, कीमती धातुएं, कच्चा तेल, न्यूक्लियर प्रोडक्ट्स और कृषि उत्पाद खरीदेगा. इसके अलावा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के मुताबिक, भारत एनर्जी, कोयला, एग्रीकल्चर और टेक सेक्टर में भी बड़े ऑर्डर देगा.
पिछले साल के मुकाबले यह डील कितनी बड़ी है?
FY25 में भारत ने अमेरिका से सिर्फ 45.62 अरब डॉलर का आयात किया था, जबकि अमेरिका को 86.51 अरब डॉलर का निर्यात किया गया था. नए समझौते के तहत आयात की रकम दो गुने से भी ज्यादा हो जाएगी, जिससे ट्रेड बैलेंस पूरी तरह बदल सकता है.
भारत ने कृषि सेक्टर में कहां ‘रेड लाइन’ खींची?
सूत्रों के मुताबिक, भारत ने कृषि क्षेत्र को आंशिक रूप से खोला है, लेकिन GM (Genetically Modified) उत्पाद, सोया मील, पोल्ट्री, मक्का, अनाज और कॉर्न पर सुरक्षा बरकरार रखी है. यानी साफ है. सरकार किसानों को लेकर कोई रिस्क नहीं लेना चाहती.
किन कृषि उत्पादों को मिला अमेरिकी बाजार एक्सेस?
भारत ने उन प्रोडक्ट्स को एक्सेस दिया है, जो पहले से दूसरे देशों के लिए खुले थे.
जैसे-
- सेब (Apples)
- वाइन, स्पिरिट्स और बीयर
- पहले ही भारत न्यूजीलैंड को सेब और यूरोपीय यूनियन को कीवी व नाशपाती का एक्सेस दे चुका है.
सरकार ने किसानों को लेकर क्या भरोसा दिया?
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने साफ कहा कि प्रधानमंत्री लगातार किसानों, पशुपालकों और डेयरी सेक्टर से जुड़े लोगों की चिंता करते हैं. उन्होंने कभी भी उनके हितों से समझौता नहीं किया… इस अमेरिका ट्रेड डील में कृषि और डेयरी जैसे संवेदनशील सेक्टर पूरी तरह सुरक्षित हैं.”
अमेरिका को इस डील से क्या फायदा होगा?
अमेरिकी कृषि मंत्री ब्रूक रोलिंस के मुताबिक, “यह डील अमेरिकी कृषि उत्पादों को भारत के विशाल बाजार तक पहुंच देगी, जिससे कीमतें बढ़ेंगी और ग्रामीण अमेरिका में नकदी पहुंचेगी.” 2024 में अमेरिका का भारत के साथ कृषि ट्रेड घाटा 1.3 अरब डॉलर था, जिसे यह डील काफी हद तक कम कर सकती है.
ट्रंप के टैरिफ बढ़ाने पर मोदी ने क्या रुख अपनाया था?
7 अगस्त को जब ट्रंप ने भारत पर टैरिफ 50 फीसदी कर दिया था, तब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साफ कहा था- “चाहे मुझे कितनी भी भारी व्यक्तिगत कीमत क्यों न चुकानी पड़े, मैं भारतीय किसानों के हितों से समझौता नहीं करूंगा.” स्वतंत्रता दिवस भाषण में भी उन्होंने दोहराया, “भारतीय किसान, मछुआरे और पशुपालक हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता हैं. भारत उनके हितों से कभी समझौता नहीं करेगा.”
किसान संगठनों ने इस डील पर क्या चेतावनी दी थी?
भारतीय किसान समन्वय समिति (ICCFM) ने सरकार को चिट्ठी लिखकर कहा था कि अगर अमेरिकी कृषि उत्पादों को ड्यूटी-फ्री एंट्री दी गई तो इसका भारतीय किसानों पर गंभीर असर पड़ेगा. ICCFM के मुताबिक- US का कृषि ट्रेड घाटा लगभग दोगुना हो चुका है. सोयाबीन एक्सपोर्ट 34.4 अरब डॉलर से घटकर 24.5 अरब डॉलर, कॉर्न एक्सपोर्ट 18.6 अरब से गिरकर 13.9 अरब डॉलर, ऐसे में अमेरिका अपना सरप्लस भारत जैसे बाजारों में खपाना चाहता है.