Bangladesh Elections 2026: 'हम यहीं के हैं, फिर भी डर क्यों', चुनाव से पहले क्यों है बांग्लादेशी हिंदुओं में बैचेनी?

बांग्लादेश में 12 फरवरी को चुनाव होने हैं और इससे पहले हिंदू समुदाय में बैचेनी देखने को मिल रही है. आरोप है कि चुनावी पार्टियां जो दावा कर रही हैं, ज़मीनी हकीकत उसके उलट है.;

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Edited By :  समी सिद्दीकी
Updated On : 11 Feb 2026 10:46 AM IST

Bangladesh Elections 2026: बांग्लादेश पर लगातार इल्जाम लगते आए हैं कि वहां हिंदुओं के साथ भेदभाव होता है और हाल ही के मामलों में गुस्साई भीड़ ने कई हिंदू समुदाय के लोगों की हत्या भी की है. 12 फरवरी को बांग्लादेश में चुनाव हैं और इस बीच खबर आ रही है कि वहां हिंदुओं को डराया जा रहा है ताकि वह मतदान न कर सकें.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, समुदाय के नेता को जब यह जानकारी मिली कि हिंदुओं को मतदान न करने के लिए डराया धमकाया जा रहा है तो वह ढाका से पांच घंटे का सफर करके मौके पर पहुंचे और स्थानीय प्रशासन से बात करने के बाद सुरक्षा का आश्वासन लेकर लौटे.

बांग्लादेश हिंदू क्यों नहीं है महफूज़?

12 फरवरी को बांग्लादेश में मतदान होना है. ऐसे समय में हिंदू समुदाय के बीच असुरक्षा की भावना दिखाई दे रही है. समुदाय के लोगों का कहना है कि वे डर और चिंता के माहौल में जी रहे हैं. बीएनपी और जमात-ए-इस्लामी की वापसी की संभावना से उनकी चिंताएं और बढ़ी हैं. बांग्लादेश में करीब 90 फीसद आबादी मुस्लिम है, जबकि लगभग 1.3 करोड़ हिंदू रहते हैं.

कब बिगड़े बांग्लादेश के हालात?

अगस्त 2024 में शेख हसीना सरकार के पतन के बाद देश में कानून-व्यवस्था के हालात अचानक से बिगड़ गए थे. समुदाय के नेताओं का दावा है कि पिछले 18 महीनों में अंतरिम सरकार के दौरान हिंदुओं के खिलाफ कथित रूप से करीब 2,700 टारगेटेड हिंसा की घटनाएं हुई हैं. उनका आरोप है कि अंतरिम सरकार पर्याप्त सुरक्षा देने और दोषियों पर कार्रवाई करने में नाकामयाब रही है.

बांग्लादेश के हिंदुओं में क्यों है इतना डर?

रिपोर्ट के मुताबिक, मनींद्र कुमार नाथ ने का कहना है कि हत्या, हमले और मंदिरों पर हमलों की घटनाओं ने अल्पसंख्यकों में भय पैदा किया है. उनका कहना है कि सरकार वास्तविक स्थिति से इनकार कर रही है.

दावें कुछ और ज़मीनी हक़ीक़त एकदम उलट

बीएनपी ने अपने मैनुफेस्टो में 'धार्मिक सद्भाव' का जिक्र किया है.इसके साथ ही पार्टी का कहना है कि धर्म व्यक्तिगत है, राज्य सभी के लिए है. साथ ही पार्टी ने धार्मिक स्वतंत्रता और अल्पसंख्यकों की सुरक्षा का आश्वासन दिया गया है. कुछ ऐसा ही जमात-ए-इस्लामी का भी कहना है.

जमात-ए-इस्लामी के घोषणा पत्र में लिखा है कि वह ऐसा राजनीतिक माहौल चाहती है जहां सभी धर्मों और समुदायों के लोग स्वतंत्र रूप से अपने विचार रख सकें. हालांकि अल्पसंख्यक नेताओं का कहना है कि घोषणापत्र में स्पष्ट और ठोस प्रतिबद्धताएं नहीं दिखतीं.

दीपु दास के गुनाहगारों का क्या?

चुनाव से ठीक पहले अंतरिम सरकार ने दीपु दास हत्याकांड में 12 लोगों की गिरफ्तारी की जानकारी दी है. शिक्षा सलाहकार डॉ. सी. आर. अबरार ने कहा कि दोषियों को कानून के तहत सजा दिलाई जाएगी. सरकार ने पीड़ित परिवार को आर्थिक सहायता देने की भी घोषणा की है. इसमें 25 लाख टका से घर निर्माण, 10 लाख टका नकद सहायता और बच्चे के भविष्य के लिए 5 लाख टका की एफडीआर शामिल है.

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