शेख हसीना ने बांग्लादेश चुनाव को बताया 'काला अध्याय', तारिक रहमान का PM बनना तय; यूनुस अब क्या करेंगे? TOP UPDATES

बांग्लादेश चुनाव में BNP की बड़ी जीत के बाद राजनीतिक समीकरण बदल गए हैं. शेख हसीना ने चुनाव को फर्जी बताया है, जबकि नई सरकार भारत से उनकी वापसी चाहती है. इससे भारत-बांग्लादेश संबंधों की नई परीक्षा शुरू हो गई है.;

बांग्लादेश में मतदान खत्म होते ही अवामी लीग और बीएनपी के बीच छिड़ी जंग

Edited By :  अच्‍युत कुमार द्विवेदी
Updated On : 14 Feb 2026 12:47 AM IST

Bangladesh Election 2026: शेख हसीना ने बांग्लादेश में हुए हालिया संसदीय चुनावों पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए इसे 'धोखे और दिखावे का चुनाव' बताया है. 12 फरवरी को हुए इस चुनाव में उनकी पार्टी बांग्लादेश अवामी लीग ने हिस्सा नहीं लिया, क्योंकि हसीना अगस्त 2024 में सत्ता से हटाए जाने के बाद सुरक्षा कारणों से भारत में रह रही हैं. हसीना का आरोप है कि चुनाव जनता की राय का नहीं बल्कि प्रशासनिक हेरफेर और आंकड़ों के खेल का नतीजा था. उन्होंने मतदान के आंकड़ों पर भी सवाल उठाए और कहा कि इतने कम समय में इतने ज्यादा वोट पड़ना 'अवास्तविक' है.

इस बीच चुनाव में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) ने दो तिहाई बहुमत हासिल करते हुए बड़ी जीत हासिल की है. इससे तारीक रहमान के प्रधानमंत्री बनने की राह साफ हो गई है. BNP की जीत के साथ ही भारत में रह रहीं हसीना को वापस बांग्लादेश भेजने की मांग तेज हो गई है, जिससे भारत के सामने कूटनीतिक चुनौती खड़ी हो गई है.


शेख हसीना के प्रत्यर्पण की मांग क्यों हुई तेज?

BNP नेताओं ने भारत से हसीना को वापस भेजने की मांग तेज कर दी है ताकि वे बांग्लादेश में मुकदमे का सामना कर सकें. पार्टी के वरिष्ठ नेता सलाहुद्दीन अहमद ने कहा कि नई सरकार कानूनी प्रक्रिया के तहत हसीना के प्रत्यर्पण के लिए कदम उठाएगी. हसीना को नवंबर 2025 में एक विशेष ट्रिब्यूनल ने 2024 के आंदोलन के दौरान हिंसा से जुड़े मामलों में अनुपस्थिति में मौत की सजा सुनाई थी. हालांकि हसीना ने सभी आरोपों को राजनीतिक बताया है और निष्पक्ष ट्रायल की मांग की है.


मुहम्मद यूनुस का क्या होगा?

उधर अंतरिम सरकार के प्रमुख सलाहकार रहे नोबेल पुरस्कार विजेता मुहम्मद यूनुस अब सत्ता से हट सकते हैं. छात्र आंदोलन के बाद उन्हें देश में स्थिरता लाने और निष्पक्ष चुनाव कराने की जिम्मेदारी दी गई थी. माना जा रहा है कि नई सरकार बनने के बाद वे सलाहकार की भूमिका में रह सकते हैं, खासकर आर्थिक मामलों में...


BNP सरकार ने क्या सकेत दिया?

नई BNP सरकार ने संकेत दिया है कि वह भारत समेत सभी पड़ोसी देशों से 'बराबरी के रिश्ते' चाहती है. साथ ही सीमा, पानी बंटवारे और सुरक्षा जैसे मुद्दों पर सख्त रुख अपनाने की बात कही है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चुनाव जीत पर रहमान को बधाई देते हुए लोकतांत्रिक और समावेशी बांग्लादेश के लिए भारत के समर्थन की बात कही।


अब क्या करेगा भारत?

भारत के लिए स्थिति बेहद जटिल है. यदि वह हसीना को प्रत्यर्पित करता है तो यह एक पुराने सहयोगी नेता से दूरी का संकेत होगा, जबकि इनकार करने पर नई सरकार से संबंध तनावपूर्ण हो सकते हैं. विशेषज्ञों के अनुसार, दोनों देशों के रिश्ते स्थिरता, अल्पसंख्यकों की सुरक्षा, कट्टरपंथ पर नियंत्रण और चीन के बढ़ते प्रभाव जैसे मुद्दों से भी प्रभावित होंगे.


बांग्लादेश में तेजी से बदल रहे समीकरण

कुल मिलाकर, बांग्लादेश में सत्ता परिवर्तन के बाद राजनीतिक और कूटनीतिक समीकरण तेजी से बदल रहे हैं. शेख हसीना का चुनाव पर हमला, BNP की जीत और प्रत्यर्पण की मांग, ये सभी घटनाएं भारत-बांग्लादेश संबंधों के लिए आने वाले समय की दिशा तय करेंगी.

Similar News