Hormuz पर बढ़ता तनाव, ट्रंप के नाकाबंदी करने के पीछे क्या है मंशा? भारत के लिए खतरे की घंटी!
Iran और United States के बीच बढ़ते तनाव के बीच Strait of Hormuz पर नाकेबंदी की आशंका ने पूरी दुनिया की चिंता बढ़ा दी है. अमेरिका के कदम और ईरान की सख्ती के बीच यह टकराव अब ‘ऑयल वॉर’ का रूप लेता दिख रहा है, जिसका सीधा असर भारत की अर्थव्यवस्था और आम लोगों की जेब पर पड़ सकता है.
America Blockade on Hormuz: Iran और United States के बीच पाकिस्तान में हुई हालिया शांति वार्ता बिना किसी समझौते के खत्म हो गई है, जिसके बाद एक बार फिर तनाव बढ़ गया है. अब पूरी दुनिया की नजर Strait of Hormuz पर टिकी है, जो दुनिया के सबसे अहम तेल मार्गों में से एक है. यह मार्ग पूरी तरह खुला भी नहीं है और बंद भी नहीं.
एक तरफ ईरान ने यहां से गुजरने वाले जहाजों पर सख्त नियंत्रण लगाया हुआ है, तो दूसरी तरफ अमेरिका खुलकर नाकेबंदी की बात कर रहा है. ऐसे में सवाल उठता है कि जब रास्ता पहले से सीमित है, तो इसे पूरी तरह बंद करने की जरूरत क्यों है और इसका असर भारत पर क्या होगा.
ईरान कैसे कर रहा है इस रास्ते का इस्तेमाल?
ईरान इस रास्ते का इस्तेमाल अपने आर्थिक हितों की रक्षा के लिए कर रहा है, जबकि अमेरिका इसे ईरान पर दबाव बनाने के हथियार के रूप में देख रहा है. यही वजह है कि यह टकराव अब 'ऑयल वॉर' का रूप लेता जा रहा है, जहां हर फैसला वैश्विक अर्थव्यवस्था पर सीधा असर डाल सकता है.
डोनाल्ड ट्रंप ने क्या कह?
अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने रविवार को कहा कि उन्हें इस बात से फर्क नहीं पड़ता कि ईरान बातचीत की मेज पर लौटता है या नहीं. उन्होंने ईरान को 'बहुत खराब हालत' और 'बेहद मजबूर' बताया. इसके बाद ट्रंप ने 13 अप्रैल 2026 से होर्मुज की नाकेबंदी शुरू करने का आदेश दिया है, जो इस टकराव में बड़ा कदम माना जा रहा है.
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के पास क्या कर रही है अमेरिकी सेना?
अमेरिकी नौसेना को निर्देश दिए गए हैं कि वह इस जलमार्ग से गुजरने वाले जहाजों की आवाजाही को तुरंत रोकना शुरू करे. अमेरिका का कहना है कि यह कदम ईरान द्वारा कथित तौर पर वसूले जा रहे “टोल” को खत्म करने के लिए उठाया गया है. अमेरिकी सेना को अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में उन जहाजों को रोकने का आदेश भी दिया गया है, जिन्होंने ईरान को भुगतान किया है. साथ ही, अमेरिका ने उन समुद्री बारूदी सुरंगों को नष्ट करने के लिए भी अभियान शुरू किया है, जिन्हें ईरान द्वारा बिछाया गया बताया जा रहा है, ताकि इस मार्ग को “सुरक्षित” बनाया जा सके.
क्या ईरान पर हवाई हमले का विचार कर रहा अमेरिका?
इसके अलावा खबर है कि ट्रंप ईरान के इंफ्रास्ट्रक्चर पर और हवाई हमले करने पर भी विचार कर रहे हैं, जिनमें पानी शुद्धिकरण संयंत्र, पुल और बिजली उत्पादन केंद्र शामिल हो सकते हैं. उन्होंने चीन को भी चेतावनी दी है कि अगर वह इस संघर्ष में ईरान की मदद करता पाया गया, तो उस पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगाया जा सकता है.
इस कदम के पीछे क्या है अमेरिका का असल मकसद?
अमेरिका का मुख्य उद्देश्य ईरान की अर्थव्यवस्था को कमजोर करना है, क्योंकि इस जलमार्ग से हर दिन करीब 20 लाख बैरल तेल का निर्यात होता है. ट्रंप ने इसे “समुद्री आवाजाही की आजादी” बहाल करने का कदम बताया है. उनका कहना है कि ईरान ने 28 फरवरी को इस मार्ग को प्रभावी रूप से बंद कर दिया था, जिसके कारण वैश्विक तेल कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई थीं.
ट्रंप ने यह भी कहा कि कुछ जहाज पारंपरिक रास्तों को छोड़कर दूसरे मार्गों से तेल ले जा रहे हैं, लेकिन इस स्थिति को जल्द ही “सुधारा” जाएगा. उन्होंने कहा कि “कल सुबह 10 बजे से नाकेबंदी लागू हो जाएगी और इससे ईरान तेल नहीं बेच पाएगा, जो बहुत असरदार होगा.” ट्रंप के इस रुख से साफ है कि अमेरिका इस समुद्री मार्ग का इस्तेमाल केवल कूटनीतिक नहीं, बल्कि रणनीतिक हथियार के तौर पर भी करना चाहता है, जिससे क्षेत्रीय तनाव और बढ़ सकता है.
भारत पर इसका क्या असर होगा?
भारत पर इसका सीधा असर पड़ सकता है, क्योंकि भारत अपनी करीब 80 प्रतिशत कच्चे तेल की जरूरत आयात से पूरी करता है, जिसमें ज्यादातर हिस्सा खाड़ी देशों से आता है. अगर होर्मुज मार्ग प्रभावित होता है, तो भारत के लिए तेल आयात महंगा हो जाएगा, जिससे पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ सकते हैं और महंगाई पर असर पड़ सकता है. इसके अलावा रुपये की कीमत पर दबाव पड़ सकता है और व्यापार घाटा भी बढ़ सकता है.
इस स्थिति से निपटने के लिए भारत भी सक्रिय हो गया है. भारत के विदेश मंत्री S. Jaishankar ने हाल ही में यूएई के राष्ट्रपति शेख नाहयान से मुलाकात की. विशेषज्ञों के अनुसार, भारत अब अपने कच्चे तेल के स्रोतों में बदलाव करने की योजना बना रहा है, ताकि ओमान और दुबई पर निर्भरता कम की जा सके.
Iran और United States के बीच बढ़ते तनाव के बीच Strait of Hormuz पर नाकेबंदी की आशंका ने पूरी दुनिया की चिंता बढ़ा दी है. अमेरिका के कदम और ईरान की सख्ती के बीच यह टकराव अब ‘ऑयल वॉर’ का रूप लेता दिख रहा है, जिसका सीधा असर भारत की अर्थव्यवस्था और आम लोगों की जेब पर पड़ सकता है.